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''इंडस्ट्री और ग्लोबलाइजेशन की चुनौतियों के लिए तैयार रहें स्टूडेंट्स''
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 26 Feb 2016 01:50 PM IST
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हमारे देश में सबसे बड़ा चैलेंज स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री और ग्लोबलाइजेशन की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना है। हमारी सारी तैयारी, सारा इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की सारी योजनाएं इसी चुनौती को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। यह कहना है कि जयपुर की जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरमैन अर्पित अग्रवाल का। उन्होंने बताया कि किस तरह से बीते कुछ ही सालों में जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों से टक्कर ली है।
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"यह आसान काम नहीं था..", अर्पित बताते हैं, "पहले हमारे कॉलेज एफिलिएटेड मोड में काम करते थे। इस पूरे सिस्टम में दिक्कत यह थी कि जो स्टूडेंट बाहर कदम रखता है वह आउटडेटेड कहलाने लगता है कि क्योंकि इंडस्ट्री में जितनी तेजी से बदलाव हो रहे हैं, हमारे पाठ्यक्रमों को उतनी तेजी से संशोधित नहीं किया जाता। इसलिए हमने ऑटोनॉमी के लिए कदम उठाया और जेईसीआरसी की स्थापना हुई।"
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जेईसीआरसी के चेयरमैन ने कहा, "हमने सबसे पहला काम किया कि अपने यहां चलने वाले एमबीए पाठ्यक्रम को इंडस्ट्री में चल रही मौजूदा गतिविधियों से जोड़ा। इसके लिए पहला कदम उठाया इस कोर्स को आइचीव (ICHIEVE) मीडिया के साथ जोड़ा, यह मीडिया और मार्केटिंग साल्यूशंस में काम करती है।" उन्होंने यह भी बताया कि हमारी फैकल्टी इंडस्ट्री के साथ बेहद करीब रहकर काम करती है ताकि वे स्टूडेंट्स को अपडेट रख सकें।
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उन्होंने बताया इसके अलावा हमारा जोर अपने स्टूडेंट्स को इंटरनेशनल एक्सपोजर देने पर है, जो दो-तीन फोकस एरिया हैं उनमें से एक यह भी है। इसके लिए भी हमने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेक्निकल एजुकेशन के लिए काम करने वाली संस्था से टाइअप किया है। इसकी मदद से हम अपने स्टूडेंट्स को बाहर इंटर्नशिप के लिए भेजते हैं। खास बात यह है कि इन इन्टर्नशिप में स्टूडेंट्स को पैसे भी मिलते हैं।
अर्पित अग्रवाल ने कहा, "स्टूडेंट्स को बाहर भेजना इसलिए जरूरी है कि हम एक ग्लोबल अर्थव्यवस्था में काम कर रहे हैं। हमारे स्टूडेंट्स को इसका एक्सपोजर पहले से ही मिल जाता है। वे वहां जाते हैं, उनके तौर-तरीके देखते हैं, नई चीजें सीखते हैं, मिलकर रिसर्च करते हैं और हमारे विश्वविद्यालय के कल्चर में भी कुछ न कुछ नया जोड़ते हैं। इतना ही नहीं हम अपने यहां भी दूसरे देशों से विद्यार्थियों को आमंत्रित करते हैं।" उन्होंने बताया कि इस तरह के एक्सचेंज प्रोग्राम जर्मनी, थाइलैंड, चीन, कोरिया, यूएस समेत 122 देशों के साथ चल रहे हैं।
देश और विदेश के इन स्टूडेंट्स को एक बेहतर एकेडमिक माहौल मिले इसके लिए अच्छी फैकल्टी के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जरूरत है। अर्पित अग्रवाल बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने ग्रीन कैंपस कांसेप्ट पर विश्वविद्यालय को डेवलप किया है। यहां की बिल्डिंग को एक खास टेक्नोलॉजी से बनाया गया है कि जिसकी वजह से अंदर बाहर के तापमान में काफी फर्क आ जाता है। हमारे हॉस्टल अपार्टमेंट शैली में बने हैं जिसमें कॉमन लॉबी के साथ इंडिपेंडेट रूम जोड़े गए हैं। यही वजह है कि यहां एडमिशन लेने वाले बाहर रहने की बजाय हॉस्टल में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
भविष्य की योजनाओं के बारे में बात चलते ही अर्पित अग्रवाल कई महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं। उन्होंने बताया कि हमारा सारा जोर रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर है। अक्सर प्राइवेट कालेजों में रिसर्च पर समय और पैसे नहीं खर्च किए जाते मगर हमारा माना है कि टीचर और स्टूडेंट की असली पहचान उसके रिसर्च के कारण बनती है। आईआईटी की फैकल्टी अपने रिसर्च वर्क के कारण ही दुनिया में नाम कमाती है। इसके लिए हम सरकार के साथ एक बहुत बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रोग्राम शामिल हैं।
इसके अलावा विद्यार्थियों को इंटरप्रिन्योरशिप के प्रति जागरुक करने के लिए एक ऐप सेंटर बनाने पर काम चल रहा है, जहां विश्विद्यालय की तरफ से स्टूडेंट को अपना प्रोडक्ट डेवलप करने के लिए स्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो वेंचर कैपिटलिस्ट की तरह उनके प्रोजेक्ट को फंड भी किया जाएगा।