लो जी, निकल गया ऑड-ईवन का तोड़, आप ऐसा मत करना
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प्रदूषण से बचने के लिए दिल्ली सरकार का ऑड-ईवन फॉर्मूला कितना सफल होगा, ये अब जुगाड़खोरों के मंसूबों पर निर्भर करेगा!
दरअसल, नंबर प्लेट बनाने वाली दुकानों पर लोगों का भारी जमावड़ा दिखने लगा है। लोग अब ऑड-ईवन से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल जुगाड़ के तौर पर करने की दौड़ में हैं।
मेरठ, गाजियाबाद, फारीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा आदि जगहों से रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले हजारों लोगों को फर्जी नंबर प्लेटों के जरिए पुलिस की आंख में धूल झोंकने को तैयार है। लेकिन आप ऐसा कतई नहीं करना, क्योंकि पकड़े जाने पर ये जुगाड़ कड़ी कानूनी कार्रवाई के तौर पर आपके गले की फांस बन सकता है।
ऑड-ईवन का फर्जी जुगाड़
ऑड-ईवन (सम-विषम) नंबर सिस्टम के दायरे में एनसीआर के अलावा अन्य राज्यों की गाड़ियों को भी रखा गया है। मेरठ से हजारों लोग रोजाना अपनी गाड़ियों या टैक्सी आदि से दिल्ली आते-जाते हैं। सिस्टम के चलते अब ये लोग एक दिन ही अपनी गाड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन, अब इसकी भी काट ढूंढ़ निकाली गई है। ऑड नंबर की गाड़ी वालों ने ईवन नंबर की और ईवन नंबर की गाड़ी वालों ने ऑड नंबर की फर्जी प्लेट बनवानी शुरू कर दी है।
जिमखाना, शिव चौक और थापर नगर आदि स्थानों पर नंबर प्लेट बनाने वालों का कहना है कि दिल्ली में सम-विषम नंबर सिस्टम के चलते नंबर प्लेट बनाने की मांग में अचानक से बढ़ गई है। यूपी में अभी तक हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लागू नहीं होने से नंबर प्लेट को वाहन पर आसानी से लगाया या उतारा जा सकता है।
नंबर प्लेट मेकर जावेद ने बताया कि इस काम को ऐसे लोग ज्यादा करा रहे हैं, जो निजी गाड़ियों का इस्तेमाल अवैध रूप से टैक्सी में कर रहे हैं। इनका कहना है कि नंबर देखकर ही पुलिस दिल्ली में प्रवेश करने देती है।
इस जुगाड़ से कैसे निपटेगी दिल्ली सरकार?
एक निजी टैक्सी चालक ने बताया कि उन्हें तो रोजी-रोटी के लिए रोजाना ही दिल्ली जाना पड़ता है। फर्जी नंबर प्लेट के साथ अगर आरसी की भी जरूरत पड़ी तो वो भी जुगाड़बाजी से बनवा ली जाएगी। यहां सब काम आसानी से हो जाता है।
मेरठ टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह का कहना है कि पहले तो टैक्सी वालों का धंधा निजी कार टैक्सी वालों ने बर्बाद कर दिया था। अब बचा हुआ कारोबार ईवन और ऑड नंबर सिस्टम से खत्म हो गया है। टैक्सी की सबसे ज्यादा डिमांड दिल्ली के लिए ही होती है। अब रोजाना आधी टैक्सी ही चल पाएंगी।
एक तरफ हाई-प्रोफाइल सोशायटी जहां इस फॉर्मूले का समर्थन करती दिख रही है वहीं हजारों की संख्या में वे लोग भी हैं जिनकी रोजी-रोटी उनकी लौरी या कार पर ही टिकी है। ऐसे में रोजाना मेरठ, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा आदि जगहों से दिल्ली आने वाले लोगों के साथ दिल्ली सरकार कैसे निपटेगी ये देखना वाकई दिलचस्प होगा।