कभी मरा ही नहीं था 'शोले फिल्म का गब्बर सिंह'
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आज भी फिल्म शोले का यह डॉयलाग उतना ही मशहूर है जितना कि गब्बर सिंह। सिल्वर स्क्रीन पर इस किरदार को निभाने वाले अमजद खान का आज जन्मदिन है। उनके जीवंत अभिनय ने खलनायकी में गब्बर सिंह को एक जिन्दा शाहकार बना दिया जो फिर कभी नहीं दोहराया गया। इस रोल की अदायगी ही थी कि आज भी अमजद खान को गब्बर सिंह के नाम से ज्यादा याद किया जाता है।
अमजद खान का जन्म 12 नवंबर, 1940 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता जयंत भी फिल्मों में अधिकतर खलनायक का रोल ही निभाते थे। 1957 में बनी फिल्म 'अब दिल्ली दूर नहीं' में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में पदार्पण किया। लेकिन अमजद खान ने अपने कॅरियर की शुरूआत स्टेज एक्टर के रूप में की।
बतौर अभिनेता उन्होंने 1973 में रिलीज हुई फिल्म 'हिंदुस्तान की कसम' की। इसके बाद 1975 में आई फिल्म 'शोले' ने अमजद खान को हिन्दी फिल्मों का 'गब्बर सिंह' बना दिया। फिल्म के संवादों में 'गब्बर सिंह' ने ऐसी जान फूंकी की आज भी इसके संवाद दर्शकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
'याराना' में अमजद खान अमिताभ के दोस्त बने
'शोले' के बाद यह गब्बर सिंह का ही कमाल था कि अमजद खान ने अधिकतर फिल्मों में निगेटिव रोल किए। निगेटिव रोल के अलावा अमजद खान ने कुछ फिल्मों में सह अभिनेता की भूमिका भी निभाई।
फिल्म 'याराना' में अमजद खान अमिताभ के दोस्त बने थे तो फिल्म 'लावारिस' में उनके पिता और इसी तरह फिल्म 'कुर्बानी' में हास्य भूमिका निभाते नजर आये। कमर्शियल फिल्मों के अलावा अमजद खान ने कुछ आर्ट फिल्में भी की। जिनमें 1984 में बनी फिल्म 'उत्सव' शामिल है।
साल 1986 में अमजद खान का मुंबई-गोवा रोड पर एक्सिडेंट हो गया था। इस एक्सिडेंट के बाद अमजद खान का वजन बेहिसाब बढ़ गया। वहीं वह दिन भर में पच्चीस-तीस कप चाय पी जाते थे।
इन दोनों कारणों से 1992 में दिल का दौरा पड़ने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई। अमजद खान की कई फिल्में उनकी मौत के बाद रिलीज हुईं।
पर्दे पर ही नहीं अपने कॉलेज में भी दबंग थे 'गब्बर'
70 एमएम के पर्दे पर ही नहीं अमजद खान यानी गब्बर सिंह अपने कॉलेज के दिनों में भी अपने दबंगई के लिए जाने जाते थे।
शोले के गब्बर सिंह का रसूख ही था कि उन्हे अपने कॉलेज में 'दादा' के नाम से पुकारा जाता था। अपने कॉलेज के दिनों में उन्होंने छात्र राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
बांद्रा के सेंट टेरेसा स्कूल सेंट टेरेसा हाईस्कूल से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आर. डी. नेशनल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दिनों में वह छात्र संघ के जनरल सेक्रेटरी भी चुने गए।
कॉलेज में अपनी दंबग छवि के कारण वे 'दादा' के नाम से मशहूर रहे। शोले के बाद उनके द्वारा निभाई गयी खलनायक की भूमिकाएं बेहद पसंद की गईं।