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काम को छोटा और बड़ा कौन बनाता है?

Mon, 13 Oct 2014 01:10 PM IST
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 13 Oct 2014 01:10 PM IST
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personality devlopment in career
उत्कृष्ट विचार ही पर्याप्त नहीं होते। एक साधारण विचार पर भी अगर अमल किया जाए और उसे विकसित किया जाए, तो उसके अच्छे परिणाम निकलते हैं। दूसरी तरफ, अगर आपके पास सर्वश्रेष्ठ विचार भी हो और आप उस पर अमल नहीं कर पाए, तो वह बेकार है।
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काम को बेहतर ढंग से शुरू करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है, उसे पूरा करना। तभी आप सफलता के शिखर पर विराजमान हो सकते हैं। हर बड़े काम में ऐसे लोगों की जरूरत पड़ती है, जो न सिर्फ सोचते हों, बल्कि काम को पूरा करने की क्षमता भी रखते हों। ऐसे लोग ही शीर्ष पदों पर पहुंचते हैं।
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मिस्टर कर्मठ और मिस्टर निठल्ले के बीच का अंतर अनगिनत चीजों में दिखता है। मिस्टर कर्मठ छुट्टियां मनाने की योजना बनाते हैं। वे छुट्टियां मनाकर आ जाते हैं। मिस्टर निठल्ले छुट्टियां मनाने की सोचते हैं, परंतु वे उसे अगले साल तक के लिए टाल देते हैं। मिस्टर कर्मठ निर्णय लेते हैं कि उन्हें नियमित रूप से चर्च जाना चाहिए और वह ऐसा करते हैं। मिस्टर निठल्ले सोचते हैं कि चर्च जाना अच्छा विचार है, परंतु वे जाते नहीं। आप मिस्टर कर्मठ बनें।
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परिस्थितियों के आदर्श होने का इंतजार न करें। भविष्य की बाधाओं और कठिनाइयों की उम्मीद करें और जब वे आएं, तब आप उन्हें सुलझाने का तरीका खोजें। याद रखें, विचारों का मूल्य तभी है, जब आप उन पर अमल करें। अपना आत्मविश्वास हासिल करने के लिए कर्म करें। सही मूड बनने का इंतजार न करें। जो काम आपको करना है, बस शुरू कर दें। पहल करें। संघर्ष करें। गेंद छीनकर गोल की तरफ दौड़ लगाएं। यह बताएं कि आपमें कर्म करने की योग्यता और महत्वाकांक्षा है।

(मंजुल पब्लिशिंग हाऊस द्वारा प्रकाशित पु्स्तक ‘द मैजिक ऑफ थिंकिंग बिग‘ से साभार)

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