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आमिर खान
Updated Sat, 16 Feb 2013 05:23 PM IST
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आमिर खान बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर, निर्देशक और निर्माता हैं। सिनेमा के प्रति इनकी लगन ने इन्हें दुनियाभर में मशहूर कर दिया है। आमिर अपने आप में चलता फिरता सिनेमा स्कूल है।
आमिर खान का फिल्मी करियर चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ था। अपने रिश्तेदार नासिर हुसैन की फिल्म 'यादों की बारात' (1973) में आमिर ने एक बच्चे का किरदार निभाया था।
14 साल बाद आमिर ने फिल्म 'कयामत से कयामत तक' में लीड रोल करते हुए धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई। यह फिल्म साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। इसके बाद से आमिर का करियर रफ्तार पकड़ता गया।
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शुरुआती सफलता के बाद आमिर की चॉकलेटी छवि 'दिल' 1990, 'दिल है कि मानता नहीं' 1991, 'जो जीता वही सिकंदर' 1992, 'हम हैं राही प्यार के' 1993 में भी दिखाई दी। इसके अलावा 'रंगीला' 1995 में मुन्ना और 'राजा हिंदुस्तानी' का राजा इसी छवि को लेकर आगे बढ़ा।
इसके बाद आमिर ने सामाजिक मुद्दों और गंभीरता की ओर रुख किया। 1998 में बनी 'गुलाम' में उन्होंने अपनी गायन क्षमता का भी परिचय दिया। इसके अलावा 1999 में आई 'सरफरोश' में उन्होंने पुलिसवाले का शानदार रोल अदा किया।
'दिल चाहता है' 2001, 'रंग दे बसंती' 2009, 'फना' 2006, 'तारे जमीन पर' 2007, 'गजनी' 2008 और '3 इडियट्स' 2009 के जरिए आमिर खान ने बॉलीवुड में शानदार उपस्थिति दर्ज कराई।
फिल्म अवार्ड समारोह से दूर रहने वाले आमिर को कई बेस्ट पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। मिस्टर परफेक्शिस्ट के नाम से मशहूर आमिर अब 'सत्यमेव जयते' के माध्यम से टीवी पर भी अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
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आमिर खान का फिल्मी करियर चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ था। अपने रिश्तेदार नासिर हुसैन की फिल्म 'यादों की बारात' (1973) में आमिर ने एक बच्चे का किरदार निभाया था।
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14 साल बाद आमिर ने फिल्म 'कयामत से कयामत तक' में लीड रोल करते हुए धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराई। यह फिल्म साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। इसके बाद से आमिर का करियर रफ्तार पकड़ता गया।
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शुरुआती सफलता के बाद आमिर की चॉकलेटी छवि 'दिल' 1990, 'दिल है कि मानता नहीं' 1991, 'जो जीता वही सिकंदर' 1992, 'हम हैं राही प्यार के' 1993 में भी दिखाई दी। इसके अलावा 'रंगीला' 1995 में मुन्ना और 'राजा हिंदुस्तानी' का राजा इसी छवि को लेकर आगे बढ़ा।
इसके बाद आमिर ने सामाजिक मुद्दों और गंभीरता की ओर रुख किया। 1998 में बनी 'गुलाम' में उन्होंने अपनी गायन क्षमता का भी परिचय दिया। इसके अलावा 1999 में आई 'सरफरोश' में उन्होंने पुलिसवाले का शानदार रोल अदा किया।
'दिल चाहता है' 2001, 'रंग दे बसंती' 2009, 'फना' 2006, 'तारे जमीन पर' 2007, 'गजनी' 2008 और '3 इडियट्स' 2009 के जरिए आमिर खान ने बॉलीवुड में शानदार उपस्थिति दर्ज कराई।
फिल्म अवार्ड समारोह से दूर रहने वाले आमिर को कई बेस्ट पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। मिस्टर परफेक्शिस्ट के नाम से मशहूर आमिर अब 'सत्यमेव जयते' के माध्यम से टीवी पर भी अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।