विवाहेत्तर संबंधों की आग में परिवार खाक, पति को उतारा मौत के घाट
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पति पूना में काम करता था। कुछ दिनों के लिए घर आया था। मौका प्रधानी के चुनाव का था लेकिव वो बीवी बच्चों के साथ जिंदगी के कुछ खुशनुमा पल गुजारने आया था। लेकिन बीवी इतनी बेवफा और जालिम निकली कि गैर मर्द के साथ मिलकर अपने पति को ऊपर पहुंचा दिया। विवाहेत्तर संबंधों की आग में परिवार की खुशियां खाक हो गईं।
मामला यूपी के बाघराय थाना क्षेत्र के गलगली गांव का है। आरोप है कि 40 वर्षीय बसंतलाल को उसकी ही बीवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया। उसका रक्तरंजित शव चारपाई पर पड़ा मिला। उसके मुंह से खून निकला हुआ था और कई जगहों पर चोट के निशान थे। मृतक की मां की तहरीर पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
बीते शनिवार की सुबह नौ बजे उसकी पत्नी घर के बाहर अलाव के पास बैठी थी। इस दौरान गांव का एक शख्स रामखेलावन आया और बसंत को बुलाने लगा। इस पर पत्नी पुष्पा ने कहा कि वह अंदर जाकर उसे जगा ले। लेकिन जब वह अंदर गया तो चारपाई पर बसंत की लाश देखकर उसके होश उड़ गए।
सर्द मौसम की सुबह मातमी माहौल में तब्दील होते देर नहीं लगी। परिजनों का दुख आंखों से आंसुओं और गले की चीखों से निकलने लगा। पास में ही मृतक मां सुखिया देवी रहती हैं। बेटे की मौत की खबर लगते ही वह चीख-चीख कर बहू पर बदचलन होने और प्रेमी के साथ मिलकर बेटे की गला दबाकर हत्या करने की बात कहने लगी।
पूरी तैयारी के साथ दिया गया वारदात को अंजाम
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की मां सुखिया देवी की तहरीर पर पत्नी पुष्पा और गांव के ही उसके कथित प्रेमी केशव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
बसंत के घर में दो हिस्से हैं, लेकिन बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। बताया गया कि रात में एक तरफ उसकी पत्नी अपनी दो बेटियों के साथ सोई थी और दूसरी तरफ वह सोया था। बसंत के शव को देखकर लग रहा था कि उसने हत्यारों से बचने के लिए काफी संघर्ष किया। बावजूद इसके उसका रस्सी के सहारे गला घोंट दिया गया। ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसके संघर्ष के दौरान पत्नी की आंख न खुले। फिलहाल उसकी पत्नी पुष्पा आरोप को गलत बता रही है।
सन 2012 में गांव के केशव यादव से पुष्पा का विवाद हो गया था। इसमें पुष्पा ने केशव के खिलाफ एससीएसटी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे से बचने के लिए केशव धीरे-धीरे पुष्पा के करीब आ गया।
चर्चा है कि पुष्पा की सास सुखिया देवी और उसकी दो बेटियां उसे केशव से मिलने से मना करती थीं। बावजूद इसके केशव का आना जाना घर में लगा रहता था। बसंत के घर में न रहने से उसे कोई रोकने वाला भी नहीं था।
बसंतलाल प्रधानी के चुनाव के लिए आया था। उसे शनिवार को ही पूना के लिए रवाना होना था। शाम को उसे ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ग्रामीणों में चर्चा है कि अचानक केशव के आने की जानकारी बसंत को हो गई और उसी के चलते उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
वारदात के बारे में जिलाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार ने कहा कि घटना गंभीर है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।