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बेटी की नाक की सर्जरी के दो महीने बाद जेल से निकले संजय दत्त

Wed, 02 Sep 2015 05:03 PM IST
Updated Wed, 02 Sep 2015 05:03 PM IST
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How Sanjay Dutt granted parole, when his reason becomes invalid?'

अभिनेता संजय दत्त को 30 दिनों की पेरोल देने मामले में जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मामला इतना गंभीर है कि कानूनी मामलों के जानकारों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों पर दिमाग न प्रयोग करने के आरोप लगाए हैं।

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दि टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पिछले सप्ताह अभिनेता संजय दत्त को उनकी जिस बेटी की नाक सर्जरी के लिए महीने भर की पेरोल दी गई, उसकी सर्जरी दो महीने पहले ही हो चुकी है।
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संजय दत्त ने बेटी की सर्जरी के लिए 26 मार्च को पेरोल की अर्जी थी, जिसमें बेटी की सर्जरी अप्रैल में होने की बात कही थी। लेकिन यरावदा जेल प्रशासन ने उन्हें 26 अगस्त को पेरोल दी।
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यरावदा जेल के कई पेरोल मामलों में जुड़ी रहीं वकील फरहाना शाह बताती हैं जेल के मैनुअल में पेरोल अर्जी पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने की बात लिखी है। लेकिन संजय के मामले में इन सब बातों को ताक पर रख दिया गया।

किसने दी पेरोल, किस बेटी की थी सर्जरी

How Sanjay Dutt granted parole, when his reason becomes invalid?'
बीते 26 अगस्त को पांच साल की सजा के भीतर संजय दत्त को चौथी बार पेरोल मिली। 1993 के मुंबई धमाकों दोषी संजय ये पेरोल उनकी बेटी इकरा दत्त की नाक की सर्जरी के लिए दिए गई थी। संजय दत्त की ये बेटी जन्म से ही काफी बीमार रहती हैं।




जेल प्रशासन की अर्जी पर लेटलतीफी के चलते संजय की बेटी की सर्जरी उनकी गैरमौजूदगी में ही हो गई। यरावदा जेल में पेरोल देने की प्रक्रिया ये हैं कि कैदी वकील के माध्यम से अपनी अर्जी जेल सुपरिंटेंडेंट को भिजवाते हैं। वह इसे डिविजनल कमिश्नर को बढ़ा देते हैं।

वहां से अर्जी पास कर दी जाती है, और कैदी को पेरोल दे दी जाती है। संजय दत्त की अर्जी मार्च में दी गई थी और उसमें बेटी की सर्जरी अप्रैल में होना बताया गया था। लेकिन पुणे के डिविजन कमिश्नर एस चोकलिंगम ने इसे पांच महीने बाद 26 अगस्त को पास की।

यही नहीं पांच साल की सजा के बीच इतनी बार पेरोल नहीं देने का प्रावधान भी नहीं हैं। यह जानने के बाद कि कौन-कौन से नियम हैं जिनके तहत किसी सजायाफ्ता कैदी को पेरोल मिल सकती है आपको संजय दत्त के पेरोल का पूरा अंदाजा लग जाएगा कि आखिर कैसे हर बार कैसे उन्हें पेरोल मिल जाती है? आइए आपको बताते हैं...

क्या है पेरोल देने के ‌नियम

How Sanjay Dutt granted parole, when his reason becomes invalid?'

महाराष्ट्र के नियमों के मुताबिक पांच साल तक की सजा पर किसी भी आरोपी को बस एक बार पेरोल ग्रांट करने का नियम है। जबकि उत्तर प्रदेश के धर्मवीर बनाम राज्‍य के केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि किसी भी कैदी को एक वर्ष में सिर्फ दो हफ्तों के लिए ही पेरोल पर रिहा किया जा सकता है। इसके अलावा हर जेल के मैन्‍युल में पेरोल ग्रांट करने से जुड़ी कुछ खास परिस्थितियों का भी जिक्र होता है।

लेकिन संजय दत्त की पेरोल इन सभी नियमों के खिलाफ है। इसके पीछे संजय दत्त के प्रभावशाली व्यक्तित्व को माना जाता है। नियमानुसार पेरोल लगातार जेल में रहने से की वजह से उन्‍हें बुरे प्रभाव से बचाने के लिए, कैदियों को पारिवारिक जीवन के करीब रखने, परिवार से जुड़े मुद्दों में उनकी संलिप्‍तता के लिए, कैदियों में आत्‍मविश्‍वास की बढ़ोतरी, जिंदगी में उनका उत्‍साह बरकरार रखने के लिए दी जाती है।

इसके अलावा कैदी बहुत ही बुरी तरह से बीमार है और उसे इलाज के लिए जेल से बाहर लाने की जरूरत हो, अगर कैदी का मानसिक संतुलन खो चुका हो और उसे इलाज के लिए मानसिक अस्‍पताल ले जाने की जरूरत हो, या फिर अपने परिवार के किसी सदस्‍य के मरने पर उसके अंतिम संस्‍कार के लिए बाहर आ सकता है।

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