{"_id":"7dd1f69c50da2545c150feb10eb5d6e1","slug":"now-people-will-pay-for-nss-certificate-hindi-news-vs","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब मुफ्त में नहीं मिलेगा NSS का सर्टिफिकेट","category":{"title":"Education Archives","title_hn":"एजूकेशन आर्काइव","slug":"education-archives"}}
अब मुफ्त में नहीं मिलेगा NSS का सर्टिफिकेट
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Oct 2014 01:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए छात्रों को अब फीस चुकानी पड़ेगी। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशों पर यूजीसी ने आदेश जारी किए हैं कि नई एनएसएस यूनिट सेल्फ फाइनेंस मोड में ही खोली जाएगी। हालांकि, पुरानी यूनिटों के लिए केंद्र
सरकार से पैसा आता रहेगा।
राज्य में खुलने वाली नई यूनिट का पूरा खर्च संबंधित संस्थान को वहन करना होगा। इसकी भरपाई या तो छात्रों से फीस के रूप में या कंपनियों के कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड से की जाएगी। उत्तराखंड में इस वक्त 683 एनएसएस की यूनिटों से करीब 57 हजार स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। इनमें 20 यूनिटें इसी साल खुली हैं। अब डीम्ड यूनिवर्सिटी के अलावा निजी या सरकारी कालेजों में एनएसएस यूनिट सेल्फ फाइनेंस मोड में ही खुलेगी।
प्रदेश में 120 यूनिटों की जरूरत
प्रदेश में नए विवि और कालेजों में एनएसएस आने की स्थिति में करीब 120 नई यूनिटों की जरूरत है। नए नियम के मुताबिक अब यूनिट सेल्फ फाइनेंस मोड में ही खुल सकती है। लेकिन, यदि किसी दूसरे राज्य में यूनिट सरेंडर होती है तो उसे यहां ट्रांसफर किया जा सकता है। इस स्थिति में इस यूनिट में प्रशिक्षण पहले की तरह निशुल्क रहेगा।
विज्ञापन
एक यूनिट पर 47500 रुपये खर्च
एनएसएस की 100 स्वयंसेवियों वाली एक यूनिट पर सालाना करीब 47500 रुपये खर्च आता है। समुदाय आधारित इस योजना के तहत स्वयंसेवियों को बेहतर नागरिक बनने के प्रति प्रेरित किया जाता है।
एनएसएस के जिला समन्वयक डा. विनीत विश्नोई ने बताया कि 12वीं के छात्र को ग्रेजुएशन में और ग्रेजुएशन वाले छात्र को पोस्ट ग्रेजुएशन में एनएसएस प्रमाणपत्र का लाभ मिलता है। पहले सामान्य एनएसएस स्वयंसेवी को भी लाभ मिल जाता था लेकिन अब बी प्रमाणपत्र की परीक्षा पास छात्र को आगामी कक्षा में प्रवेश के लिए मेरिट में दो अंक और सी प्रमाणपत्र परीक्षा पास छात्र को तीन अंक का वेटेज मिलता है।
विज्ञापन
सरकार से पैसा आता रहेगा।
राज्य में खुलने वाली नई यूनिट का पूरा खर्च संबंधित संस्थान को वहन करना होगा। इसकी भरपाई या तो छात्रों से फीस के रूप में या कंपनियों के कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड से की जाएगी। उत्तराखंड में इस वक्त 683 एनएसएस की यूनिटों से करीब 57 हजार स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। इनमें 20 यूनिटें इसी साल खुली हैं। अब डीम्ड यूनिवर्सिटी के अलावा निजी या सरकारी कालेजों में एनएसएस यूनिट सेल्फ फाइनेंस मोड में ही खुलेगी।
विज्ञापन
प्रदेश में 120 यूनिटों की जरूरत
प्रदेश में नए विवि और कालेजों में एनएसएस आने की स्थिति में करीब 120 नई यूनिटों की जरूरत है। नए नियम के मुताबिक अब यूनिट सेल्फ फाइनेंस मोड में ही खुल सकती है। लेकिन, यदि किसी दूसरे राज्य में यूनिट सरेंडर होती है तो उसे यहां ट्रांसफर किया जा सकता है। इस स्थिति में इस यूनिट में प्रशिक्षण पहले की तरह निशुल्क रहेगा।
विज्ञापन
एक यूनिट पर 47500 रुपये खर्च
एनएसएस की 100 स्वयंसेवियों वाली एक यूनिट पर सालाना करीब 47500 रुपये खर्च आता है। समुदाय आधारित इस योजना के तहत स्वयंसेवियों को बेहतर नागरिक बनने के प्रति प्रेरित किया जाता है।
एनएसएस के जिला समन्वयक डा. विनीत विश्नोई ने बताया कि 12वीं के छात्र को ग्रेजुएशन में और ग्रेजुएशन वाले छात्र को पोस्ट ग्रेजुएशन में एनएसएस प्रमाणपत्र का लाभ मिलता है। पहले सामान्य एनएसएस स्वयंसेवी को भी लाभ मिल जाता था लेकिन अब बी प्रमाणपत्र की परीक्षा पास छात्र को आगामी कक्षा में प्रवेश के लिए मेरिट में दो अंक और सी प्रमाणपत्र परीक्षा पास छात्र को तीन अंक का वेटेज मिलता है।