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बधिर बच्चों को सुनने की ताकत दे रहा है बीएचयू
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2014 12:16 PM IST
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बीएचयू के नाक, कान और गला विभाग के चिकित्सकों को शुक्रवार को काकलीयर इंप्लांट (कर्णावत प्रत्यारोपण) करने में बड़ी सफलता मिली है। विभाग के डॉ. राजेश कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों ने बीएचयू के कर्मचारी की पुत्री प्रीती (10) और शहर की मुस्कान (4) के कान का सफल आपरेशन कर कान प्रत्यारोपण किया। चिकित्सकों ने इसे बड़ी उपलब्धि माना है। दोनो लड़कियां मूक बधिर हैं। इस आपरेशन में चिकित्सकों को दो घंटे का समय लगा है। इस इंप्लांट में कान के नस के पास एक इलेक्ट्रानिक डिवाइस लगा दी जाती है, जो आजीवन पर्दे का काम करती है।
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि काकलीयर इंप्लांट के लिए एक साल से विभाग में प्रयास चल रहा था। इसके बाद सफलता मिली है। बीएचयू में कान प्रत्यारोपण में छह लाख खर्च आएगा। मशीन का क्रय चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की ओर से किया जाता है। जबकि दिल्ली और अन्य शहरों में ऐसे आपरेशन पर 12 से 14 लाख खर्च आते हैं।
उन्होंने दावा किया कि पूर्वांचल केअलावा बिहार और झारखंड में इस तरह का आपरेशन पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि अब दोनों बच्चियां बोलने के साथ आसानी से सुन सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्पिक थिरेपी के सहयोग से जन्मजात तथा जन्म के उपरांत मूक बथिर होने वाला मरीज अच्छी तरह से सुनने और बोलने लगता है। आपरेशन में नाक कान गला विभाग के अध्यक्ष प्रो. आरके जैन, डॉ. विश्वंभर सिंह, डॉ. शशि प्रकाश भी सहयोग किए।
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डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि काकलीयर इंप्लांट के लिए एक साल से विभाग में प्रयास चल रहा था। इसके बाद सफलता मिली है। बीएचयू में कान प्रत्यारोपण में छह लाख खर्च आएगा। मशीन का क्रय चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की ओर से किया जाता है। जबकि दिल्ली और अन्य शहरों में ऐसे आपरेशन पर 12 से 14 लाख खर्च आते हैं।
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उन्होंने दावा किया कि पूर्वांचल केअलावा बिहार और झारखंड में इस तरह का आपरेशन पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि अब दोनों बच्चियां बोलने के साथ आसानी से सुन सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्पिक थिरेपी के सहयोग से जन्मजात तथा जन्म के उपरांत मूक बथिर होने वाला मरीज अच्छी तरह से सुनने और बोलने लगता है। आपरेशन में नाक कान गला विभाग के अध्यक्ष प्रो. आरके जैन, डॉ. विश्वंभर सिंह, डॉ. शशि प्रकाश भी सहयोग किए।
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