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फ्लैशबैकः फूल और पत्थर ने खोल दी थी धर्मेंद्र की तकदीर

Mon, 21 Sep 2015 06:52 PM IST
Updated Mon, 21 Sep 2015 06:52 PM IST
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Fool aur Patthar lucky for Dharmendra

1966 मे एक फिल्म बनी थी फूल और पत्थर। निर्माता-निर्देशक ओपी रल्हन की इस फिल्म मे लीड रोल मे थे धर्मेद्र और मीना कुमारी। साथ मे थे मदनपुरी, ललिता पवार, मनमोहन कृष्ण, लीला चिटनीस और सप्रू। यह आज यादगार फिल्म मानी जाती है, जबकि एक समय ऐसा आया था जब वितरको ने इसे खरीदने से मना कर दिया था। दरअसल, ओ.पी. रल्हन को 1958-59 मे अखबार मे छपी एक खबर ने इतना मथ दिया कि वह उस पर फिल्म बनाने का प्रण कर बैठे।

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खबर थी कि एक ठाकुर घराने की बहू एक दलित के साथ भाग गई और वह उसी के साथ रहने लगी। ठाकुर परिवार की इज्जत की खातिर कोर्ट मे चला गया लेकिन कोर्ट में बहू ने साफतौर पर कहा कि दलित नौजवान ही उसका पति है, इसलिए कि जिसके साथ उसने सात फेरे लगाए उसने उसका कभी ख्याल नही रखा। यह भी कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को संरक्षण नहीं दे सके, वह उसका पति कहलाने योग्य कैसे हो सकता है?
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इस घटना को लेकर ओ.पी. रल्हन लेखक ध्रुव चटर्जी के पास गए और स्क्रिप्ट लिखने के लिए कहा, लेकिन चटर्जी ने मना कर दिया। तब रल्हन ने खुद स्क्रिप्ट लिखने का फैसला किया और संवाद हसन रिजवी से लिखवाए। रल्हन ने कहानी में दलित की जगह चोर को किरदार बनाया ताकि विवाद पैदा न हो। उस दौरान जिन लोगों ने भी यह कहानी सुनी, उन्हे पसंद नहीं आई। निर्माताओ ने फिल्म बनाने से मना कर दिया। रल्हन ने इस बात पर ध्यान देते हुए कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए रीटा नाम की लड़की को कहानी मे डाला, जो चोर से प्यार करती है। वह रोल शशिकला ने किया।

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जब मीना कुमारी ने काम करने की स्वीकृति दी तो...

Fool aur Patthar lucky for Dharmendra

रल्हन ने फिल्म की हीरोइन के लिए मीना कुमारी को अप्रोच किया। कहानी सुनने के बाद जब मीना कुमारी ने काम करने की स्वीकृति दी तो रल्हन की खुशी का ठिकाना नही रहा। वह मीना के अपोजिट जुबली स्टार राजेद्र कुमार को लेना चाहते थे। उनको भरोसा था कि राजेद्र कुमार तैयार हो जाएंगे, लेकिन उधर से उत्तर नकारात्मक रहा। तब रल्हन ने कसम खाई कि किसी नए कलाकार को लेकर फिल्म बनाएंगे और हिट कराकर दिखाएंगे।

तब उन्होंने धर्मेंद्र को मौका दिया लेकिन कमाल अमरोही ने धर्मेंद्र को लेकर आपत्ति की और कहा कि मीना कुमारी की जोड़ी के लायक यह लड़का नहीं है। रल्हन ने बड़े विश्वास के साथ अमरोही के सामने भविष्यवाणी की, जिसे आप लड़का कह रहे है, वह आने वाले समय का दिलीप कुमार है। इस फिल्म का मुहूर्त बूट पालिश करने वाले एक लड़के से कराया गया। क्‍लैप महबूब खान ने दिया। यही वह फिल्म थी, जिसने धर्मेंद्र की तकदीर बदलकर रख दी। इसी फिल्म से वह व्यस्त कलाकार बन गए।

शर्ट उतार कर शरीर दिखाने के लिए आज भले ही सलमान खान को याद किया जाता है, जबकि इसकी शुरुआत इसी फिल्म से धर्मेंद्र ने की थी। इस फिल्म का एक डायलॉग इतना लोकप्रिय हुआ कि उसने मुहावरे का रूप ले लिया। यह संवाद था, अगर यह बुरा आदमी है तो मै भगवान से प्रार्थना करती हूं कि ऐसे बुरे आदमी हजारों हजार पैदा करें। कहानी मे धर्मेंद्र (शाका) शातिर चोर है। उसका बॉस उसके काम से काफी खुश रहता है। शाका पर रीता फिदा है।

...शीशे से पी या पैमाने से पी

Fool aur Patthar lucky for Dharmendra

बॉस के आदेश पर शाका जीवनलाल के घर चोरी करने जाता है। वहां जाकर वह उलझन मे पड़ जाता है। प्लेग फैलने के कारण सभी घर छोड़ चुके है, विधवा बहू शांति (मीना कुमारी) को छोड़कर। वह काफी बीमार है। घर मे आहट पाकर वह पीने के लिए पानी मांगती है। जाते समय शाका को शांति अंगूठी देती है। कहती है इसके सिवा उसके पास और कुछ नही है।

शाका को उस पर दया आ जाती है। कहानी यहीं से शुरू होती है। शांति की कहानी उसे द्रवित कर देती है। वह शांति को अपने घर लेकर चला जाता है। फिर शाका और शांति के ससुराल वालों के साथ टकराव होता है। मामला कोर्ट में जाता है। कोर्ट मे रिश्ते की मर्यादा का खोखलापन उजागर होता है। इस फिल्म के सभी गाने हिट हुए थे।

...शीशे से पी या पैमाने से पी.., सुन ले पुकार आई.., जिंदगी में प्यार करना सीख ले.., लाई है हजारो रंग होली..। फिल्म में धर्मेंद्र पर कोई गाना नहीं फिल्माया गया। मीना कुमारी पर भी मात्र एक भजन फिल्माया गया था। एक गीत शशिकला पर और एक गीत मदारी पर फिल्माया गया था। रल्हन ने फिल्म में जेबकतरे का रोल किया था, जो शाका का दोस्त होता है।

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