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जिन्दगी के पड़ाव!
Updated Fri, 12 Jun 2015 08:00 PM IST
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विभिन्न आयु के छात्रो का सबसे अच्छा सामूहिक उदाहरण:
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पहली से तीसरी कक्षा तक: मुझे तो पूरा पर्चा आता था।
चौथी से छटी कक्षा तक: यार 8 नंबर वाला प्रश्न तो बहुत मुश्किल था मैंने सिर्फ उसे ही छोड़ा है।
सातवी से दसवी कक्षा तक: मैंने तो सिर्फ मुख्य ही प्रश्न किये हैं।
ग्यारवी कक्षा में: मुझे लगता है पास होने के लिए चार पाठ पढ़ना बहुत है।
बाहरवीं कक्षा: कल पेपर कौन सा है यार।
और कॉलेज के दिनों में: सालों बता तो देते आज पेपर है, मैं तो पेन भी नहीं लाया।