एक्टर को रावण जैसा होना चाहिएः सैफ अली खान

हरि मृदुल/अमर उजाला,मुंबई Updated Sun, 24 Nov 2013 07:52 AM IST
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बॉलीवुड में चर्चित खान तिकड़ी के बाद अगर किसी चौथे खान की तूती बोलती है, तो वे सैफ हैं। सैफ अली खान की फिल्मों पर नजर डालें, तो आसानी से पता चल जाता है कि वे कड़ी मेहनत से आगे बढ़े हैं।
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उन्होंने एक अभिनेता के तौर पर ऐसी भूमिकाओं को महत्व दिया है, जो उन्हें पर्याप्त चुनौती दे सकें। तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी फिल्म बुलैट राजा में सैफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक माफिया डॉन के किरदार में नजर आएंगे।
फिल्म बुलैट राजा में आपने एक ऐसा किरदार निभाया है, जिसके बारे में आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। माफिया डॉन राजा मिश्रा की भूमिका निभाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
इसमें कोई शक नहीं है कि राजा मिश्रा जैसे लोगों से मेरा कभी कोई संबंध नहीं रहा। वेस्टर्न यूपी के इस किरदार को निभाने के लिए मैं पूरी तरह तिग्मांशु धूलिया पर निर्भर रहा।

यह जरूर है कि राजा मिश्रा के किरदार ने मुझे एक बड़ी चुनौती दी। इस किरदार की भाषा के लिए तो मुझे संघर्ष करना ही पड़ा, बॉडी लैंग्वेज का भी पूरा ध्यान रखना पड़ा।

क्या यह कहना सही होगा कि बुलैट राजा आपकी अब तक की सबसे कठिन फिल्म है?

नहीं, मैं ऐसा नहीं मानता। कई बार साधारण से दिखने वाले रोल बहुत ज्यादा चुनौती देते हैं। हां, यह बात मैं जरूर कहूंगा कि इस फिल्म में मेरी एकदम अलग किस्म की भूमिका है।

पांच साल पहले इस किस्म का रोल अगर मुझे ऑफर होता, तो शायद मैं नहीं कर पाता।

हालांकि फिल्म ओमकारा में आप लंगड़ा त्यागी जैसी भूमिका तो आप कर ही चुके हैं?

लंगड़ा त्यागी नेगेटिव किरदार था, लेकिन राजा मिश्रा उर्फ बुलैट राजा हीरो है। वह मजबूरी में बाहुबली बना है। ओमकारा में बहुत सारे स्टार थे, लेकिन बुलैट राजा एक तरह से मेरे कंधों पर ही टिकी है।

बुलैट राजा में है क्या?

यह एक मजेदार फिल्म है। फुल एंटरटेनमेंट। तिग्मांशु ने हर सीन को आइटम बना कर पेश किया है। एक अच्छे आदमी को मजबूरी में बंदूक उठानी पड़ती है।

पुलिस, पॉलिटिक्स और बिजनेस मैन उसे जीने नहीं देते। इसमें यूपी के राजनीतिक और सामाजिक हालात काफी हद तक चित्रित किए गए हैं।

तिग्मांशु काफी प्रतिभावान निर्देशक हैं, लेकिन अभी भी उनके साथ बड़े स्टार काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। आपने तिग्मांशु में ऐसा क्या देखा कि आप उनके साथ काम करने के लिए तैयार हो गए?

मैंने तिग्मांशु के निर्देशन में बनी फिल्म पान सिंह तोमर देखी है। यह कमाल की फिल्म है। तिग्मांशु के साथ काम करने का निर्णय लेेने के लिए उनका एक यही काम काफी है।

क्या बुलैट राजा जैसी फिल्में कर आप अपनी अरबन हीरो वाली इमेज तोडऩा चाहते हैं?

इमेज तोडऩेवाली बात कतई नहीं है। मैं हर तरह की फिल्में करता आया हूं और आगे भी करूंगा। हां, यह जरूर है कि मैं एक ही तरह की फिल्मों से बचना चाहता हूं। इन दिनों भी मैं अगर बुलैट राजा कर रहा हूं, तो हमशक्ल जैसी विशुद्ध कॉमेडी फिल्म भी कर रहा हूं।

एक और फिल्म है हैप्पी एंडिंग, वह एकदम अलग तरह की फिल्म है। मेरा मानना है कि एक्टर को दस सिर वाले रावण की तरह होना चाहिए। वह हर किस्म की भूमिका के लिए तैयार रहे।

इन दिनों किसी फिल्म की सफलता को बॉक्स ऑफिस पर सौ करोड़ के बिजनेस से आंका जा रहा है। ऐसे में आप पर हंडे्रड करोड़ क्लब का कितना दबाव है?

सौ करोड़ के बिजनेस वाली फिल्म किसे बुरी लगेगी, लेकिन इस बारे में मेरा यह भी कहना है कि हर फिल्म से ऐसी उम्मीद नहीं होनी चाहिए। अगर मैं बुलैट राजा की बात करूं, तो यह उस किस्म की फिल्म नहीं है।

यह सफल हो जाए, इतना ही बहुत है। परंतु मुझे यकीन है कि यह अपनी प्रस्तुति में बेहतरीन फिल्म साबित होगी।

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