विज्ञापन

जिनकी बदौलत हिट हुई कव्वाली और सूफी

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 13 Oct 2012 03:35 PM IST
people who promoted qawwali and sufi music
ख़बर सुनें
नुसरत फतेह अली खान विभाजन के लगभग एक साल बाद 13 अक्टूबर 1948 को पाकिस्तान में जन्मे। उनका जन्म पाकिस्तान में जरूर हुआ पर उनकी शोहरत मुल्क से परे थी। गायन की अलग-अलग शैली इजाद करने वाले नुसरत ने लगभग हर देश में कव्वाली और सूफी गायन के लाइव शो दिए हैं। कव्वाली, सूफी के अलावा आध्यात्मिक गीतों को आवाज देने वाले नुसरत ने कई हिंदी फिल्मों के गानों को भी अपनी आवाज दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
नुसरत के वालिद फ़तेह अली खान भी एक सफल गायक थे। नुसरत की गायकी में पिता की छाप साफ दिखाई देती है। गायकी की परंपरा को नुसरत की अगली पीढ़ी ने भी आगे बढ़ाया। नुसरत के भतीजे राहत फतेह अली खान भारत में सुने जाने वाले लोकप्रिय गायकों में से एक हैं। नुसरत फतेह अली खान का करियर 1965 से शुरू हुआ। नुसरत ने अपने हुनर से सूफियाना संगीत में कई नए रंग भरने के साथ ही चल रहे रंगों को चटख और गाढ़ा किया। नुसरत की गायकी के दीवाने हर मुल्क में मिल जायेंगे।

गांव के लोगों को सुनाते थे कव्वालीः
नुसरत ने अपनी गायकी की शुरुआत शौकिया अंदाज में की। वह गांव के लोगों को अपनी कव्वाली सुनाया करते थे। धीमे-धीमे यह शौक प्रोफेशन में बदला। प्रोफेशन में जमने के बाद नुसरत ने यहां प्रयोग करने शुरू किए।

कव्वाली में सबसे पहले क्लासिकल का प्रयोग नुसरत ने ही शुरू किया। तबले के साथ लय की जुगलबंदी भी उन्हीं की देन थी। नुसरत की सरगम भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुई। हिन्दी सिनेमा में भी नुसरत की सरगम प्रयोग में लायी गयी।

खूब रास आईं हिंदी फिल्में

बैंडिट क्वीन, धड़कन, कारतूस, और प्यार हो गया, दिल्लगी और कच्चे धागे जैसी फिल्मों में उनका संगीत खूब हिट हुआ। रहमान के साथ्ा उन्होंने बंदेमातरम गीत को भी आवाज दी। कव्वाली और सूफी गानों को एक नए अंदाज में गाने वाले नुसरत ने भारत में अपने लाखों प्रशंसक बनाए।

कई मुल्कों में गाए गीतः
नुसरत ने दुनिया के कई नामचीन संगीतकारों के साथ काम किया। हॉलीवुड के लोकप्रिय संगीतकार पीटर गेब्रीअल के साथ उनकी कम्पोजिंग लोकप्रिय रही। पॉप और रोक म्यूजिक के दौर में नुसरत ने अमेरिका और ब्रिटेन में सूफी संगीत की चाहत लोगों में पैदा की।

”किन्ना सोणा तेनु रब ने बनाया”इस गाने ने युवाओं के बीच नुसरत को लोकप्रिय बना दिया। नुसरत को कभी नए संगीतकारों के साथ काम करने में मुश्किल नही आई।

हम सुनते रहे वही चल दिए महफिल छोड़केः
हिंदुस्तान में राजकपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक उनकी गायकी के दीवाने है। आज के दौर के सभी गायक उन्हें सच्चा सूफी गायक मानते हैं। अपने जीवन के अंतिम दिनों तक नुसरत साहब गीतों को आवाज देते रहे। गुर्दा फेल हो जाने से 16 अगस्त 1997  में इस महान फनकार कर इंतकाल हो गया।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

India News Archives

सीधी लड़ाई में कांग्रेस से हारी भाजपा, राममंदिर और धारा 370 पर जा सकती है वापस

कांग्रेस से सीधी लड़ाई में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस हार के बाद भाजपा फिरसे राममंदिर और धारा 370 पर वापस लौट सकती है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कोशिश करेगी कि चुनाव राहुल बनाम मोदी हो।

12 दिसंबर 2018

विज्ञापन

प्लेन में ‘डायमंड’ लगे देखकर चौंके लोग, जानिए असली हकीकत

डायमंड लगे  इस प्लेन को देखकर लोग चौंक गए हैं। सोशल मीडिया पर तरह तरह के कमेंट्स कर रहे हैं, क्या है इसकी हकीकत जानिए

7 दिसंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree