'पत्नियों की अदला-बदली से बोल्ड क्या होगा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपनी सेक्स सिंबल छवि को पीछे छोड़ चुकीं बिपाशा बसु को एक बड़ी हिट की दरकार है। 3डी फिल्म ‘क्रीचर’ पर उनकी उम्मीदें टिकी हैं। जिस बॉलीवुड में हीरोइन का कैरियर बहुत लंबा नहीं माना जाता वहां बिपाशा करीब 14 साल से मजबूती से जमी हैं। पेश है आज की बिपाशा से दिलचस्प बातचीत...
आप हॉरर फिल्मों की हीरोइन हो चली हैं। हाल के वर्षों में संभवतः आप ही सबसे ज्यादा हॉरर फिल्में करने वाली हीरोइन हैं?
आप ऐसा कह सकते हैं। लेकिन यह मेरा प्लान नहीं था। ऐक्टर के रूप में आप हर तरह के रोल करना चाहते हैं। वैसे मेरी फिल्मों की लिस्ट उठा कर देखें तो मैंने हर तरह की फिल्में की हैं। हां दूसरे ऐक्टरों से तुलना करेंगे तो यह सच है कि मैंने उनसे ज्यादा हॉरर फिल्में की। मुझे खुशी कि मेरे काम करने के बाद हॉरर फिल्मों की स्थिति बदली हैं, पहले लोग उन्हें स्तरहीन माना करते थे लेकिन अब वह अव्वल ‘ए’ श्रेणी में खड़ी हैं।
‘क्रीचर’ में आपका किरदार क्या है?
यह हॉरर कम और एडवेंचर फिल्म ज्यादा है। जिसमें इमोशंस का ड्रामा है। रोमांच है। इसमें एक के बाद एक ऐसे दृश्य हैं जिन्हें देख कर लगता है कि पता नहीं आगे क्या होगा? यह कहानी आहना की है, जो आत्मनिर्भर है। अकेली है। वह एक छोटे-से जंगल में एक लॉज खोलती है और बैंक लोन लेकर अपनी जिंदगी की सारी कमाई उसमें लगा देती है। तभी वहां पर अजीबोगरीब चीजें होने लगती हैं। लोग कहते हैं कि यह जगह ठीक नहीं है, उसे हट जाना चाहिए लेकिन वह अपनी जिंदगी दांव पर लगा देती है।
मैने भूत भी देखा है
क्रीचर तो डायरेक्टर ने तकनीक से बनाया है। ऐसे में क्रीचर के साथ वाले दृश्यों में आपको अकेले ऐक्टिंग करनी पड़ी। इसे कैसे मैनेज किया?
यह मुश्किल था क्योंकि ऐक्टिंग एक किस्म का सामने वाले किरदार के एक्शन के प्रति दिया गया रिएक्शन है। यहां मेरे सामने कुछ नहीं था, लेकिन निर्देशक विक्रम भट्ट ने कुछ संदर्भ तैयार किए थे। कुछ स्कैच, क्रीचर का कद, उसकी ताकत, क्रीचर की विशेषताएं... मैं उन्हें ध्यान में रखती थी। मैं उसकी कल्पना करती थी। यह बहुत रोचक था। एक ऐक्टर के रूप में मेरे लिए नया अनुभव था क्योंकि मुझे पता नहीं था कि यह कैसे दिखेगा।
आपने कई आत्मा-भूत-प्रेत वाली फिल्में की हैं। क्या कभी सचमुच महसूस किया या देखा है?
बहुत साफ-साफ तो नहीं लेकिन सिर्फ एक बार कुछ महसूस जरूर किया था। मैं तब नई थी और फिल्म ‘फुटपाथ’ की मुंबई के मुकेश मिल्स में शूटिंग कर रही थी। यह मुंबई की सबसे भुतहा जगहों में से मानी जाती है। हम लोग ऊपर के फ्लोर पर शूटिंग कर रहे थे और मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्यों अचानक बार-बार डायलॉग भूल रही हूं। वहां सहज भी नहीं लग रहा था। बड़ा अजीब लग रहा था। तब विक्रम भट्ट ने शूटिंग कैंसल कर दी थी। बाद में मुझे पता चला था कि उसी जगह पर करीब एक-दो महीने पहले कोरियोग्राफर सरोज खान की किसी डांसर पर प्रेतात्मा का असर हो गया था। उसके बाद मैं कभी मुकेश मिल्क नहीं गई। ऊटी में भी मैंने इस तरह की कई बातें सुनीं। ये बातें हमारे दिमाग में बैठ जाती हैं तो डर लगता है।
राज और जिस्म वाला समय है याद
राज और जिस्म जैसी फिल्मों के अर्सा हो चुका है, लेकिन अब भी आपको लोग सेक्स सिंबल के रूप में देखते हैं। क्या आप इससे खुश हैं?
लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं इस पर मेरा कोई जोर नहीं। जो उन्हें पसंद है, वे सोचते हैं। मुझे अपने आप पर बहुत गर्व है। मैंने ‘जिस्म 3’ उस तरह की आखिरी फिल्म की थी, जिसमें कैरियर के उतार पर खड़ी एक हीरोइन का नेगेटिव रोल था और लोगों ने इसे बहुत पसंद किया। यह बहुत डार्क कैरेक्टर था। कई लोगों ने मुझसे कहा था कि यह रोल नहीं करना चाहिए। यह मेरा सबसे बड़ा चैलेंज था।
एक हीरोइन के रूप में कैरियर के उतार की बात क्या वाकई डराती है?
यह बहुत ही क्षणभंगुर इंडस्ट्री है। यहां कभी भी आपका कैरियर नीचे आ सकता है। कई लोग साल भर तक नहीं टिकते। कोई दो साल, कोई चार साल रह पाता है। मैं यहां 14 साल से हूं और मुझे लगता है कि यह बड़ी बात है। जबकि मेरे पास कोई सपोर्ट नहीं था, मेरा कोई प्लान नहीं था। मैं जो मर्जी आए करती रहती हूं। मैं कैरियर का श्रेय शुभचिंतकों और प्रशंसकों को देती हूं क्योंकि इनके बगैर मेरा कुछ होता ही नहीं। यहां पर टिके रहना बहुत मुश्किल है। सबको मनाए रहना होता है। लेकिन मैंने जो किया अपनी शर्तों पर किया। इस लिहाज मैं बहुत किस्मवाली हूं।
निगेटिव चरित्र से हुई शुरुआत
नहीं। मैं साल 2000 में ऐसे समय में यहां आई थी जब चीजें बदल रही थीं। फिर मेरी पहली ही फिल्म (अजनबी) में मेरा कैरेक्टर नेगेटिव था, जहां वाइफ स्वैपिंग (पत्नियों की अदला-बदली) हो रही थी। फिर राज और जिस्म जैसी फिल्म आई, जिन्हें बड़ा ही गैर-पारंपरिक माना गया। इसलिए मुझे दर्शकों और इंडस्ट्री ने स्वीकार किया। उस समय कोई और हीरोइन ऐसे रोल नहीं कर रही थी। एक मॉडर्न महिला की छवि बदल रही थी। वह मेरे किरदारों मे देखी गई। दर्शक अच्छी फिल्में देखना चाहते हैं। उन्हें बॉलीवुड की खेमेबाजी से मतलब नहीं।
कई लोग इसी मॉडर्न छवि को महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों का कारण मानते हैं। मॉडर्न कपड़े, फैशन, बोल्ड सोच...!
मुझे इस पर गुस्सा आता है। ऐसे लोगों की नजर खराब है। मुझे लगता है कि हमारे बच्चों की परवरिश में कहीं गड़बड़ी है। अगर घरों में लड़के शुरू से महिलाओं का सम्मान होते देखेंगे तो उनकी सोच अलग होगी। इसके बावजूद मैं मानती हूं कि शैतान हमेशा रहेंगे। आज तो बच्चे तक यौन अपराधों का शिकार हैं। कपड़े और फैशन बहाना हैं। लोग सिनेमा को भी जिम्मेदार बताते हैं, लेकिन फिल्में सिर्फ समाज का प्रतिबिंब हैं।
मुझे हर तरह के रोल मिले
क्या फैन्स कभी आप तक अपनी इच्छा पहुंचाते हैं कि वे किस रोल में देखना चाहते हैं?
हां बिल्कुल। वे पूछते हैं कि आप ग्लैमरस रोल में फिर कब दिखेंगी। कब आइटम डांस करेंगी। वगैरह वगैरह। लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं है क्योंकि ऐक्टर के तौर पर दर्शकों की खुशी के साथ आपको अपनी इच्छा भी देखना होती है। फिर आपके पास वैसे रोल भी आना चाहिए।
आपने कॉमेडी फिल्में भी कीं और लोगों ने उन्हें पसंद किया। खुद को कैसा कॉमेडी ऐक्टर मानती हैं?
मैं बहुत ही ‘फनी गर्ल’ हूं। लोगों की नजर में मेरी इमेज दूसरे ढंग की है। मैंने कई कॉमेडी फिल्में की हैं, मगर मैं ‘ब्रिगेट जोंस डायरी’ जैसी फिल्म करना चाहूंगी, जिसमें लोग मुझे देख सकेंगे कि मैं वाकई कैसी हूं।
सितारे फिल्में प्रोड्यूस कर रहे हैं, क्रिकेट-कबड्डी-फुटबॉल लीगों में टीमें खरीद रहे हैं। आप फिल्मों के अलावा क्या करना चाहती हैं?
मैं फिल्म प्रोडक्शन नहीं करूंगी। यह बहुत झमेले वाला काम है। मैं शांतिप्रिय इंसान हूं। हां, मैं हेल्थ-फिटनेस, पर्सनल ट्रेनिंग की दिशा में कुछ करना चाहती हूं। मैंने अपने डीवीडी भी रिलीज किए। अपने ब्रांड ‘लव योरसेल्फ’ को आगे बढ़ाने की मेरा योजना है। मैं हर वक्त फिल्में तो नहीं कर सकती। जिंदगी में आपको सब कुछ संतुलित रखना पड़ता है।