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अच्छा है हर कोई मुझे मिस कर रहा है: मल्लिका शेरावत
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2015 09:36 AM IST
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मल्लिका शेरावत फिल्मों में दिखें या न दिखें, आप उन्हें भूल नहीं सकते। आखिरी बार वह तीन साल पहले किस्मत लव पैसा दिल्ली जैसी फ्लॉप फिल्म में नजर आई थीं। उनकी डर्टी पॉलिटिक्स इस शुक्रवार रिलीज के लिए तैयार है। उम्मीद की जा रही है कि पूरे शबाब के साथ यह बोल्ड सुंदरी इस फिल्म में नजर आएगी। पेश्ा है फिल्म को लेकर मल्लिका से बातचीत के कुछ अंश्ा...
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इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर आप इतनी व्यस्त हैं कि बॉलीवुड के दर्शकों को आपका काफी इंतजार करना पड़ा!
अच्छा है न फैंस इंतजार कर रहे हैं। मैं खुश हूं कि मुझे चाहने वाले इसने लोग हैं। एक ऐक्टर को और क्या चाहिए।
मीडिया के गॉसिप कॉलमों में भी आपका नाम गायब है!
यह बहुत खुशी की बात है मेरे लिए। अच्छा है कि हर कोई मुझे मिस कर रहा है।
मगर यह लंबा ब्रेक क्यों रहा?
- ब्रेक इसलिए आया क्योंकि विदेश में मुझे काफी काम मिल रहा था। न केवल फिल्मों में बल्कि अमेरिका में मैंने सीरियलों में भी काम किया। वहां मुझे ऐसे रोल मिले जिनमें परफॉर्म करने के मौके थे। जबकि हमारे यहां मुझे जलेबी बाई टाइप के ग्लैमरस रोल ऑफर हो रहे थे। जब केसी जी (के.सी.बोकाड़िया) ने मुझे डर्टी पॉलिटिक्स ऑफर की तो मैंने पाया कि इसमें उत्तेजक दृश्य जरूर हैं मगर अपनी ऐक्टिंग की प्रतिभा दिखाने का मौका भी मिलेगा।
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यानी आपको शिकायत है कि बॉलीवुड आपकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सका?
-शिकायत नहीं है, मगर मेरी छवि इतनी ग्लैमरस बन गई कि जो गंभीर फिल्मकार हैं उन्हें मेरा नाम आने पर संदेह
होता है कि मैं उनके मन का रोल कर सकूंगी या नहीं। वैसे कई अभिनेताओं के साथ ऐसा होता है। हम दिल दे चुके सनम से पहले अजय देवगन की छवि सिर्फ ऐक्शन हीरो की थी। डर्टी पॉलिटिक्स के बाद मेकर्स देखेंगे कि मैं सीरियस रोल भी कर सकती हूं।
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अभी जो भी ट्रेलर आए हैं, उनमें तो ग्लैमर ही है!
-फिल्म में सिर्फ ग्लैमर ही नहीं है, परफॉरमेंस भी है।
डर्टी पॉलिटिक्स में आपको जो किरदार दिया गया, उसमें कौन सी बात सबसे खास लगी?
-मेरा किरदार इसमें अनोखी देवी का है। जो राजस्थान के भंवरी देवी हत्याकांड से प्रेरित है। यह बहुत ही देसी किस्म
का रोल है, जिसमें राजस्थानी टच है। वहां की बोली और मुहावरे हैं। इसमें जिस तरह के नाज-नखरे मैं करती दिखूंगी, वह बहुत नया है। पहले मुझे आपने वैसे नहीं देखा है। खास बात यह भी है कि इसमें मेरे अलावा सारे ऐक्टर एनएसडी से हैं।
-ओम पुरी के साथ आपके अंतरंग दृश्य चर्चा में हैं। कैसा था उनके साथ शूटिंग का अनुभव?
-वह बहुत सीनियर ऐक्टर हैं और यह सीन करते हुए मैं बहुत नर्वस थी। यह उस सीडी का सीन था जो अनोखी
देवी बनाती है। इसमें डीटेल्स जरूरी थे। पल्लू हट रहा है। ब्लाउज के बटन खुल रहे हैं। जबकि चारों तरफ बहुत सारे लोग हैं। ओम जी ने फिल्म आस्था में भी ऐसे सीन शूट किए थे। मैं बहुत असहज थी, मगर उन्हें मुझे बहुत सहज किया। खास बात यह थी कि हम जो शूट कर रहे थे, वह हकीकत की तरह दिखना चाहिए था। यह बहुत ही कठिन काम था।
डर्टी पॉलिटिक्स आखिर है क्या?
-वास्तव में यह एक महिला की महत्वाकांक्षाओं की कहानी है। राजनीति में लालच और ताकत की कहानी है। अनोखी देवी राजनीति में आगे बढ़ने के लिए अपने शरीर का इस्तेमाल करती है। ओमजी का जो राजनेता का किरदार है, वह भी शरीर का इस्तेमाल करता है,मगर अपनी लालसा की पूर्ति के लिए। समाज के दोहरे मापदंड फिल्म में दिखेंगे। औरत को लोग ऐसा काम करने पर गलत मानेंगे। मैं चाहती हूं कि तमाम बातों के बावजूद दर्शकों की संवेदना अनोखी देवी को मिले। यही मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
फिल्म तरक्की के लिए महिला द्वारा शरीर का इस्तेमाल करने की घटना दिखाती है। राजनीति, सिनेमा और कारपोरेट जगत की गला काट स्पर्द्धा के दौर में आज दबी जुबान में ऐसी बातें सामने आती हैं। व्यक्तिगत रूप से क्या सोचती हैं?
-इस सवाल का जवाब आसान नहीं है। क्या हालात हैं, क्या मजबूरियां हैं, जिंदगी में आगे बढ़ने का कितना और
कैसा जज्बा है... इन सब बातों से चीजें तय होती हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि कोई भी महिला अपने शोषण के लिए तैयार नहीं होती। यह मजबूरी का आखिरी रास्ता है। इसमें आत्मसम्मान नहीं रह जाता। परंतु मैं निर्णायक रूप से कुछ नहीं कह रही। हर व्यक्ति की जिंदगी का अपना सच होता है। हो सकता है कि हम जिस चीज को गलत समझते हैं, कोई उसे सही समझता है। वैसे हमारे पुराणों में भी महिलाएं अपना लक्ष्य पाने के लिए शरीर का इस्तेमाल करती रही हैं। मेनका ने विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए क्या किया था!
आप अक्सर समाज में महिलाओं को बराबरी के दर्जे की, उनके साथ दोयम दर्जे के व्यवहार और कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध बातें करती हैं। परंतु उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। क्या आपकी ग्लैमरस छवि के कारण ऐसा होता है?
-शायद। वैसे इसका जवाब तो आप मुझसे बेहतर जानते हैं। हो सकता है ऐसा हो। लेकिन हां, मैंने जब ऐसी बातें
की तो मुझ पर कई लोगों ने, मीडिया ने हमले किए। फिल्म इंडस्ट्री की हीरोइनों, प्रियंका चोपड़ा तक ने भी अटैक किया। इस देश में अगर आपकी छवि ग्लैमरस है तो लोगों के लिए आपकी ऐसी बातों को पचा पाना आसान नहीं होता। उन्हें लगता है कि आपको क्या पता है। मगर आप साड़ी में हैं, थोड़ी बहनजी टाइप हैं, कुछ मोटी हैं और इन
मुद्दों पर बात करेंगी तो लोग आपको गंभीरता से लेंगे। अभिनेताओं के साथ भी ऐसा होता है। विदेश में भी यही स्थिति है।