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'दबंग 2' के बारे में सब जानिए खुद सलमान से
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 21 Dec 2012 03:57 PM IST
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सलमान मानते हैं कि उन्होंने एक वक्त कई फ्लॉप फिल्में भी दी हैं। भविष्य में फिर वो समय आ सकता है। इसलिए वे चुलबुल पांडे को ब्रांड मानते हैं, सलमान को नहीं। तो हमने सोचा इस बार सलमान की जगह क्यों न चुलबुल पांडे से कुछ चुलबुले अंदाज़ में बात की जाए। आइए जानें अमर उजाला के पाठकों के लिए चुलबुल पांडे क्या बता रहे हैं अपनी फिल्म 'दबंग 2' के बारे में।
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तो चुलबुल पांडे जी, आपको क्यों लगा कि 'दबंग' का सीक्वल भी बनाया जाना चाहिए?
चुलबुल पांडे :(हँसते हुए,) वो क्या है न, यूं ही बैठे-बैठे तय कर लिया। दरअसल, हमने 'दबंग' के वक्त ही तय किया था कि फिल्म हिट रही तो इसका सीक्वल बनायेंगे। ये निर्णय लेना इतना आसान भी नहीं था। चूँकि 'दबंग' खुद में कम्प्लीट फिल्म थी। ऐसे में इस फिल्म में नया-नया सब कुछ दिखाना, फिल्म में उतार-चढ़ाव दिखाना काफी मुश्किल था।
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फिर हमने सोचा कि अगर प्लानिंग की जाए तो चुलबुल के इतने शेड्स हैं। सभी को अगर पर्दे पर दिखाया जाए तो उसमें नयापन आएगा। फिर हमने सारे किरदारों पर सोचना शुरू किया और बन गयी चुलबुल पांडे की एक और कहानी। अब ये तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा कि हम कितने सफल हो पाए हैं।
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आपने किरदारों की बात की है। तो इस बार चुलबुल पांडे किस अंदाज़ में होंगे और चुलबुल पांडे की रज्जो किस अंदाज़ में होगी?
चुलबुल पांडे : इस बार आपको चुलबुल पांडे पापा बने नजर आयेंगे। चुलबुल पांडे पारिवारिक व्यक्ति बन चुके हैं। रज्जो से उनका प्यार करने का अंदाज़ बदल चुका है। इस बार आप देखेंगे कि कैसे एक हीरो शादी के बाद भी अपनी पत्नी से प्यार करता है। जिसे अरबाज़ ने बेहद ख़ूबसूरती से दर्शाया है।
जहाँ तक बात है खलनायक कि तो पहले हमने सोनू सूद को ही रखा था। लेकिन अरबाज़ चाहता था कि इस बार जो भी विलेन हो वो बिलकुल चुलबुल पांडे की टक्कर का हो। तो, उसने प्रकाश राज को चुना। प्रकाश के साथ मैंने 'वांटेड' में काम किया है। मैं जनता हूँ की वो कितने बेहतरीन कलाकार हैं। इस बार चुलबुल पांडे पहले से ज्यादा निराले अंदाज़ में सबका मनोरंजन करेगा।
क्या सलमान और चुलबुल पांडे अब ब्रांड बन चुके हैं?
चुलबुल पांडे : मैं नहीं मानता कि सलमान ब्रांड है। ब्रांड चुलबुल पांडे है। वरना यही सलमान है न जिसने कई फ्लॉप्स भी दिए हैं। चुलबुल पांडे के ब्रांड बनने की वजह यही है कि चुलबुल पांडे आम लोगों को जोड़ पाया है। साथ ही वो देहाती काइंड ऑफ़ कोप है। ऐसे कोप फिल्मों में कम दिखते थे। लेकिन सभी चुलबुल पांडे से क्लोज हैं, सलमान से नहीं। चुलबुल ने सलमान को भी हिट बना दिया है।
लेकिन 'दबंग' के बाद आपकी सारी फिल्में लगातार ब्लॉकबस्टर रही। सलमान मेनिया शुरू हो गया और लगातार एक सी फिल्में बनने लगी?
चुलबुल पांडे : देखिए, सिनेमा का हमेशा अलग-अलग दौर रहा है। कभी ट्रेजेडी वाली फिल्में बनी। कभी 'हम आपके हैं कौन' आई तो उसी तरह की कई फिल्में आयीं। फिर रोमांटिक फिल्में आयीं। उससे पहले अलग तरह की एक्शन फिल्मों का दौर था। ये भी एक दौर है। एक-दो सालों में ख़त्म हो जाएगा।
जहाँ तक बात है सलमान मेनिया कि तो इस बारे में यही कहूँगा, कि न जाने क्यों लेकिन मेरे फैन मुझसे लॉयल रहे हैं। मुझे जब बुरे दौर का भी सामना करना पड़ा है, तब भी मेरे फैन ने मेरा साथ दिया है। आज जब चिंकारा जैसे केस से भी जूझ रहा हूँ, तब भी उनका ही साथ मिला है। इसलिए तो कहता हूँ कि मेरे लिए जिंदगी में '3 एफ' मायने रखते हैं। मेरी फैमिली, मेरे फ्रेंड्स और मेरे फैन्स।
'दबंग' को इतनी बड़ी कामयाबी मिलेगी, कभी सोचा था?
चुलबुल पांडे : जिस वक्त हम पहली 'दबंग' बनाने चले थे, उस वक्त जमके नेगेटिव पब्लिसिटी हुई थी। लोगों ने कहा, कोई बेकार सी फिल्म बना रहा है। बेकार सा टाइटिल है 'दबंग'। रुरल बैकग्राउंड पर है, ग्रॉस है। एक कोप है जो हंसा-हंसा कर लोगों को मारेगा। लोग कह रहे थे कि बर्बाद हो जाओगे। स्क्रिप्ट कई बड़ी जगहों पर घूम फिर चुकी थी। लेकिन कोई बनाने को तैयार नहीं था।
आखिरकार प्रोमोज आए। ऑडियंस को फिल्म अच्छी लगी और 'दबंग' हिट रही। अरबाज़ और अभिनव की मेहनत का नतीजा था कि 'दबंग' हिट हो गई।
अभी आपने अभिनव की चर्चा की। फिर 'दबंग 2' में वो आपके साथ क्यों नहीं?
चुलबुल पांडे : ऐसा नहीं था की हमने बात नहीं की थी। लेकिन वजह ये रही कि वो कुछ और बनाना चाहते थे। मैं उनसे जाकर मिला था। लेकिन बाद में अनुराग ने भी बहुत कुछ कहा। खैर, यही चाहूँगा कि हर कोई अच्छा करे। अरबाज़ भाई है तो चाहूँगा कि ये चुनौती वो जीत जाएं क्योंकि लोग तो कंपेयर करेंगे कि, अरबाज़ सोच रहा है कि बस बना ली फिल्म हो गया। लेकिन अभी तो उसकी अग्नि परीक्षा शुरू हुई है। सभी तुलना करेंगे और इसके लिए तो तैयार रहना होगा।
अरबाज़ निर्देशक के रूप में कैसे लगे। कैसा रहा आपका अनुभव?
चुलबुल पांडे : हमने एक-दुसरे की खूब शर्ट फाड़ी है। (हँसते हुए) डैड नहीं होते तो हमारा क्या होता। अच्छा रहा, काफी सुलझा है वो। डैड का दुलारा है तो आप समझ सकते हैं कि सेंसेबेल भी कितना होगा।
ये बात तो है कि, भाई के साथ काम करने में कही इगो नहीं आता। ऐसे में आपको भी सलाह देने में दिक्कत नहीं होती। बाकि मानना न मानना अपने ऊपर है।
सलीम जी ने कितनी हेल्प की?
चुलबुल पांडे : बहुत। अब घर पर इतने बड़े लेखक हैं। उनकी हेल्प न लो तो ये तो बेवकूफी ही होगी। लेकिन डैड ने कभी कुछ थोपा नहीं। जो उनके पॉइंट्स थे, रिलीवेंट थे। बाकी उनके जमाने और हमारे जमाने में काफी फर्क है। डैड भी इस बात को समझते हैं। लेकिन डैड ने भी इस प्रोजेक्ट में काफी एन्जॉय किया है।
आप जिस फिल्म में हैं, वहां हिट की गारंटी है?
चुलबुल पांडे : मनोरंजन की गारंटी देता हूं बस।
आपकी आनेवाली फिल्में?
चुलबुल पांडे : 'किक', 'नो एंट्री में एंट्री' और 'शेर खान'।