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'सलाम बॉम्बे' से 'कामसूत्र' तक

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 15 Oct 2012 12:04 PM IST
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mira nair journey from salaam bombay to kamsutra

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मीरा नायर, ये नाम जेहन में आते ही 'सलाम बांबे' और मानसून वैडिंग के सीन उभर आते हैं। बोल्ड और सार्थक सिनेमा की जननी कही जाने वाली मीरा नायर का आज जन्मदिन है। भुवनेश्वर में जन्मी मीरा नायर का नाम विश्व पटल पर लीक से हटकर फिल्में बनाने वाले लोगों की श्रेणी में आता है।
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मीरा भले ही इन दिनों भारत में न रह रही हों, लेकिन भारत की नब्ज को वो इतना अच्छी तरह जानती है कि कई संवेदनशील मसलों पर उनकी फिल्में दुनिया भर में चर्चा में रहीं।


मीरा की सफल गाथा
ऐसा नहीं है कि मीरा को केवल सलाम बॉम्बे (1988) से ही जाना जाता है। मिसीसिपी मसाला (1991), दि पेरेज़ फेमिली (1995), कामसूत्र: ए टेल ऑफ लव (1996), मॉनसून वैडिंग (2001), वेनिटी फेयर (2004), दि नेमसेक (2006) और एमेलिया (2009) भी मीरा की सफल गाथा में शुमार हैं, जिन्हें अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना के साथ-साथ पुस्कार भी मिले।

मीरा नायर ने फिल्मों के साथ साथ लघु फिल्में भी बनाई हैं, जिनमें 9/11, हिस्टीरिकल ब्लाइंडनेस, माइग्रेशन-एड्स
जागो, सो फार फ्रॉम इंडिया, इंडिरा कैबरे, दिडे दिमरसिडीज़ बिकेम ए हैट, लॉफिंग क्लब ऑफ इंडिया और हाउ कैन इट बी शामिल हैं।
 
सलाम बांबे से की शुरूआत
इसे कमाल ही कहा जा सकता है कि मीरा नायर ने 1988 में सलाम बांबे जैसी फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की। इस पहली ही फिल्म के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में गोल्डेन कैमरा अवार्ड मिला। यही नहीं, भारत में सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीतने का गौरव भी मीरा नायर की इस फिल्म को मिला।

किसी मुद्दे से परहेज नहीं
महिला होने के बावजूद सेक्स और आध्यात्म जैसे मुद्दों पर बेहतरीन पकड़ और विरोध के बावजूद इन मसलों पर फिल्में बनाने का जज्बा मीरा नायर के पास पहले से ही रहा है। मीरा पहली भारतीय फिल्म निर्देशक हैं, जिन्होंने देश के साथ साथ विदेश खासकर अमेरिका में अपनी अलग पहचान बनाई है।

मीरा को हमेशा ही आम मसाला फिल्मों से अलग हटकर फिल्में बनाने का शौक रहा है और ये शौक कब जुनून में बदल गया, पता ही नहीं चला। मीरा की फिल्मों से स्पष्ट होता है कि आधुनिक कला और समाज में नारी सृजनशीलता की भूमिका बढ़ रही है।

पढ़ाई लिखाई और अमेरिका का रुख
यूं तो मीरा की प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई शिमला की वादियों में हुई लेकिन कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए मीरा दिल्ली आ गई। यहां उन्होंने मिरांडा हाउस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए मीरा अमेरिका चली गई। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ग्रैजुएट नायर ने बतौर एक्ट्रेस कला के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने फिल्म डायरेक्शन की ओर रुख किया।

इस साल मिलेंगी ये उपलब्धि
इन दिनों मीरा अपनी नई उपलब्धि पर काफी खुश है। दरअसल इस साल वीनस का 69वां फिल्म महोत्सव मीरा की फिल्म ‘अनिच्छुक कट्टरपंथी’ से शुरू होने जा रहा है।

ये फिल्म पाकिस्तानी लेखक मोहसिन हामिद के उपन्यास का रूपांतर है और खास बात ये है कि इस उपन्यास को बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा चुका है।

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