जन्मदिन विशेषः कैसे बने शाहरुख इंडस्ट्री के बादशाह

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 02 Nov 2012 03:37 PM IST
birthday special- how shahrukh became king of bollywood
‌'किंग खान', 'किंग ऑफ रोमांस' और 'बादशाह' जैसे उपनामों से नवाजे गए शाहरुख खान का कॅरियर फिल्म इंडस्ट्री में किसी के लिए भी प्रेरणा का विषय हो सकता है। अपने 47वें जन्मदिन पर शाहरुख जिस मुकाम पर खड़े दिखते हैँ इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता है।

 शाहरुख हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े रोमांटिक हीरो हैं। पर्दे पर जब वह नायिका के साथ रोमांस कर रहे होते हैँ तो उन्हें देखकर दर्शकों को लगता है कि क्या शाहरुख जितना भी कोई केयरिंग या लविंग हो सकता है। शाहरुख की ज्यादातर फिल्में रोमांस के इर्द-गिर्द रहीं। रोमांटिक भूमिका में दर्शकों ने शाहरुख को खूब प्यार दिया।

शाहरुख रोमांस को अपना कंफर्ट जोन भी मानते हैं। जब-जब किसी दूसरे विषय पर बनी उनकी फिल्‍म उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही तब-तब शाहरुख तेजी से रोमांस की गोद में लौटे हैं। इस रोमांटिक इमेज के अलावा शाहरुख ने प्रयोग भी किए हैं।

'जोश', 'अशोका', 'मैं हूं ना', 'स्वदेश', 'पहेली', 'चक दे इंडिया', 'डॉन' और 'रॉ-वन' जैसी कुछ फिल्मों में शाहरुख ने लीक से अलग हटकर भू‌मिकाएं की। कुछ में वह सफल रहे तो कुछ में औसत। पर उनके अभिनय को हर बार सराहा गया। शाहरुख ने 70 से भी अधिक हिन्दी फिल्मों में अभिनय किया है।

उन्हें चौदह फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुए। दिलीप कुमार के साथ वह 8 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जितने वाले अभिनेता होने का रिकॉर्ड रखते हैं। 2005 में भारत सरकार ने भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए इन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

दीवाना से की बॉलीवुड में इंट्रीः

दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक 'फौजी' और 'सर्कस' के बाद दर्शकों ने पहली बार शाहरुख को 1992 में रिलीज हुई फिल्म दीवाना में देखा था। इस फिल्म में उनके साथ  रिषी कपूर और दिव्या भारती थे। यह फिल्म हिट रही और शाहरुख को बेस्ट डेब्यूट एक्टर का अवॉर्ड मिला।

इसके बाद उन्होंने 'दिल आसना है', 'चमत्कार', 'राजू बन गया जैंटलमैन', 'माया मेमसाहब' और 'किंग अंकल' जैसी फिल्में की। शाहरुख चर्चा में तब आए जब उन्होंने 1993 में रिलीज हुईं 'डर' और 'बाजीगर' फिल्मों में एंटी हीरो की भूमिका की। लीक से हटकर किया गया यह प्रयोग दर्शकों को रास आया।

1995 रहा टर्निंग प्वाइंटः

शाहरुख खान के लिए 1995 टर्निंग प्वाइंट रहा। इस साल उनकी दो फिल्में 'करन-अर्जुन' और 'दिलवाले दुल्हिनयां ले जाएंगे' बड़ी हिट साबित हुईं। 'दिलवाले दुल्हिनयां ले जाएंगे' ने शाहरुख को एक स्टार की इमेज दी। यह फिल्म मुंबई के एक थियेटर में अब भी चल रही है।

आने वाले सालों में ‌'दिल तो पागल है', 'परदेश', 'कोयला', 'डुप्लीकेट', 'बादशाह' जैसी फिल्मों के जरिए शाहरुख खान का करियर आगे बढ़ता रहा। 1998 में रिलीज हुई फिल्म 'कुछ कुछ होता है' की सफलता ने शाहरुख की रोमांटिक इमेज पर विश्वसनीयता का ठप्पा लगाया।

प्रयोग का दौर हुआ शुरूः

सन 2000 में रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म 'मोहब्बतें' एक तरह की प्रयोगात्मक फिल्म थी। इस फिल्म में लगभग दस कलाकार मुख्य भूमिका में थे। शाहरुख इस फिल्म में एक स्कूल टीचर की भूमिका में नजर आए। यशराज बैनर की यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई।

इसके बाद 'कभी खुशी कभी गम', 'देवदास', 'वीर जारा', 'कल हो ना हो' जैसी फिल्में शाहरुख की इमेज को वर्सेटाइल बनाती रहीं। हर फिल्म में किंग खान एक अलग इमेज और कलेवर में नजर आए। लगभग हर नायिका के साथ शाहरुख की जोड़ी देखने को मिली।

रोमांस के साथ थोड़ा एक्‍शन भीः

शाहरुख खान ने रोमांस के साथ थोड़ा एक्‍शन भी करना शुरू किया। 'रॉवन, 'डॉन' और 'डॉनः2' में उनकी एक्‍शन भूमिका देखने को मिली। यह फिल्में सफल रहीं। अब एक बार फिर दीवाली के मौके पर शाहरुख खान अपनी रोमांटिक इमेज के साथ वापस आ रहे हैं। इस फिल्म के सुपर हिट होने की पूरी संभावनाएं हैं। आने वाले वाले सालों में शाहरुख की 'चेन्नई एक्सप्रेस' और 'हैपी न्यू ईयर' फिल्में प्रदर्शित होंगी।

एक्टर के साथ्‍ा निर्माता भीः

अभिनय के साथ शाहरुख निर्माता भी रहे हैं। उनके होम प्रोडक्‍शन से दस से अधिक फिल्में बन चुकी हैं। शाहरुख खान के होम प्रोडक्‍शन की पहली फिल्म 2000 में रिलीज हुई 'फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी' रही। इसके बाद 'अशोका', 'चलते चलते', 'मैं हूं ना', 'पहेली', 'ओम शांति ओम', 'रॉवन' और 'डॉन 2' फिल्मों को शाहरुख ने प्रोड्यूस किया।

पढ़ाई, शादी और मुंबई आगमनः

शाहरुख के पिता ताज मोहम्मद खान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां का नाम फातिमा था। शाहरुख ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की। पढ़ाई के साथ-साथ शाहरुख खेल व नाट्य कला में भी काफी अच्छे थे। इसके बाद उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की।

शाहरुख को बचपन से ही अभिनय का शौक था। बचपन में वे रामलीला में एक बंदर का रोल निभाया करते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद शाहरुख ने अभिनय की शिक्षा प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में हासिल की। अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद शाहरुख दिल्ली छोड़ मुंबई में आ बसे। मुंबई में कई साल के संघर्ष के बाद उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत 'फौजी' नामक एक सीरियल से की। 80 के दशक में उन्होंने कुछ सीरियल्स किए जिनमें फौजी और सर्कस मुख्य हैं।

शाहरुख ने एक हिन्दू लड़की गौरी से शादी की। शाहरुख और गौरी का प्रेम उस समय का है, जब वे अपनी पहचान बनाने के लिए दिल्ली और मुंबई के चक्कर काट रहे थे। गौरी शाहरुख के पडोस में रहती थीं। एक-दूसरे के प्रति यह आकर्षण पहले प्रेम और फिर शादी में बदल गया।





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