{"_id":"18ed7884083e7d1b1bab787824e7866e","slug":"west-bengal-district-megistrate-police-commissionar-njpda","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम को रिहा कर कमिश्नर को हटाया","category":{"title":"Crime Archives","title_hn":"क्राइम आर्काइव","slug":"crime-archives"}}
डीएम को रिहा कर कमिश्नर को हटाया
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 01 Dec 2013 11:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के सीईओ के पद पर तैनाती के दौरान धन की हेराफेरी के आरोप में मालदा जिले के जिलाधिकारी को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन इस पूरी कार्रवाई को खारिज करते हुए राज्य सरकार ने सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त के जयरामन को पद से हटा दिया।
हेराफेरी मामले में हुई थी डीएम की गिरफ्तारी
साल 2012-13 के दौरान प्राधिकरण के सीईओ रहे गोडाला किरण कुमार वर्तमान में मालदा के जिलाधिकारी हैं। धन की हेराफेरी के बारे में पूछताछ के लिए शुक्रवार को उन्हें सिलीगुड़ी बुलाया गया, जहां बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें शनिवार को सिलीगुड़ी की त्वरित अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
बंगाल सरकार ने डीएम को रिहा किया और कमिश्नर को हटा दिया
लेकिन इस पूरी घटना से राज्य सरकार बेहद नाराज है। कोलकाता में मुख्य सचिव संजय मित्रा ने कहा कि कुमार की गिरफ्तारी में जयरामन ने अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है और उन्हें तुरंत कोलकाता बुलाया गया है।
विज्ञापन
मुख्य सचिव ने कहा कि जयरामन ने इस बारे में न तो राज्य सरकार को बताया और न ही इसके लिए मंजूरी मांगी। ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने के पहले मंजूरी की जरूरत होती है, क्योंकि इससे पूरे प्रशासन पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह बहुत जरूरी था।
आरोपी व्यक्ति के साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका होने पर गिरफ्तारी जरूरी होती है। लेकिन, इस मामले में ऐसा कुछ नहीं था।
विज्ञापन
हेराफेरी मामले में हुई थी डीएम की गिरफ्तारी
साल 2012-13 के दौरान प्राधिकरण के सीईओ रहे गोडाला किरण कुमार वर्तमान में मालदा के जिलाधिकारी हैं। धन की हेराफेरी के बारे में पूछताछ के लिए शुक्रवार को उन्हें सिलीगुड़ी बुलाया गया, जहां बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें शनिवार को सिलीगुड़ी की त्वरित अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
विज्ञापन
बंगाल सरकार ने डीएम को रिहा किया और कमिश्नर को हटा दिया
लेकिन इस पूरी घटना से राज्य सरकार बेहद नाराज है। कोलकाता में मुख्य सचिव संजय मित्रा ने कहा कि कुमार की गिरफ्तारी में जयरामन ने अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है और उन्हें तुरंत कोलकाता बुलाया गया है।
विज्ञापन
मुख्य सचिव ने कहा कि जयरामन ने इस बारे में न तो राज्य सरकार को बताया और न ही इसके लिए मंजूरी मांगी। ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने के पहले मंजूरी की जरूरत होती है, क्योंकि इससे पूरे प्रशासन पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह बहुत जरूरी था।
आरोपी व्यक्ति के साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका होने पर गिरफ्तारी जरूरी होती है। लेकिन, इस मामले में ऐसा कुछ नहीं था।