कैसे कैसे मुकदमे, पुलिस ने बच्चों को भी नहीं बख्शा
चार साल के बच्चे को उम्र कैद! अजीब लगता है ना लेकिन ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी पुलिस नौ माह के बच्चे को रेप के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। जानिए ऐसे ही और मामलों को।
दिलचस्प बात यह है कि मामला 2014 का है और उस वक्त ये बच्चा महज एक साल का था। बच्चे का नाम अहमद मंसूर करमी बताया जा रहा है। अदालत में इस बच्चे पर हत्या, हत्या की कोशिश, संपति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस अधिकारी को धमकाने की विभिन्न धाराओं पर बहस हुई।
मंसूर के वकील ने कहा कि इस बच्चे का नाम गलती से सजा पाने वालों की लिस्ट में चला गया था, लेकिन बच्चे के परिजनों के पास उसका जन्म प्रमाण पत्र नहीं था जिससे अदालत में ये साबित किया जा सके कि मामले के वक्त बच्चा महज एक साल का था।
उन्होंने कहा कि बाद में ये मामला मिलिटरी कोर्ट में चला गया और अदालत ने बच्चे को उम्र कैद सुना दी। बच्चे का साथ साथ 115 अन्य लोगों को भी सजा सुनाई गई है।
तीन साल के बच्चे पर जमीन हथियाने का केस
भला तीन साल का बच्चा किसी की जमीन हथिया सकता है क्या। पाकिस्तान में तीन साल के बच्चे के खिलाफ जमीन हथियाने और जायदाद हड़पने का मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने इस्लामाबाद के शालीमार में सेक्टर एफ-10 में जमीन हथियाने के मामले में तीन साल के बच्चे को आरोपी बनाया और बाकायदा उसके खिलाफ केस दर्ज किया।
हालांकि बच्चे की गिरफ्तारी से पहले ही उसके परिजनों ने उसकी जमानत याचिका दायर कर दी और उस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पुलिस की खिंचाई की।
नौ महीने के बच्चे पर बलात्कार का मामला
ये मामला भी पाकिस्तान का है। यहां 2009 में पुलिस ने महज नौ माह के बच्चे के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया। मामला तब खुला जब बच्चे के मां बाप को भनक लगी।
इस बेतुके मामले पर खुद आंतरिक मंत्रालय को पुलिस से पूछना पड़ा कि ऐसी बेतुकी प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई। आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने पुलिस से पूछा कि क्या आप लोग प्राथमिकी दर्ज करते वक्त आंख और कान खुले नहीं रखते, तो इस तरह की गलतियां कैसे हो जाती है।
'एक तरफ लोग परेशान हैं कि उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती और दूसरी तरफ बिना किसी जांच के पुलिस ऐसी प्राथमिकी दर्ज कर रही है।'
पांच साल के बच्चे पर शांति भंग करने का आरोप
ऐसा तो हरियाणा पुलिस ही कर सकती है। पिछले साल जुलाई में हिसार पुलिस ने पांच साल के एक बच्चे के खिलाफ शांति भंग करने की मामला दर्ज किया। खास बात ये है कि बच्चे के खिलाफ ये मामला दर्ज कराने वाली बच्चे की मामी है।
दरअसल बच्चे की मां और उसकी भाभी के बीच संपति विवाद चल रहा था जिसके भाभी ने पूरे परिवार के खिलाफ शांति भंग (सीआरपीसी 107 150) के तहत केस दर्ज करवा दिया। पुलिस वालों ने भी बिना जांच पड़ताल किए बच्चे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
बच्चे के खिलाफ केस दर्ज होने से सकते में आए मां बाप केजी के बच्चे को स्कूल ड्रेस में ही लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पास पहुंचे तो बच्चे को देखते ही सीएम खुद चौंक गए। उन्होंने पूरे मामले की सघन जांच करके लापरवाही करने वाले पुलिस अफसरों को नापने के आदेश दिए।
दो साल के बच्चे पर चोरी का केस
दो साल का बच्चा ठीक से बोलना नहीं जानता तो वो चोरी कैसे कर सकता है। लखनऊ से सटे सीतापुर में होशियार पुलिसवालों ने महज दो साल के बच्चे रवि के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया बल्कि उसे गिरफ्तार करने उसके घर भी पहुंच गई।
बच्चे के पिता ने हड़बड़ा कर अदालत से इंसाफ मांगा और अदालत ने पुलिस को तलब किया। पुलिस की दबंगई देखिए, उसने तर्क किया कि चूंकि एक बार प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है इसलिए बच्चे का नाम हटाया नहीं जा सकता लेकिन जांच के बाद बच्चे का नाम हटा दिया जाएगा।
इस मामले में पुलिस की लापरवाही साफ नजर आती है। उसने बिना तफ्तीश किए चोरी के आरोपी द्वारा बताए गए नामों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस ये जाने बिना कि रवि दो साल का बच्चा है, उसे गिरफ्तार करने घर तक पहुंच गई।
पहली क्लास के बच्चे पर बलात्कार का केस
क्या पहली क्लास का बच्चा रेप कर सकता है? लेकिन लखनऊ पुलिस को ऐसा ही लगता है। पिछले साल अगस्त में लखनऊ पुलिस ने फर्स्ट क्लास के एक बच्चे पर केजी क्लास की बच्ची से रेप का केस दर्ज किया।
केजी क्लास की बच्ची ने जब स्कूल जाने से मना किया तो परिजनों ने कारण पूछा। बच्ची ने कहा कि पहली क्लास का एक बच्चा तंग करता है। गुस्साए परिजनों ने पुलिस में जाकर बच्चे के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया।
बाद में प्रिंसिपल से पूछताछ के दौरान पता चला कि खेल के मैदान में दोनों के बीच झगड़ा हो गया था जिसके चलते बच्चे ने बच्ची को पैंसिल से चुभा दिया था। इसी बात को बच्ची के परिजनों ने यौन उत्पीड़न मानकर बच्चे के खिलाफ केस दर्ज करा दिया।
नौ माह के बच्चे पर हत्या का केस
अप्रैल 2014 में लाहौर में नौ माह के बच्चे पर हत्या, पुलिस दल पर हमला करने का केस दर्ज किया गया। अपने दादा की गोद में दूध की बोतल हाथ में लिए जब मूसा खान नाम का बच्चा अदालत में पहुंचा तो जज समेत पूरा मीडिया हैरान हो गया।
पूरा मामला लाहौर के एक मुस्लम कस्बे का है जहां पुलिस अवैध रूप से चल रहे गैस और पानी के कनेक्शन काटने पहुंची थी। उस वक्त तलाशी ले रही पुलिस पर कुछ लोगों ने हमला किया जिसमें दो पुलिसवाले जख्मी हो गए।
हमले में 20 लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई जिसमें मूसा खान का नाम शामिल हो गया। पुलिस ने बिना जाचें परखे मूसा को भी आरोपी बना दिया और उसे अदालत पहुंचने का समन भी जारी हो गया।
कार्यवाही का पालन करते हुए मूसा को अदालत में लाने से पहले बाकायदा उसके फिंगर प्रिंट लिए गए। डरा सहमा बच्चा पूरी कार्यवाही के दौरान रोता और चिल्लाता रहा।
अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि जो बच्चा ठीक से चल और बोल नहीं पाता वो भला हत्या कैसे करेगा।
तीन साल के बच्चे पर छेड़खानी का केस
ऐसे मामलों में बिहार पुलिस भी किसी से कम नहीं है। पुलिस ने तीन साल के बच्चे पर 12 साल की लड़की से छेड़खानी का केस दर्ज किया। मजेदार बात ये है कि ये केस चार साल तक चला औऱ बच्चा मां की गोद में सुनवाई के लिए कोर्ट जाया करता था।
मामला भोजपुर के बडहरा गाँव का है। यहां आपसी कहासुनी में एक परिवार ने दूसरे परिवार के तीन साल के बच्चे के खिलाफ अपनी 12 साल की बेटी से छेड़छाड़ का केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने भी बच्चे की उम्र जांचे बिना केस दर्ज किया और बच्चे के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी।
मजे की बात ये रही कि अदालत में बच्चे की उम्र सत्यापित होने के बाद भी पुलिस ने चार्जशीट वापस लेने की जहमत नहीं उठाई और चार साल तक अदालत में तारीखों पर सुनवाई होती रही।
चार साल बाद जब मामला मानवाधिकार आय़ोग की नजर में आया तो बच्चे के खिलाफ चार्जशीट हटवाई गई।