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चुनाव है आपका, फैसला है आपकाः सारिका

Wed, 04 Dec 2013 02:33 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला,मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला,मुंबई Updated Wed, 04 Dec 2013 02:33 PM IST
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interview of sarika
आपने चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में कैरियर शुरू किया, परंतु बीते दो-एक दशक में चुनिंदा फिल्मों में ही दिखीं। साल दो साल में आपकी कोई फिल्म आती है। ऐसा क्यों?
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यह स्क्रप्ट्स पर निर्भर करता है। कई बार अच्छी स्क्रिप्ट्स भी होती हैं, परंतु फिल्मों के चुनाव का हर कलाकार का अपना नजरिया होता है। रोल ऐसा होना चाहिए कि स्क्रिप्ट पढ़ कर रोमांच हो, कुछ घबराहट भी हो। पहले जो रोल कर चुके हैं, वैसे ही रोल आते हैं तो उन्हें करने में मजा नहीं आता।
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‘क्लब 60’ जब ऑफर हुई तो इसमें क्या एक्साइटिंग और क्या चुनौतीपूर्ण लगा?
मेरे लिए सबसे खास बात यह थी कि मेरे अपोजिट फारुख शेख साब थे। अपने लंबे कैरियर में मैंने कभी उनके साथ काम नहीं किया था।

कभी-कभी आप इसलिए भी फिल्म चुनते हैं कि आपको अच्छे आर्टिस्ट के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी बहुत अच्छी थी।

इसमें पॉजिटिव थॉट यह है कि जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें आएं, हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। जीना नहीं छोड़ना चाहिए।

‘क्लब 60’ उन लोगों की कहानी है जो उम्र में 60 के पार जा चुके हैं...!
असल में टाइटल से ऐसा लगता है। लेकिन वास्तव में फिल्म में बताया गया है कि इस क्लब की स्थापना 1960 में हुई थी, इसलिए इसका यह नाम है। फिल्म में दो ट्रेक हैं।
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एक मेरी और फारुख साब की स्टोरी है, जिनकी एक हादसे के बाद डिप्रेशन में डूब गए हैं। वहीं दूसरा ट्रेक क्लब के मेंबर्स का है। यह ऐसे लोग हैं जिनकी जिंदगी में तमाम मुश्किलें हैं, लेकिन वे उन्हें पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इन दो ट्रेक्स के बीच रघुवीर यादव एक पुल का काम कर रहे हैं।

सबकी जिंदगी में कठिन पल आते हैं। आप निजी जिंदगी में ऐसे मौकों पर खुद को कैसे संभालती हैं?
मुझे लगता है कि हमें यह जान लेना चाहिए कि जिंदगी में अच्छा और बुरा दोनों होता है। यह हमें तय करना है कि किन पलों को हम जिंदगी में अपने साथ आगे ले जाना चाहते हैं।


यह हमारा फैसला होता है। मुझे लगता है कि हमारे आस-पास अच्छाई इतनी है कि हम उसे महसूस करें और देखें तो कठिन पल ज्यादा देर टिक ही नहीं सकते।

फिल्मों के तमाम कलाकार टीवी पर आ रहे हैं। आप किसी सीरियल या शो में कभी नहीं दिखीं!
अगर कुछ इंट्रेस्टिंग आएगा तो मैं जरूर करूंगी। मुझे अच्छी कला से मतलब है। फिर वह स्टेज हो, शॉर्ट फिल्म हो, टीवी हो। सच मानिए, मुझे टीवी पर आने में कोई ऐतराज नहीं है।

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