'शैतान' के नाम पर मासूम बच्ची के साथ पैंसिल से कर दी हैवानियत
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ये खबरें तो अब आम हो गई कि एक मां ने गुस्से में आ कर या सबक सिखाने के लिए अपनी ही बेटी का कत्ल कर दिया। लेकिन क्या कभी सुना है कि पूरी दुनिया को खतरों से बचाने के लिए मां ने अपनी ही बेटी का खून कर दिया।
चौंकिए मत, यह सच है क्योंकि एक औरत शेली क्रिस्टोफर ने अपनी चार साल की बेटी सोफिया को 6 बार और अपने 42 वर्षीय पार्टनर रिचर्ड ब्राउन को 29 बार पैंसिल और चाकू से घोप कर मार डाला।
सबसे ज्यादा हैरत की बात यह है कि औरत ने ऐसा इसलिए किया ताकि वह उन्हें काल्पनिक शैतानी ताकत और वैंपायर बनने से रोक सके। महिला पर चल रहे ट्रायल में कोर्ट ने उसे मानसिक रूप से अस्थिर मानते हुए निर्दोष करार दिया।
बल्ब से मिलते थे कत्ल करने के संकेत
हत्याएं होने के दो दिन पहले ही क्रिस्टोफर मेंटल अस्पताल गई थी जहां उसने कर्मचारियों को बताया कि 'कोई है जो उसके पीछे पड़ा है'। डॉक्टरों और नर्सों के बहुत बार कहने पर भी वह अस्पताल में रहने के लिए नहीं मानी और घर चली गई।
हत्यारी महिला की तरफ से केस लड़ रहे वकील क्रिस्पिन आएलेट ने कोर्ट को बताया कि मौत के दिन ही क्रिस्टोफर ने एक मनोवैज्ञानिक को बताया था कि उसे संकेत मिल रहे हैं कि दुनिया को वैंपायरों से बचाने के लिए उसे अपनी बेटी और साथी का खून करना होगा।
महिला का कहना था कि ये संकेत दीवार पर लगे बल्ब से मिल रहे थे और उसने वहीं किया जो उसे कहा गया। क्रिस्टोफर ने यह भी बताया था कि जब उसने चाकू से खून कर दिया तो बल्ब ने संकेत दिए कि वह उन दोनों के सीने में लकड़ी की कोई चीज भोके ताकि वे वैंपायर न बनने पाएं।
मानसिक अस्पताल में भर्ती है महिला
वकील ने कहा कि महिला मानसिक रूप से बीमार है और यह डॉक्टरों द्वारा किए गए टेस्ट से सामने आ गया है। उसे अब मानसिक अस्पताल में रखा गया है और इलाज चल रहा है।
मृतको के शरीर की जांच कर रहे डॉक्टरों को पति के शरीर से बच्ची का पेंट ब्रश और बच्ची के शरीर से पेंसिल के टुकड़े मिले।
फरवरी में हुए इस डबल मर्डर मामले की सुनवाई में सारे सबूतों और स्थिति को मद्देनजर रखते हुए न्यायधीशों ने 10 मिनट में ही यह फैसला सुना दिया कि महिला निर्दोष है।