{"_id":"7ebcace4a5a0ab7a1e4c14d9ce60f7e1","slug":"president-s-daughter-dance-in-banaras-hindi-news-vs","type":"story","status":"publish","title_hn":"...और मंच पर थिरक उठी राष्ट्रपति की बेटी","category":{"title":"Education Archives","title_hn":"एजूकेशन आर्काइव","slug":"education-archives"}}
...और मंच पर थिरक उठी राष्ट्रपति की बेटी
Updated Wed, 08 Oct 2014 01:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीवन के विविध रंगों को संगीत के साथ पिरोकर कथक की अद्भुत प्रस्तुति अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नृत्यांगना व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दी। टीएमयू के सभागार में हुए कार्यक्रम में कथक और अपनी भाव भंगिमाओं से अपनी बात दर्शकों के दिलों तक पहुंचा दी।
शर्मिष्ठा मुखर्जी और उनकी टीम ने बनारस को केंद्र में रखकर छह अलग अलग प्रस्तुतियां दीं। पुरानी प्रथाओं के साथ तकनीकी और विजुअल का बेहद खूबसूरत तालमेल करते हुए नया प्रयोग किया।
द सिटी आफ शिवा में बनारस की भगवान शिव के प्रति भक्ति को दर्शाया। दिखाया कि नृत्य केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं बल्कि ईश्वर की आराधना, संतुष्टि और जीवन का हिस्सा है। द घाट में बनारस के घाट और उनके महत्व को कत्थक से बया किया। बताने की कोशिश की गई कि नृत्य में जीवन है। इटरनल मेलोडीज में रस भरे तोरे नैन, सवरिया तोहे गरवा लगा लूं... में आंखों और हाथों के बीच समन्वय से पूरी कहानी कह दी, तो चलत मोहे छेड़े बनवारी, बइयां मरोड़े... में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कृष्ण और राधा के बीच की हंसी ठिठौली और रास को मंच पर उतार दिया। लगा जैसे राधा और कृष्ण एक ही व्यक्तित्व में समा गए हों। दर्शाया कि हमारे परंपरागत नृत्य में भी आनंद की अनुभूति है।
विज्ञापन
इसके बाद उनकी टीम की छह सदस्याओं ने बनारस के गोदौलिया चौक पर हर रोज होने वाली घटनाओं को कत्थक से साकार किया। भागती दौड़ती रफ्तार भरी जिंदगी, रुकने के लिए किसी के पास समय नहीं, दुर्घटना, उसके बाद विवाद और समझौते की मनमोहक प्रस्तुति। कत्थक को नीरस और बोझिल नृत्य मानने वालों के लिए प्रस्तुति अद्भुत थी। मणिकर्णिका घाट से गीता के ज्ञान आत्मा अमर है, वह न पैदा होती है और ना ही मरती है के ज्ञान को कत्थक की कलाओं से कह दिया।
अंत में बनारस की तहजीब, सभ्यता और सर्वधर्म समभाव को समेटे हुए जीरो प्वाइंट की प्रस्तुति दी। जिसमें हिंदू, बौद्ध और मुस्लिम धर्म का वर्णन करते हुए प्रेम का संदेश दिया। दिखाया कि संगीत और नृत्य एक दूसरे के पूरक हैं। इन सभी में दृश्यों में पहनावा, भाव भंगिमा, संगीता के राग और लाइटिंग का अद्भुत समन्वय था।
विज्ञापन
शर्मिष्ठा मुखर्जी और उनकी टीम ने बनारस को केंद्र में रखकर छह अलग अलग प्रस्तुतियां दीं। पुरानी प्रथाओं के साथ तकनीकी और विजुअल का बेहद खूबसूरत तालमेल करते हुए नया प्रयोग किया।
विज्ञापन
द सिटी आफ शिवा में बनारस की भगवान शिव के प्रति भक्ति को दर्शाया। दिखाया कि नृत्य केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं बल्कि ईश्वर की आराधना, संतुष्टि और जीवन का हिस्सा है। द घाट में बनारस के घाट और उनके महत्व को कत्थक से बया किया। बताने की कोशिश की गई कि नृत्य में जीवन है। इटरनल मेलोडीज में रस भरे तोरे नैन, सवरिया तोहे गरवा लगा लूं... में आंखों और हाथों के बीच समन्वय से पूरी कहानी कह दी, तो चलत मोहे छेड़े बनवारी, बइयां मरोड़े... में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कृष्ण और राधा के बीच की हंसी ठिठौली और रास को मंच पर उतार दिया। लगा जैसे राधा और कृष्ण एक ही व्यक्तित्व में समा गए हों। दर्शाया कि हमारे परंपरागत नृत्य में भी आनंद की अनुभूति है।
विज्ञापन
इसके बाद उनकी टीम की छह सदस्याओं ने बनारस के गोदौलिया चौक पर हर रोज होने वाली घटनाओं को कत्थक से साकार किया। भागती दौड़ती रफ्तार भरी जिंदगी, रुकने के लिए किसी के पास समय नहीं, दुर्घटना, उसके बाद विवाद और समझौते की मनमोहक प्रस्तुति। कत्थक को नीरस और बोझिल नृत्य मानने वालों के लिए प्रस्तुति अद्भुत थी। मणिकर्णिका घाट से गीता के ज्ञान आत्मा अमर है, वह न पैदा होती है और ना ही मरती है के ज्ञान को कत्थक की कलाओं से कह दिया।
अंत में बनारस की तहजीब, सभ्यता और सर्वधर्म समभाव को समेटे हुए जीरो प्वाइंट की प्रस्तुति दी। जिसमें हिंदू, बौद्ध और मुस्लिम धर्म का वर्णन करते हुए प्रेम का संदेश दिया। दिखाया कि संगीत और नृत्य एक दूसरे के पूरक हैं। इन सभी में दृश्यों में पहनावा, भाव भंगिमा, संगीता के राग और लाइटिंग का अद्भुत समन्वय था।