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जन्मदिन विशेषः ऑफबीट फिल्मों के स्टार हैं अमोल
रोहित मिश्र
Updated Sat, 24 Nov 2012 09:52 AM IST
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अमोल पालेकर आज 67 साल के हो गए हैं। अमोल हिंदी फिल्मों के लिए एक बड़ा नाम हैं। मल्टीप्लेक्स कल्चर आने के बाद छोटी बजट की जैसी फिल्में हिट हो रहीं हैं अमोल पालेकर उन्हीं किस्म की फिल्मों के सुपरहीरो थे। अमोल पालेकर यदि आज के समय के हीरो होते तो ताज्जुब नहीं उनकी गिनती सबसे बड़े नायक के रूप में हो रही होती।
70 और 80 के दशक में जब बॉलीवुड में लार्जर दैन लाइफ ट्रेंड था उस समय अमोल पालेकर अपने शांत और सहज अभिनय से लोगों का मन मोहते थे। एक किस्म की सीधापन उनकी यूएसपी थी। उनकी बोलने की स्टाईल, कॉमेडी करने का ढंग और भावुक करने का अंदाज भी अलहदा था।
'गोलमाल' फिल्म के कई दृश्य सिर्फ अमोल के अभिनय की वजह से दर्शकों को याद हैं। अमोल एक संपूर्ण अभिनेता रहे हैं। ऐक्टिंग करने के साथ उन्होंने फिल्में लिखी भी हैं और निर्देशित भी की हैं। उनकी हर फिल्म पर एक अमोल पालेकर छाप देखने को मिलती है। थिएटर से आए अमोल ने यह राय और भी पुख्ता की कि अभिनय का ककहरा सीखने के लिए कलाकार को थिएटर की एबीसीडी आनी ही चाहिए।
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थिएटर से हुई शुरुआ
अभिनय में कदम रखने से पहले ही अमोल पालेकर थिएटर जगत में निर्देशन में हाथ आजमा चुके थे। निर्देशक के रूप में उनकी एक अलग पहचान थी। उन्होंने नामचीन निर्देशक सत्यदेव दुबे के साथ मिलकर मराठी थिएटर में बहुत से नए प्रयोग किए। बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य उनका नाटक देखने आया करते थे।
इसके बाद साल 1972 में उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप 'अनिकेत' शुरू किया। थिएटर की दुनिया में ही उनकी मुलाकात बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य की तिकड़ी से हुई जिनके साथ अमोल ने कई फिल्में कीं।
'रजनीगंधा' फिल्म से शुरुआ
मन्नू भंडारी की चर्चित कहानी 'यही सच है' पर बासु चटर्जी ने 'रजनीगंधा' नाम से फिल्म बनाई। इस प्रेम त्रिकोण में अमोल की मुख्य भूमिका थी। यह अमोल पालेकर की पहली फिल्म थी। फिल्म चली और उनकी शांत ऐक्टिंग की हर कहीं तारीफ हुई। इसके बाद उनके पास ऐसी फिल्मों का अंबार लग गया।
'छोटी सी बात', 'चितचोर', 'घरौंदा', 'मेरी बीवी की शादी', 'बातों-बातों में', 'गोलमाल', 'नरम-गरम', 'श्रीमान-श्रीमती' जैसी कई यादगार फिल्में अमोल पालेकर ने दी। अमोल की भूमिका एक आदमी का प्रतिनिधित्व करने वाली रही। फिल्मों में उनके पहनावे भी आम आदमी के रहते। बहुत ही कम फिल्मों में उन्हें शूटेड-बूटेड दिखाया गया। उस दौर में अभिनेता नाचना शुरू कर चुके थे। पर अमोल का अंदाज वही रहा जिस अंदाज में संजीव कुमार, राजेन्द्र कुमार या मनोज कुमार डांस फिल्माया करते थे।
हास्य में बेजोड़
अमोल पालेकर का हास्य में कोई जोड़ नहीं था। उनका हास्य सिचुवेशनल होता था। 'गोलमाल' की डबल भूमिका में वह खूब जमे। यही हाल उनकी अन्य कॉमेडी फिल्मों का रहा। दर्शक अमोल की भूमिका याद करके बाद तक हंसते रहते। 'रंग बिरंगी', 'श्रीमान श्रीमती' और 'नरम गरम' में उन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया। अमोल ने जो फिल्में डायरेक्ट की है उसमें भी अमोल का अंदाज वही रहा जैसा कि वह अभिनय में किया करते थे।
निर्देशक के रूप में भी सफल
एक निर्देशक के रूप में अमोल ने कई फिल्मों को डायरेक्टर करने के साथ कुछ धारावाहिकों का भी निर्देशन किया। अमोल ने साल 1981 में मराठी फिल्म 'आक्रित' से फिल्म निर्देशन में कदम रखा। उनकी अंतिम निर्देशित फिल्म 'पहेली' रही। शाहरुख खान और रानी मुखर्जी के साथ बनाई गई यह फिल्म बहुत सफल नहीं रही है। इसके अलावा अमोल ने 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए', 'अनकही' और 'अनाहत' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। फिल्मों के अलावा अमोल रंगमंच में भी सक्रिय रहे।
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70 और 80 के दशक में जब बॉलीवुड में लार्जर दैन लाइफ ट्रेंड था उस समय अमोल पालेकर अपने शांत और सहज अभिनय से लोगों का मन मोहते थे। एक किस्म की सीधापन उनकी यूएसपी थी। उनकी बोलने की स्टाईल, कॉमेडी करने का ढंग और भावुक करने का अंदाज भी अलहदा था।
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'गोलमाल' फिल्म के कई दृश्य सिर्फ अमोल के अभिनय की वजह से दर्शकों को याद हैं। अमोल एक संपूर्ण अभिनेता रहे हैं। ऐक्टिंग करने के साथ उन्होंने फिल्में लिखी भी हैं और निर्देशित भी की हैं। उनकी हर फिल्म पर एक अमोल पालेकर छाप देखने को मिलती है। थिएटर से आए अमोल ने यह राय और भी पुख्ता की कि अभिनय का ककहरा सीखने के लिए कलाकार को थिएटर की एबीसीडी आनी ही चाहिए।
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थिएटर से हुई शुरुआ
अभिनय में कदम रखने से पहले ही अमोल पालेकर थिएटर जगत में निर्देशन में हाथ आजमा चुके थे। निर्देशक के रूप में उनकी एक अलग पहचान थी। उन्होंने नामचीन निर्देशक सत्यदेव दुबे के साथ मिलकर मराठी थिएटर में बहुत से नए प्रयोग किए। बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य उनका नाटक देखने आया करते थे।
इसके बाद साल 1972 में उन्होंने अपना थिएटर ग्रुप 'अनिकेत' शुरू किया। थिएटर की दुनिया में ही उनकी मुलाकात बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य की तिकड़ी से हुई जिनके साथ अमोल ने कई फिल्में कीं।
'रजनीगंधा' फिल्म से शुरुआ
मन्नू भंडारी की चर्चित कहानी 'यही सच है' पर बासु चटर्जी ने 'रजनीगंधा' नाम से फिल्म बनाई। इस प्रेम त्रिकोण में अमोल की मुख्य भूमिका थी। यह अमोल पालेकर की पहली फिल्म थी। फिल्म चली और उनकी शांत ऐक्टिंग की हर कहीं तारीफ हुई। इसके बाद उनके पास ऐसी फिल्मों का अंबार लग गया।
'छोटी सी बात', 'चितचोर', 'घरौंदा', 'मेरी बीवी की शादी', 'बातों-बातों में', 'गोलमाल', 'नरम-गरम', 'श्रीमान-श्रीमती' जैसी कई यादगार फिल्में अमोल पालेकर ने दी। अमोल की भूमिका एक आदमी का प्रतिनिधित्व करने वाली रही। फिल्मों में उनके पहनावे भी आम आदमी के रहते। बहुत ही कम फिल्मों में उन्हें शूटेड-बूटेड दिखाया गया। उस दौर में अभिनेता नाचना शुरू कर चुके थे। पर अमोल का अंदाज वही रहा जिस अंदाज में संजीव कुमार, राजेन्द्र कुमार या मनोज कुमार डांस फिल्माया करते थे।
हास्य में बेजोड़
अमोल पालेकर का हास्य में कोई जोड़ नहीं था। उनका हास्य सिचुवेशनल होता था। 'गोलमाल' की डबल भूमिका में वह खूब जमे। यही हाल उनकी अन्य कॉमेडी फिल्मों का रहा। दर्शक अमोल की भूमिका याद करके बाद तक हंसते रहते। 'रंग बिरंगी', 'श्रीमान श्रीमती' और 'नरम गरम' में उन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया। अमोल ने जो फिल्में डायरेक्ट की है उसमें भी अमोल का अंदाज वही रहा जैसा कि वह अभिनय में किया करते थे।
निर्देशक के रूप में भी सफल
एक निर्देशक के रूप में अमोल ने कई फिल्मों को डायरेक्टर करने के साथ कुछ धारावाहिकों का भी निर्देशन किया। अमोल ने साल 1981 में मराठी फिल्म 'आक्रित' से फिल्म निर्देशन में कदम रखा। उनकी अंतिम निर्देशित फिल्म 'पहेली' रही। शाहरुख खान और रानी मुखर्जी के साथ बनाई गई यह फिल्म बहुत सफल नहीं रही है। इसके अलावा अमोल ने 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए', 'अनकही' और 'अनाहत' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। फिल्मों के अलावा अमोल रंगमंच में भी सक्रिय रहे।