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'राष्ट्रपति के नाम से भी नहीं मिली मुझे फिल्में'

Tue, 21 Oct 2014 09:16 AM IST
Updated Tue, 21 Oct 2014 09:16 AM IST
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interview of Shreya Narayan

"डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के नाम ने मेरी कोई मदद नहीं की। आज मैं जो भी हूं, अपने दम पर हूं।"ये कहना है भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की भतीजी की पोती और फ़िल्म अभिनेत्री श्रेया नारायण का।

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फ़िल्म 'सुपर नानी' में श्रेया नारायण रेखा की बहू बनी हैं( श्रेया नारायण ने इससे पहले 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर' में महुआ का किरदार निभाया था। इसके अलावा वह कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल कर चुकी हैं।
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श्रेया अभिनय के साथ-साथ अख़बारों के लिए भी लिखती हैं और यही नहीं उन्होंने फ़िल्मों के लिए गाने भी लिखे हैं। फ़िल्म 'गुलाब गैंग' का 'शर्म लाज।।।' गाना श्रेया ने लिखा है।

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मां-बाप नहीं रहे हैं फैसले से खुश

interview of Shreya Narayan

श्रेया ने दिल्ली विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है और कॉलेज से ही उन्हें अभिनय का शौक़ जागा। लेकिन श्रेया के माता-पिता इससे ख़ुश नहीं हुए।

श्रेया बताती हैं, "जब मैंने अपने माता-पिता को अभिनय के शौक़ के बारे में बताया तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हें जो करना है करो, पर हमसे किसी चीज़ की उम्मीद मत करना।"

मुंबई में श्रेया की ज़िंदगी आम स्ट्रगलर जैसी ही थी। उनके मुताबिक़ मुंबई में आपका व्यक्तित्व कहीं खो जाता है।

वे बताती हैं, "जब आप मुंबई आते हैं तो बड़े ख़ुश होते हैं। लेकिन आपको अहसास हो जाता है कि आप बस उस भीड़ का हिस्सा हैं जो मुंबई आई ही है अभिनय करने। आप महज़ ऑडिशन के एक नंबर होते हैं।"

जिंदगी से जंग रही जारी

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रेया की मां कैंसर से पीड़ित थीं और उनका इस साल जुलाई में निधन हो गया। श्रेया ने बताया, "कलाकार भिन्न-भिन्न प्रकार के किरदार निभाते हैं तो आपको ऐसा तरीक़ा मिल जाता है, जिससे आप अपनी शख़्सियत को किसी फ़िल्मी किरदार में ढालकर उसे फ़िल्म ख़त्म होने के बाद छोड़ सकते हैं।"

वे आगे कहती हैं, "जब मैं अपनी मां से मिलने अस्पताल जाती थी तो मैं एक ज़िम्मेदार बेटी होती थी और जब मैं उन्हें छोड़कर शूटिंग पर जाती थी तो मैं बस वह किरदार बन जाती थी जिसे मैं निभा रही होती थी। ऐसा करने से आप अपनी भावनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण रख पाते हैं।"
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