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पांच सौ खतों में छिपा है ‘पाकीजा मोहब्बत' का राज
संदीप पिंटू/ अमरोहा
Updated Wed, 07 Nov 2012 04:21 PM IST
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भले ही रुपहले परदे पर ‘पाकीजा’ को रिलीज हुए चालीस बरस बीत चुके हैं, लेकिन कमाल अमरोहवी और मीना कुमारी की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू भी हैं, जिनसे शायद कभी परदा नहीं हट सकेगा। हालांकि सच यह है कि जमाने की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी व शौहर कमाल अमरोहवी के बीच चली मुहब्बत के दरम्यान लिखे पांच सौ से ज्यादा ऐसे खत आज भी मौजूद हैं जिनमें आज भी ‘पाकीजा’ का राज छिपा है। बाबा (कमाल) और छोटी मां (मीना कुमारी) की लाडली बेटी के पास ये खत उनकी सुनहरी यादों की शक्ल में महफूज हैं।
‘पाकीजा’ बनाकर दुनिया में अमरोहा की सरजमीं को पहचान दिलाने वाले लेखक एवं निर्देशक कमाल अमरोहवी की बेटी रुखसारे जहरा ने अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान ऐसा दर्द बयां किया मानों सात दशक पुराने दौर में पाकीजा मुहब्बत ताजा हो गई। बाबा (कमाल अमरोहवी) की जिंदगी से जुड़ी यादें साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पापा ने कभी मां को तलाक नहीं दिया, दोनों एक-दूसरे से बेपनाह मुहब्बत करते थे। हां, रूठने और मनाने का सिलसिला चलता था।
सिर्फ सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए कुछ लोग झूठी कहानियां पेश कर रहे हैं। हकीकत में इनका कोई वजूद नहीं। इस दर्द को बयां करते हुए कमाल की लाडली बेटी जार-जार रो पड़ी, गला सूखने पर आवाज भी भर्रा गई।बगल में बैठे मामू (मोहम्मद अली हैदर) के हाथ पानी के घूंट से गला तर करने के कुछ क्षण बाद बोलीं- मेरे बाबा अजीम शख्सियत थे, चंद हाथों ने सस्ती शोहरत के लिए उनको विलेन बनाकर पाकीजा मुहब्बत की उल्टी कहानी लिख डाली।
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अब अपने पेशे की कामयाबी के लिए पाकीजा मुहब्बत में बेबुनियाद तड़का लगाकर उसे परोस रहे हैं। त्योरियां चढ़ाती हुई बोलीं- मुहब्बत को रुसवा करने वालों को जवाब देने के लिए उनके पास एक या दो नहीं, बल्कि कच्ची पेंसिल और स्याही से दोनों के हाथ से लिखे छोटी मां व बाबा के पांच सौ से ज्यादा खत हैं। जिनके मंजर-ए-आम पर आने पर सबकी जुबान बंद हो जाएंगी, लेकिन फिर कहा कि.. मरते दम तक ऐसा नहीं करूंगी, मौत का एहसास होने से पहले ही इन खतों को जला दूंगी। नहीं चाहूंगी कि कब्र में दफन रूह को इस इंसानी फितरत और फजीहत उठानी पड़े।
जब तोहफे में मिली अंगूठी और गरारा
कमाल अमरोहवी की इकलौती बेटी रुखसारे ज़हरा कहती हैं मैं बहुत नादां थी। बमुश्किल छह बरस की उम्र में एक रोज स्कूल से आई तभी बड़ी मां ने नजर पड़ते ही झुंझलाहट में एक रिसाला (मैगजीन) मचान में फेंक दिया। माथा ठनका। बड़ी मां के पड़ोस में जाते ही मैगजीन देखी तब बाबा (कमाल अमरोहवी) और मीना कुमारी की तस्वीर के साथ रिश्तों का शिगूफा छपा था।
इक रोज सीनियर स्टूडेंट ने पूछा आपके पापा ने दूसरा निकाह कर लिया? अवाक रह गई। पूछने पर मां ने हकीकत बयां कर दी। छोटी मां बताकर मुंबई बाबा के घर ले गई। झक सफेद लिबास में निकलीं बेहद खूबसूरत हस्ती ने चूमते हुए गरारा देकर किसी ‘अपने’ के होने का अहसास कराया। ‘बाबा’ की खुशियों के खातिर मां ने छोटी मां से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
अक्सर हाथ से गरारा सिलकर छोटी मां को भेजने वाली मां ने सौतेले रिश्तों का इल्म किसी को नहीं होने दिया। रुखसारे ज़हरा बताती हैं कि बाबा की चंद यादों में वो लम्हे आखिरी सांस नहीं भुलाना चाहेंगी जब मात्र तेरह बरस की उम्र में पाकीजा के सेट पर महमूद स्टूडियो में सभी ने सीने से लगा लिया।
मधुबाला भी थी अमरोही पर फिदाः
महल की शूटिंग के दौरान मधुबाला भी कमाल अमरोहवी पर बेपनाह फिदा थीं। इतना ही नहीं उन्होंने इजहार-ए-इश्क करते हुए तमाम दौलत कदमों में डालने की पेशकश भी रख दी। लेकिन कमाल ने परिवार को छोड़कर नई जिंदगी बसाने के सवाल पर मधुबाला की मुहब्बत को ठुकरा दिया।
फिल्मी दुनिया में पाकीजा के निर्माता/निर्देशक कमाल अमरोहवी पर मर मिटने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। मीना कुमारी के साथ मधुबाला का नाम भी इन्हीं दीवानों में शुमार है। लेकिन अदबी माहौल में परवरिश पाने वाले कमाल ने कभी खुद्दारी से सौदा नहीं किया। यही वजह रही कि मधुबाला से इंकार के बाद उन्होंने मीना कुमारी की पाकीजा मुहब्बत कुबूल कर ली। क्योंकि मीना के प्यार में शर्तें शामिल नहीं थीं।
ऐसा भी नहीं कि ये नया रिश्ता ज्यादा दिन परदे में रखा, बल्कि अमरोहा में मौजूद शरीक-ए-हयात को मुहब्बत की कहानी सुनाने में जरा देर न लगाई। रुखसारे जहरा से बातचीत में खुले इन ‘राज’ से इतना जरूर है, कि कमाल ने दोनों के साथ रिश्ता बखूबी निभाया, मुहब्बत में कभी समझौता नहीं किया। वह कहती हैं कि एक-एक बात का सुबूत उनके पास मौजूद है।
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‘पाकीजा’ बनाकर दुनिया में अमरोहा की सरजमीं को पहचान दिलाने वाले लेखक एवं निर्देशक कमाल अमरोहवी की बेटी रुखसारे जहरा ने अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान ऐसा दर्द बयां किया मानों सात दशक पुराने दौर में पाकीजा मुहब्बत ताजा हो गई। बाबा (कमाल अमरोहवी) की जिंदगी से जुड़ी यादें साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पापा ने कभी मां को तलाक नहीं दिया, दोनों एक-दूसरे से बेपनाह मुहब्बत करते थे। हां, रूठने और मनाने का सिलसिला चलता था।
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सिर्फ सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए कुछ लोग झूठी कहानियां पेश कर रहे हैं। हकीकत में इनका कोई वजूद नहीं। इस दर्द को बयां करते हुए कमाल की लाडली बेटी जार-जार रो पड़ी, गला सूखने पर आवाज भी भर्रा गई।बगल में बैठे मामू (मोहम्मद अली हैदर) के हाथ पानी के घूंट से गला तर करने के कुछ क्षण बाद बोलीं- मेरे बाबा अजीम शख्सियत थे, चंद हाथों ने सस्ती शोहरत के लिए उनको विलेन बनाकर पाकीजा मुहब्बत की उल्टी कहानी लिख डाली।
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अब अपने पेशे की कामयाबी के लिए पाकीजा मुहब्बत में बेबुनियाद तड़का लगाकर उसे परोस रहे हैं। त्योरियां चढ़ाती हुई बोलीं- मुहब्बत को रुसवा करने वालों को जवाब देने के लिए उनके पास एक या दो नहीं, बल्कि कच्ची पेंसिल और स्याही से दोनों के हाथ से लिखे छोटी मां व बाबा के पांच सौ से ज्यादा खत हैं। जिनके मंजर-ए-आम पर आने पर सबकी जुबान बंद हो जाएंगी, लेकिन फिर कहा कि.. मरते दम तक ऐसा नहीं करूंगी, मौत का एहसास होने से पहले ही इन खतों को जला दूंगी। नहीं चाहूंगी कि कब्र में दफन रूह को इस इंसानी फितरत और फजीहत उठानी पड़े।
जब तोहफे में मिली अंगूठी और गरारा
कमाल अमरोहवी की इकलौती बेटी रुखसारे ज़हरा कहती हैं मैं बहुत नादां थी। बमुश्किल छह बरस की उम्र में एक रोज स्कूल से आई तभी बड़ी मां ने नजर पड़ते ही झुंझलाहट में एक रिसाला (मैगजीन) मचान में फेंक दिया। माथा ठनका। बड़ी मां के पड़ोस में जाते ही मैगजीन देखी तब बाबा (कमाल अमरोहवी) और मीना कुमारी की तस्वीर के साथ रिश्तों का शिगूफा छपा था।
इक रोज सीनियर स्टूडेंट ने पूछा आपके पापा ने दूसरा निकाह कर लिया? अवाक रह गई। पूछने पर मां ने हकीकत बयां कर दी। छोटी मां बताकर मुंबई बाबा के घर ले गई। झक सफेद लिबास में निकलीं बेहद खूबसूरत हस्ती ने चूमते हुए गरारा देकर किसी ‘अपने’ के होने का अहसास कराया। ‘बाबा’ की खुशियों के खातिर मां ने छोटी मां से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
अक्सर हाथ से गरारा सिलकर छोटी मां को भेजने वाली मां ने सौतेले रिश्तों का इल्म किसी को नहीं होने दिया। रुखसारे ज़हरा बताती हैं कि बाबा की चंद यादों में वो लम्हे आखिरी सांस नहीं भुलाना चाहेंगी जब मात्र तेरह बरस की उम्र में पाकीजा के सेट पर महमूद स्टूडियो में सभी ने सीने से लगा लिया।
मधुबाला भी थी अमरोही पर फिदाः
महल की शूटिंग के दौरान मधुबाला भी कमाल अमरोहवी पर बेपनाह फिदा थीं। इतना ही नहीं उन्होंने इजहार-ए-इश्क करते हुए तमाम दौलत कदमों में डालने की पेशकश भी रख दी। लेकिन कमाल ने परिवार को छोड़कर नई जिंदगी बसाने के सवाल पर मधुबाला की मुहब्बत को ठुकरा दिया।
फिल्मी दुनिया में पाकीजा के निर्माता/निर्देशक कमाल अमरोहवी पर मर मिटने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। मीना कुमारी के साथ मधुबाला का नाम भी इन्हीं दीवानों में शुमार है। लेकिन अदबी माहौल में परवरिश पाने वाले कमाल ने कभी खुद्दारी से सौदा नहीं किया। यही वजह रही कि मधुबाला से इंकार के बाद उन्होंने मीना कुमारी की पाकीजा मुहब्बत कुबूल कर ली। क्योंकि मीना के प्यार में शर्तें शामिल नहीं थीं।
ऐसा भी नहीं कि ये नया रिश्ता ज्यादा दिन परदे में रखा, बल्कि अमरोहा में मौजूद शरीक-ए-हयात को मुहब्बत की कहानी सुनाने में जरा देर न लगाई। रुखसारे जहरा से बातचीत में खुले इन ‘राज’ से इतना जरूर है, कि कमाल ने दोनों के साथ रिश्ता बखूबी निभाया, मुहब्बत में कभी समझौता नहीं किया। वह कहती हैं कि एक-एक बात का सुबूत उनके पास मौजूद है।