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मुश्किल था मुनिया का किरदारः हुमा कुरैशी

Fri, 15 Nov 2013 10:25 AM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Fri, 15 Nov 2013 10:25 AM IST
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interwiue of huma qureshi

मुनीरा असलम जिया उर बानो उर्फ मुनिया। फिल्म ‘डेढ़ इश्किया’ यह नाम है हुमा कुरैशी का। गैंग्स ऑफ वासेपुर, लव शव ते चिकन खुराना, डायन और डी-डे जैसी फिल्मों से पहचान बना चुकी हुमा मानती हैं कि वह किस्मत की धनी हैं और बॉलीवुड में उन्हें बहुत जल्दी बड़े सितारों के साथ काम करने का मौका मिला है। ‘

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डायरेक्टर अभिषेक चौबे ने जब यह फिल्म आपको प्रपोज की तो टाइटल सुन कर कैसा लगा था?
 

मैं टाइटल सुनते ही समझ गई थी कि यह फिल्म बहुत मजेदार होगी क्योंकि जो डायरेक्टर अपनी फिल्म के सीक्वल के साथ टू या थ्री नहीं लगा रहा, बल्कि उसे ‘डेढ़’ बता रहा है, उसमें काम करना सचमुच बहुत शानदार रहेगा।

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उसमें बहुत पागलपन रहेगा। ऐसा ही हुआ भी। फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ते वक्त और जब सारे ऐक्टरों ने एक साथ बैठकर इसका नरेशन किया तो हम सब खूब हंसे थे। काम करते हुए भी बहुत मजा आया।

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फिल्म में आपसे काफी अनुभवी और जमे हुए कलाकार हैं। उनके कद के बीच आप वाकई मुनिया हैं। फिल्म में यह मुनिया क्या करती है?


यह बहुत कुछ करती भी है और कुछ भी नहीं करती है। महमूदाबाद नाम की एक जगह है, फिल्म वहां पर है। वहां एक किला है। माधुरी (दीक्षित) उस किले की बेगम साहिबा हैं। मुनिया हमेशा उनके साये की तरह साथ रहती है। खालूजान (नसीरूद्दीन शाह) और बब्बन मियां (अरशद वारसी) वहां पहुंचते हैं। दोनों दिलफेंक और टपोरी टाइप हैं। उन्हें इन दोनों से प्यार हो जाता है।

‘इश्किया’ में प्यार का त्रिकोण था। क्या इस बार भी ऐसा कुछ है?

नहीं, खालूजान और बब्बन के दिमाग में सारी बातें साफ हैं। खालूजान को बेगम साहिबा से प्यार होता है और बब्बन को मुनिया से। लेकिन बेगम साहिबा और मुनिया इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या उन्हें वाकई इन लोगों से प्यार है।

वे नहीं जानती हैं कि आखिर इन दोनों से चाहती क्या हैं? इस चक्कर में बहुत सारी घटनाएं होती हैं, जिन्हें देख कर आपको खूब मजा आएगा।

ऐसे में आपको मुनिया का रोल प्ले करने में बहुत मजा आया होगा?

सचमुच बहुत मजा आया। मुनिया का बैकग्राउंड मुस्लिम है तो मेरे लिए उसकी भाषा, रहन-सहन और अंदाज जाने-पहचाने थे। मुनिया जैसे लोग मैंने देखे थे।

लेकिन सबसे खास बात यह है कि फिल्म में सब अच्छा या बुरा, कॉमिक अंदाज में है। किसी को देखने से खराब नहीं लगेगा। मुनिया जैसी मस्ती मैंने रियल लाइफ में कभी की नहीं थी, इसलिए लगा कि जो मस्ती है वह यहीं कर लो। ऐसा रोल भी मैंने पहले कभी नहीं किया था।

नसीर, माधुरी और अरशद जैसे सीनियर कलाकारों के साथ काम करना कैसा अनुभव था?

मैं बिल्कुल टेंस नहीं थी। मैं सैट पर जाने से पहले यह नहीं सोचती थी के ओ गॉड नसीरजी के सामने मैं कैसे अच्छी उर्दू बोलूंगी।

कैसे माधुरीजी के साथ डांस स्टेप्स करूंगी। अरशद के साथ कैसे उनकी एनर्जी की तरह काम करूंगी। मैं दूसरों के परफॉरमेंस को लेकर कभी खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करती हूं।

मैं सिर्फ अपना बेस्ट देने के बारे में विचार करती हूं। आप खुद सोचिए कि मैं कैसे इन लोगों से मुकाबला कर सकती हूं? मैं केवल अपने पर फोकस करती हूं।

आप फिल्म में माधुरी की परछाई की तरह हैं, क्या उन्होंने आपकी फिल्में देखी हैं?

नहीं, उन्होंने मेरी फिल्में तो नहीं देखी हैं लेकिन उन्होंने मेरी फिल्मों और मेरे काम के बारे में पहले से सुना जरूर था।

फिल्म का बड़ा हिस्सा लखनऊ में शूट हुआ। वहां आपके दिन कैसे बीते?

-हमने लखनऊ में फिल्म की सबसे ज्यादा शूटिंग की। कुछ हिस्सा गुजरात में शूट हुआ। कुछ कर्जत (मुंबई) में। लखनऊ में मुझे बहुत मजा आया। वहां मैंने ढेर सारी शॉपिंग की।

अपने लिए एक सफेद रंग की बहुत सुंदर साड़ी खरीदी। मां के लिए बहुत सारे सूट खरीदे। वैसे लोग लखनऊ के कबाब की बात करते हैं, लेकिन आपको बताऊं कि लखनऊ की चाट के सामने वहां के कबाब फेल हैं। आप जब भी लखनऊ जाएं, वहां की चाट जरूर खा।

रिचा से हथियाई ‘डेढ़ इश्किया’...

हुमा भले ही कहती हैं कि बॉलीवुड में दो हीरोइनों के बीच ‘कैट फाइट’ की खबरें मीडिया उड़ाता है, लेकिन इससे कैसे इंकार किया जा सकता है कि बिना आग के धुआं नहीं उठता।

बीते कुछ समय से हुमा के कल्की कोचिलीन और रिचा चड्ढा के साथ संबंध खराब होने की चर्चाएं गर्म हैं। निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप के साथ हुमा की नजदीकियों की बातों ने कल्की के साथ उनके संबंध बिगाड़े तो कहा जा अभिनेत्री रिचा चड्ढा को ऑफर होने के बाद ‘डेढ़ इश्किया’ हुमा ने हथिया ली।
 

सूत्रों का दावा है कि रिचा को इस फिल्म के लिए फाइनल कर लिया गया था, मगर तभी हुमा ने निर्देशक अभिषेक चौबे से मुलाकात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि जितनी अच्छी उर्दू वे बोल सकती हैं, मुस्लिम युवती के किरदार की जितनी बारीकियां वे समझ सकेंगी, उतनी रिचा नहीं।



नतीजा यह कि रिचा को फिल्म से बाहर कर दिया गया। हालांकि हुमा इन बातों का खंडन करती हैं। वह कहती हैं, ‘मैं नहीं जानती कि पहले इस फिल्म में रिचा को लिया गया था।

मुझे तो डायरेक्टर ने फोन करके बताया कि तुम्हें मुनिया का किरदार निभाना है। मैं क्यों ना कहती?’ हुमा के अनुसार, ‘मुझे उर्दू का ज्ञान है और मैं नुक्ते की भी गड़बड़ी नहीं होने देती।

अभिषेक ने कहा था कि उन्हें ऐसी ही हीरोइन चाहिए जो अच्छी उर्दू बोले और देसी मुस्लिम लड़की नजर आए। मैंने वही किया जो निर्देशक ने मुझसे कहा।’

 

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