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मुझे पुलिस वालों की भाषा अच्छी लगती हैः जिम्मी शेरगिल

Thu, 03 Jan 2013 01:00 PM IST
रोहित मिश्र
रोहित मिश्र Updated Thu, 03 Jan 2013 01:00 PM IST
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I like the the language of cops- Jimmy Shergill

पिछली कई फिल्मों में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने वाले जिम्मी शेरगिल अपनी आने वाली फिल्म 'राजधानी एक्सप्रेस' में एक बार फिर पुलिस की भूमिका में हैं। इसी साल उनकी तीन और फिल्में 'साहब बीवी और गैंगस्टर', 'स्पेशल छब्बीस' और 'बुलेट राजा' रिलीज होनी हैं। इन फिल्मों में उनका किरदार अलग किस्म का होगा।

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जिम्मी शेरगिल का कहना है कि उन्हें पुलिस वाले किरदार इसलिए अच्छे लगते हैं क्योंकि उन किरदारों के लिए संवाद बहुत ही अच्छे होते हैं। पर्दे पर अच्छे संवाद बोलना भला किसे अच्छा नहीं लगता। कह सकते हैं कि मुझे पुलिस वालों की भाषा अच्छी लगती है। शुक्रवार को रिलीज हो रही फिल्म 'राजधानी एक्सप्रेस' का प्रमोशन करने दिल्ली आए जिम्मी शेरगिल ने अमर उजाला से लंबी बात की।
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'राजधानी एक्सप्रेस' के साथ क्यों जुड़े?
'राजधानी एक्सप्रेस' देखते वक्त दर्शकों को लगेगा कि वह पर्दे पर अपनी कहानी देख रहे हैं। समाज और सिस्टम की। मैं इस फिल्म में देश के सिस्टम को रिप्रजेंट कर रहा हूं। मुझे फिल्म का उदेश्य अच्छा लगा और साथ-साथ फिल्म में मेरी भूमिका भी। इसलिए मैने 'राजधानी एक्सप्रेस' की।
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आपने कई फिल्में तिंग्माशु धूलिया के साथ की है, कोई खास वजह?
मैने तिंग्माशु के साथ पहली फिल्म 'हासिल' की थी। मुझे इस फिल्म में काम करके बहुत अच्छा लगा। खासकर तिंग्माशु जिस तरह से अपने किरदारों को गढ़ते हैं उसकी स्टाईल से। फिर हमने 'चरस' फिल्म की। यह फिल्म नहीं चली पर मुझे तिंग्माशु पर और तिंग्माशु को मुझे पूरा भरोसा हो गया। बाद में जब तिंग्माशु ने किसी फिल्म के लिए एप्रोच किया तो मैने मना नहीं किया। 'साहब बीवी और गैंगस्टर' में उन्होंने मेरे लिए जो भूमिका रची थी वह वाकई कमाल की थी। इसके बाद मैं फिर उनके साथ 'साहब बीवी और गैंगस्टर पार्ट 2' और 'बुलेट राजा' फिल्में कर रहा हूं। तिंग्माशु के साथ फिल्म करते वक्त मुझे लगता है कि मुझसे सबसे बेहतर काम तिंग्माशु ले सकते हैं।

'मोहब्बतें' में रोमांटिक भूमिका करने के बाद आज दस साल बाद बिल्कुल उसका उलट सिनेमा कर रहे हैं आप?
मैने 'मोहब्बतें' से पहले 'माचिस' की थी। यह फिल्म मोहब्बतें से बिल्कुल अलग थी। 'मोहब्बतें' के बाद मैने 'यह जिंदगी का सफर', 'मेरे याद की शादी है', 'दिल है तुम्हारा', 'दिल विल प्यार व्यार', 'कहता है दिल बार बार' जैसे रोमांटिक फिल्में कीं। यह फिल्में बहुत सफल नहीं हुईं और मुझे भी एक एक्टर के रूप में संतुष्टी नहीं मिली। 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' में जहीर की भूमिका को मेरे लिए बदलाव वाली फिल्म कह सकते हैं। मुख्य धारा की फिल्में करने वाला कोई भी कलाकार उस छोटे से गेस्ट रोल को करने से मना कर देता। पर मैने किया। इसके बाद मैने 'यहां' और 'उमर' जैसी फिल्में कीं। यह फिल्में चली तो बहुत नहीं पर मुझे लगा कि यह सिनेमा मेरे ज्यादा करीब है। और फिर मैँ ऐसी फिल्में करता गया।

टर्निंग प्वाइंट कहां से मानते हैं?
'ए वेडनेस डे' और 'माय नेम इज खान' की छोटी-छोटी भूमिकाओं ने मेरे अंदर एक अलग किस्म के किरदार को पैदा किया। 'तनु वेड्स मनू' की भूमिका मेरे लिए बहुत जबर्दस्त रही। फिल्म का किरदार हल्का ग्रे शेड का था पर वह हीरो पर भारी पड़ रहा था। फिल्म में जो संवाद मेरे हिस्से आए थे उन्होंने मेरा चरित्र गढ़ने का काम किया। मैं मानता हूं कि 'साहब बीवी और गैंगस्टर' और 'बुलेट राजा' जैसी फिल्में उसी किरदार की वजह से मिलीं। पर्दे पर एक सॉलिड मैन की इमेज इन्हीं फिल्मों से होकर आई।

आप लगातार पुलिस की भूमिका में भी दिखे?
मैने पुलिस के रोल किए हैं पर वह 'दबंग' या 'सिंघम' जैसी फिल्मों वाले रोल नहीं रहे हैं। एक रियलास्टिक पुलिस अधिकारी की भूमिका में मैं ज्यादा दिखा हूं। फिर चाहे वह 'ए वेडनेस डे' हो या फिर आने वाली फिल्म 'स्पेशल छब्बीस'। फिल्म निर्देशकों को लगता है कि मै वह किरदार कर लेता हूं इसलिए पुलिस की भूमिकाएं मुझे ऑफर हो रही हैं। दूसरी बात यह रही है कि फिल्म में पुलिस वालों के संवाद अच्छे लिखे जाते हैं। इन संवादों को बोलते वक्त मैं खुद में एक वजन महसूस करता हूं। मुझे लगता है कि यह किरदार मेरे चरित्र को गहरा बना रहे हैं। शायद यही वजह है कि मैं ऐसी भूमिकाओं में बार-बार दिख रहा हूं।

'राजधानी एक्सप्रेस' लिएंडर की पहली फिल्म है, काम करने का अनुभव कैसा रहा?
'राजधानी एक्सप्रेस' फिल्म में एक साथ कई कहानियां चला करती हैं। फिल्म में मेरे और लिएंडर के एकसाथ सीन न के बराबर हैं। हमने बहुत कम सीन शेयर किए हैं। हां शूटिंग पर हम जरूर मिलते। पहली फिल्म होने के बावजूद लिएंडर का काम वाकई लाजवाब है। पेस में सीखने की एक बड़ी प्रवृति है। जहां उसे लगता कि उसे किसी की सलाह की जरूरत है वह बेहिचक हमसे सलाह लेता।


आगे कैसी फिल्में करना चाहते हैं?
मैं अभी हिंदी में जैसी फिल्में कर रहा हूं वैसी ही भविष्य में भी करना चाहूंगा। मुझे खुद को चाकलेटी हीरो कहलाना पसंद नहीं है। 2013 में जो फिल्में रिलीज हो रही वह लगभग ऐसी ही हैं। भविष्य में जैसी भूमिका मुझे ऑफर होगी वैसा सोचूंगा। हिंदी फिल्मों के अलावा मैं पंजाबी फिल्मों में भी सक्रिय रहता हूं। वह फिल्में हिंदी में की जा रही मेरी फिल्मों से बिल्कुल अलग होती हैं। वहां मैं रोमांस करता हूं, फाइट करता हूं, कॉमेडी और ड्रामा भी करता हूं। यह फुल इंटरनेटर फिल्में होती हैं। पंजाबी में मैं ऐसी ही फिल्में करना चाहूंगा जो ज्यादा से ज्यादा लोगों का मनोरंजन करें।

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