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'भूत तभी आता है जब लड़की नहा रही होती है'

Fri, 29 Aug 2014 08:50 AM IST
Updated Fri, 29 Aug 2014 08:50 AM IST
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interview of vikram bhatt

आप कह रहे हैं कि ‘क्रीचर’ थ्रिलर है, लेकिन आपके रिकॉर्ड और ट्रेलर को देख कर लोग मान रहे हैं कि यह हॉरर है!

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लोगों का मानना गलत भी नहीं है। ‘क्रीचर’ हॉरर है भी और नहीं भी। डर के अलग-अलग रूप होते हैं। चुड़ैल का डर, भूतों का डर, छिपकली का डर, कॉकरोच का डर। एक डर उस चीज को लेकर है जिसे देखा नहीं, सिर्फ सुना है। दूसरा डर कुछ देखने से पैदा हो रहा है। दूसरा डर ऐसा नहीं है कि आपको जान का खतरा लगेगा, हार्ट अटैक आ जाएगा। इसमें सिर्फ यह है कि भाई इस चीज से दूर हो जाओ। इसमें किसी ओझा-तांत्रिक को आप नहीं बुलाएंगे।
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लेकिन ‘क्रीचर’ में तो भूत-चुड़ैल नहीं है। कुछ और ही है।

मेरी कोशिश है कि इक्कीसवी सदी की फिल्में बनाऊं। यह दौर ऐसा है कि आप नया और अलग नहीं करेंगे तो मिट जाएंगे। ‘क्रीचर’ और इसके बाद आने वाली ‘मिस्टर एक्स’ में मेरी कोशिश यही है। थ्री-डी में ‘हॉन्टेड’ बनाकर मैं हॉरर फिल्मों में एक नयापन लाया था, जिसे ‘राज-3’ में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। फिर सोचा कि अब नया क्या कर सकता हूं।
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थोड़ा अलग हटकर कुछ नए किस्म का डर बनाना चाहिए। हॉलीवुड ने पिछले कुछ बरसों में अपनी पौराणिक कथाओं को हमारे वक्त में अनुरूप ढाल कर फिल्में बनानी शुरू की हैं। मुझे लगा कि हम अपनी फिल्मों में ऐसा क्यों नहीं कर सकते? तब मैंने ब्रह्मराक्षस को पर्दे पर उतारने का फैसला किया। उसे हमने डिजिटल तकनीक के जरिये एक नया रूप दिया।


हीरोइन ज्यादा क्यों डरती हैं?

interview of vikram bhatt

हमारी पौराणिक कथाओं में तमाम रूप-रंग के राक्षस हैं। ब्रह्मराक्षस को ही क्यों चुना?

मैं जो कहानी पढ़ रहा था उसमें मैंने पाया कि ब्रह्मराक्षस लड़की के खिलाफ है। तभी मुझे निर्भया कांड याद आया और आज हो रही अन्य घटनाएं भी मेरे दिमाग में कौंधी। मुझे लगा कि कोई भी समय हो एक अकेली लड़की को हमेशा राक्षसों से जूझना पड़ता है। मेरी कहानी की नायिका भी अकेली है तो मुझे लगा कि ब्रह्मराक्षस बिल्कुल ठीक रहेगा।

हॉरर फिल्मों में नायिकाओं की भूमिका अहम होती है, लेकिन वे डरी हुई कमजोर होती हैं। भागती रहती हैं। ऐसा क्यों?

वैसे यह बात तो कहानी पर निर्भर करती है कि नायिका कैसी होगी क्या करेगी, लेकिन हमारे यहां हीरो को लार्जन दैन लाइफ रोल मिलते रहे हैं। वह किसी से डरता नहीं है। दुश्मन कितना ही शक्तिशाली हो, हीरो उसे परास्त करता है। अगर आप सैट पर हीरो से कह दीजिए कि इस सीन में आप डरे हुए हैं तो वह सवाल करेगा कि अरे, मैं डरा हुआ हूं... कैसे... क्यों?

अब भाई राक्षस सामने है तो डरना ही पड़ेगा। लेकिन हीरो डरेगा नहीं। अब डरावनी फिल्म में हीरो डरेगा नहीं तो दर्शक के मन में कैसे डर पैदा होगा? ऐसे में हॉरर फिल्म में डर पैदा करने के लिए हीरोइन ज्यादा कारगर साबित होती है। उस पर वह अकेली हो तो ज्यादा बढ़िया है।

हॉरर में सेक्स का तड़का भी

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हॉरर को आसान विषय माना जाता है कि उसके तय फार्मूले है। उसे नए चेहरों के साथ बनाया जा सकता है। उसके दर्शक बड़ी संख्या में हैं। ऐसे में ज्यादातर फिल्में सफल होती हैं। क्या आप सहमत हैं?

पूरी तरह से तो ऐसा नहीं है। हॉरर फिल्में फ्लॉप भी होती हैं। जो सफल होती हैं, उनमें आप देखेंगे कि बॉक्स ऑफिस पर मसाला फिल्मों की तरह सौ करोड़ नहीं पीटती हैं। ऐसी अधिकतर फिल्में कुछ करोड़ में बनती हैं और लागत से थोड़ा ज्यादा कमा लेती हैं।

जहां तक हॉरर के दर्शकों की बात है, तो मैं कहूंगा कि वे बड़े वफादार होते हैं। वैसे हॉरर फिल्म बनाना उतना आसान नहीं है क्योंकि उसके साथ एक अच्छी लवस्टोरी चाहिए, अच्छे गाने चाहिए। तब बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कमाई होती है।

हॉरर में सेक्स का भी तड़का खूब लगता है?

यह सही बात है। होता यह है कि जब ए सेर्टिफिकेट ही मिलना है तो स्किन शो भी क्यों करा दिया जाए। अंग्रेजी फिल्मों में तो भूत आता ही तब है जब हीरोइन नहा रही होती है! फिर हीरोइन कम कपड़ों में भी यहां वहां भागती है। शुरू से इसी तरह बनता रहा है।

बिपाशा और मेरे बीच एक रिश्ता है

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बिपाशा बसु आपकी फिल्मों का अहम हिस्सा रही हैं। उनमें आप क्या खूबियां देखते हैं?

बिपाशा और मेरे बीच एक यकीन का रिश्ता है। वे मुझ पर भरोसा करती हैं। जब मैं उनसे कहता हूं कि बिपाशा ‘क्रीचर’ फिल्म बनानी है तो वह कहती हैं चलो करते हैं। वह स्क्रिप्ट नहीं मांगतीं, वह यह नहीं पूछती हैं कि मेरा लुक कैसा होगा या क्रीचर कैसा दिखेगा... पहले आप मुझे कुछ ट्रायल जैसा बना कर दिखाओ।

वह अच्छी दोस्त हैं। मानती हैं कि अगर हम चले हैं तो कहीं जरूर पहुंचेंगे। मुझे लगता है कि जैसे मेरे भीतर नए-नए प्रयोग करने की सनक है, वैसी ही कुछ बिपाशा में भी है। इसलिए हम इतना काम साथ कर सके।

बिपाशा को 14-15 साल हो रहे हैं फिल्म इंडस्ट्री में। उनकी कामयाबी को आप कैसे आंकते हैं?

मुझे लगता है कि इतने लंबे अर्से में बिपाशा शायद अकेली हीरोइने हैं जिन्होंने खानों (शाहरुख, आमिर, सलमान) के साथ लीडिंग लेडी के रूप में कोई फिल्म की। ऋतिक के साथ भी केवल एक फिल्म की, जिसमें वह उनके अपोजिट नहीं थी। सुपरसितारों के साथ काम किए बगैर इतना लंबा सफर करना और अपनी जगह बनाए रखना, मुझे लगता है कि यह अपने आप में बड़ी बात है।

कई हीरोइनें सिर्फ बड़ी फिल्में करके और बड़े स्टार्स के साथ काम करके अपनी जगह बनाए रहती हैं। ऐसा नहीं है कि उनमें टैलेंट नहीं है, लेकिन बिपाशा की यह विशेषता है कि वह सिर्फ काबिलीयत पर जमी हुई हैं। बिपाशा ने हमेशा वह फिल्में की हैं जो उन्हें पसंद आई हैं। उनकी फिल्मोग्राफी में वेरायटी भी है।
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