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अब सिक्योरिटी भी एक बड़ा मुद्दा है प्राइवेट कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए

Thu, 24 Dec 2015 02:00 PM IST
Updated Thu, 24 Dec 2015 02:00 PM IST
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Security is an important issue for universities and colleges

अपनी बेहतर शिक्षा व्यवस्था और अत्याधुनिक तकनीक के ज़रिए छात्रों का भविष्य उज्ज्वल करने वाले कई विश्वविद्यालय देशभर में मौजूद हैं।

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माता-पिता बड़ी उम्मीदों के साथ विद्यार्थियों को अपने घर से दूर इन संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए भेजते हैं तो जाहिर सी बात है उनकी सुरक्षा सबसे पहली चिंता होती है। दूसरी तरफ हकीकत यह है कि दिल्ली, मुम्बई जैसे राज्यों में कई प्राइवेट कॉलेजों में स्टूडेंट्स की सुरक्षा पर कोई पॉलिसी नहीं है।

हमने कॉलेज कैंपस और हॉस्टल्स में सुरक्षा पर दिल्ली के कई प्राइवेट और गवर्नमेंट कॉलेजों में छात्रों से बात की। दिल्ली यूनीवर्सिटी के छात्र मनीष ने हमें बताया की उनके कॉलेज में सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। कॉलेज में कोई भी व्यक्ति कभी भी प्रवेश कर सकता हैं।
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वहीं नोएडा के एक निजी कॉलेज की छात्रा का कहना है कि कॉलेज कैंपस का गर्ल्स हॉस्टल भगवान भरोसे ही है, न तो हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे हैं और न ही इलेक्ट्रिसिटी वायरिंग, ऐसे में लड़कियां सिर्फ एक गार्ड के भरोसे ही रहने पर मजबूर हैं।
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अगर निजी विश्वविद्यालयों की बात करें तो जीएलए यूनीवर्सिटी जैसे कई शिक्षण संस्थान सुरक्षा व्यवस्था का खास ख्याल रखते हैं। हमने कुछ प्राइवेट कालेजों का कैंपस सुरक्षा के नज़रिए से बेहद सुरक्षित पाया। अधिकतर संस्थानों में सुरक्षा और अराजकतत्वों से निपटने के लिए पूरे कैंपस में सीसीटीवी कैमरे, मैटल डिटेक्टर और इलेक्ट्रिसिटी वायरिंग से लैस किया गया है।

अकेले जीएलए यूनीवर्सिटी में 10 हज़ार से ज़्यादा छात्र-छात्राएं हैं, इनमें 5 हज़ार से ज़्यादा छात्र हॉस्टल में रहते हैं. इसके अलावा 1500 के आसपास फैकल्टी और स्टॉफ सदस्य भी हैं।

इन सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी को निभाते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कैंपस में 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, 6 मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था की है, ताकि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।


कैंपस की तमाम जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सभी सिक्टोरिटी गार्ड को वॉकी-टॉकी दिए गए हैं. हॉस्टल और कैंपस में अवैध गतिविधि और प्रवेश पर रोक के लिए विश्वविद्यालय ने दीवारों पर दो फीट की इलेक्ट्रिक वायरिंग लगाई है, जो 24 घंटे बिजली से जुड़ी हैं।

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