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मैं फूहड़ फिल्में नहीं बनाताः राजकुमार संतोषी

Wed, 18 Sep 2013 09:41 AM IST
हरि मृदुल/अमर उजाला, मुंबई
हरि मृदुल/अमर उजाला, मुंबई Updated Wed, 18 Sep 2013 09:41 AM IST
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i don't believe in hundred club

जाने माने निर्देशक राजकुमार संतोषी 'फटा पोस्टर निकला हीरो' फिल्म से एक बार फिर दर्शकों को गुदगुदाने की तैयारी में हैं। शाहिद कपूर और इलियाना डिक्रूज की लीड रोल वाली इस फिल्म में रुटीन किस्म की कॉमेडी नहीं है। राजकुमार संतोषी ने अमर उजाला के साथ लंबी बातचीत की।

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आपको हल्की फुल्की कॉमेडी वाली फिल्मों का निर्देशन ज्यादा भा रहा है। क्या वजह है कि अब आप घायल, दामिनी या लज्जा जैसी फिल्में नहीं बना रहे हैं?

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जिस तरह की स्क्रिप्ट मुझे जंचती है, मैं उसी पर काम शुरू कर देता हूं। मुझे एक्शन फिल्में भी प्रिय हैं और इश्यू बेस्ड फिल्में भी। संभव है कि 'फटा पोस्टर निकला हीरो' के बाद मैं एक्शन फिल्म बनाऊं।

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'फटा पोस्टर निकला हीरो' की कॉमेडी में ऐसा क्या है कि जो दूसरी फिल्मों से उसे अलग करता है?

मेरी फिल्मों की कॉमेडी तमाम स्थितियों से उपजती है। विसंगतियां मेरी कॉमेडी का आधार होती हैं। मेरे किरदार कई बार खुद पर हंसते हैं और दूसरों को हंसाते हैं। मुझे फूहड़ कॉमेडी में जरा भी विश्वास नहीं है।

आपने शाहिद कपूर और इलियाना से कॉमेडी करवाने की कैसे सोच ली। न तो शाहिद ने इससे पहले किसी फिल्म में ऐसी कॉमेडी की है और न ही इलियाना ने?


मैं किसी एक्टर को कोई रोल देता हूं, तो ऐसा कतई नहीं सोचता हूं कि उसने पहले इस तरह का काम किया है कि नहीं। मैंने रणबीर कपूर को फिल्म 'सांवरिया' से एकदम अपोजिट भूमिका अजब प्रेम की गजब कहानी में सौंपी। अमिताभ बच्चन को फिल्म 'खाकी' में पुलिस ऑफिसर का किरदार दिया, तो फैमिली जैसी फिल्म में गैंगस्टर बना दिया।



शाहिद और इलियाना अपनी भूमिकाओं में कितने खरे उतरे हैं?

मेरा दावा है कि इस फिल्म के बाद शाहिद कपूर को लोग कमाल का एक्टर कहना शुरू कर देंगे। इलियाना ने भी बरफी से एकदम अलग बेहतरीन भूमिका निभाई है।

वे कौन सी बातें हैं, जो एक अच्छी कॉमेडी फिल्म के लिए जरूरी होती हैं?

किसी भी कॉमेडी फिल्म के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि उसमें काम करने वाले एक्टरों में हास्य बोध हो। कोई भी अदाकार तब तक दर्शकों को नहीं हंसा सकता है, जब तक कि उसे खुद पर हंसना न आ जाए।

'अंदाज अपना अपना' आज एक कल्ट फिल्म बन चुकी है। इसके सीक्वल की बड़ी चर्चा है?

पता नहीं कहां से इस फिल्म के सीक्वल की खबर फैल गई है। सच तो यह है कि मेरे पास ऐसी कोई स्क्रिप्ट नहीं है, जिसके आधार पर मैं सीक्वल बना सकूं।

हंड्रेड करोड़ क्लब के बारे में आपके क्या विचार हैं?

सबसे पहले तो मैं एक अच्छी फिल्म बनाना चाहता हूं। हां, उसकी बॉक्स ऑफिस पर सफलता भी जरूरी है। लेकिन वह सौ करोड़ की कमाई अवश्य करे, मेरा ऐसा कोई आग्रह नहीं रहता। हंड्रेड करोड़ क्लब में पहुंची कई फिल्में ऐसी हैं, जिन्हें बाद में कोई याद नहीं रखेगा।

आप इश्यू बेस्ड फिल्म भी बनाना चाहते हैं। क्या यह वही फिल्म है, जो असगर वजाहत के एक प्रसिद्ध नाटक पर आधारित होगी?

जी हां, मैं असगर वजाहत के चर्चित नाटक जिस लाहौर नहिं वेख्या वो जन्म्याई नहीं पर एक फिल्म बनाने जा रहा हूं। इसमें हिंदू और मुस्लिम समस्या को सामने रखा जाएगा। मैं रामायण नाम की फिल्म भी बनाना चाहता हूं, लेकिन कुछ साल बाद ही इस प्रोजेक्ट को हाथ में लूंगा।

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