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इरफान खान ने खोला, 'तलवार' फिल्म का असली राज

Tue, 06 Oct 2015 05:07 PM IST
Updated Tue, 06 Oct 2015 05:07 PM IST
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Irfan Khan interview about Talvar and Jazbaa

-बीते शुक्रवार को फिल्म तलवार ने ऐक्टर इरफान खान के ग्राफ को कुछ और ऊंचा किया। इस शुक्रवार को वह जज्बा के साथ आएंगे। दोनों फिल्में अलग मिजाज और अंदाज की हैं। इन फिल्मों समेत बदलते हुए सिनेमा पर इरफान खान से बातचीत की रवि बुले ने...

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-तलवार को मिली प्रतिक्रियाओं पर क्या कहेंगे?
- दर्शक आज ऐसी फिल्में देखना चाहते हैं। तलवार दर्शकों की हर तरह से परीक्षा लेती है लेकिन फिर भी उन्होंने इस फिल्म को पंसद किया। दर्शक सिर्फ रूटीन फिल्में देखने को तैयार नहीं हैं।
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-तलवार में आपका लुक और अभिनय का अंदाज पिछली फिल्मों से काफी अलग है। क्या आप निर्देशक के अनुसार अपने रोल की तैयारी करते हैं?
- मैं हमेशा कहानी के हिसाब से अपने आप को तैयार करता हूं कि वह मुझसे और मेरे किरदार से क्या डिमांड कर रही है। आप जो कुछ करते हैं, निर्देशक जो आपसे कराना चाहता है वह कहानी के अनुसार ही होता है। आप अगर जरा भी कहानी से इधर-उधर हुए तो वह गड़बड़ा जाती है। कहानी सबसे जरूरी है।

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जज्बा में इरफान के किरदार बारे में जानिए अभी

Irfan Khan interview about Talvar and Jazbaa
-संजय गुप्ता की फिल्मों की पहचान ऐक्शन सीन भी होते हैं। जज्बा में आपके हिस्से कितना और कैसा ऐक्शन आया है?
- ऐक्शन तो इसमें मैंने किया है जैसा मुझसे कहा गया लेकिन मेरे रोल की खास बात इसमें वो जज्बात हैं जो ऐक्शन से पहले और उसके बाद मन में आते हैं। ऐश्वर्या के साथ मेरी रूटीन कैमेस्ट्री नहीं है, जैसी हिंदी फिल्मों में हुआ करती है कि हीरो-हीरोइन मिले और उनमें प्यार हो गया।

-जज्बा में आपको क्या खास बात लगी?
- यह एक कंप्लीट पैकेज है। मुझे इसमें यह बात खास लगी कि इसमें मुझे वन-लाइनर्स बोलने को मिले, जो आम तौर पर ऐसी थ्रिलर-ऐक्शन फिल्मों में ही होते हैं।

-फिल्म इंडस्ट्री में आपको दो दशक से ऊपर हो गए हैं। सिनेमा में क्या बदलाव देखते हैं?
- सबसे विशेष तो यह है कि दर्शक बदल गए हैं। उन्होंने बदलाव की इच्छा की और सिनेमा को बदलना पड़ा। दर्शक अब अपने आस-पास की कहानी देखना चाहते हैं। नएपन की अनुभूति चाहते हैं। यही नहीं, वह यह सब उस भाषा में देखना चाहते हैं जिसमें बोलते-बतियाते हैं। एक नया दर्शक वर्ग खड़ा हो गया है। उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वास्तव में वह दर्शक ही हैं जो सिनेमा को बदलेंगे। शशि कपूर साहब ने एक समय बहुत अच्छी-अच्छी फिल्में बना कर सिनेमा को बदलने का प्रयास किया था... तब क्या हुआ?

मसाला फिल्मों पर क्या सोचते हैं इरफान?

Irfan Khan interview about Talvar and Jazbaa
-लेकिन सबसे बड़ा दर्शक वर्ग मसाला फिल्मों का है। उसके लिए सबसे ज्यादा फिल्में बनती हैं। उनके सितारे सबसे पापुलर हैं। क्या आप ये फिल्में देखते हैं। इनके बारे में क्या सोचते हैं?
- ये फिल्में मैं देख तो नहीं पाता हूं लेकिन मानता हूं कि यह सिनेमा हर काल में जरूरी था, आज भी है और कल भी रहेगा। इसके बावजूद फार्मूला फिल्में बनाने वाले डायरेक्टरों में कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपनी कहानी में आत्मा पिरो देते हैं। वे दिल को छू लेते हैं। आज हर तरह की फिल्में बन रही हैं और बहुत कुछ कहा जा रहा है। हर आदमी को आजादी है अपनी तरह की कहानी कहने की।

-आप हॉलीवुड फिल्मों में भी लगातार काम कर रहे हैं। यहां और वहां फिल्म निर्माण में क्या मूल फर्क पाते हैं?
- वे लोग कहानी पर जबर्दस्त ढंग से काम करते हैं। फिल्म बनाते वक्त तात्कालिक बजट और कलेक्शन पर विचार नहीं करते, वह सोचते हैं कि आज से पांच साल बाद फिल्म की क्या स्थिति होगी, वह पांच साल में कितना कमा कर देगी क्योंकि उससे ही उनकी स्थिति तय होगी। हमारे यहां की तरह नहीं है कि फिल्म रिलीज के साथ कलेक्शन पर बात खत्म हो जाए।

-विदेशी फिल्मों में भारतीय ऐक्टरों की संख्या बढ़ रही है क्या यह विदेश में बसे भारतीयों के कारण है?
- ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके बजट और दर्शक वर्ग के सामने तो हमारी संख्या मुट्ठी भर भी नहीं है। ऐक्टरों को उनके टैलेंट के कारण वहां काम मिल रहा है।

क्या कभी फिल्म बनाएंगे इरफान, निर्माता बनेंगे या निर्देशक?

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-क्या आप फिल्म निर्माण में उतरने का इरादा रखते हैं?
- जरूर, लेकिन मुझे ऐसे निर्देशकों की जरूरत है जो मेरे विजन को पर्दे पर उतार सकें। मेरे पास दो-तीन विषय भी हैं।

-क्या खुद निर्देशन करेंगे?
- ऐसी कोई तमन्ना नहीं है।

-तमाम फिल्मी सितारे छोटे पर्दे का रुख कर रहे हैं, आप टीवी पर फिर कब दिखेंगे?
- मैं टीवी पर फिलहाल काम नहीं करूंगा क्योंकि टीवी के दर्शकों की संख्या नहीं बढ़ रही है। इस देखने नए दर्शक नहीं जुड़ रहे। सीमित दर्शक संख्या में टीवी के शो की लोकप्रियता टीआरपी सिस्टम से नापी जाती है और यह घटती-बढ़ती रहती है। ऐसे में मुझे टीवी पर अभी खास गुंजायश नहीं दिखती। इक्का-दुक्का शो जरूर कभी लोगों को आकर्षित कर लेते हैं।

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