गैर सिख से शादी करने पर हंगामा, रुकवाई शादी
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लंदन में श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा में उस समय तूफान खड़ा हो गया जब एक सिख युवती को दूसरे समुदाय के शख्स से शादी करने से रोकने के लिए गुरुद्वारा में 20 से ज्यादा कट्टरपंथी पहुंच गए और शादी रुकवा दी। गुरुद्वारा में पहुंचे 20 से ज्यादा लोगों ने अलग धर्म के युवक से शादी का विरोध किया।
श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा के एक सदस्य ने बताया कि शुक्रवार को शादी की सभी तैयारियां हो गईं थीं और वो लोग रास्ते में थे कि तभी सुबह करीब आठ बजे कुछ कुछ लोग वहां पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया।
इंडिपेंडेंट के अनुसार, मामले पर श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा के उपाध्यक्ष सोहन सिंह सूरमा ने मीडिया को बताया कि यहां पर आए सभी लोग कट्टरपंथी थे, उन्होंने कहा वे यहां उनके काय्रक्रम को बर्बाद करने आए थे। उन लोगों का इस गुरुद्वारा से कोई संबंध नहीं है और ना उनकी पहचान की जा सकी है।
गोरे प्रेमी से शादी करने आई थी सिख महिला
उपाध्यक्ष सूरमा ने कहा कि उस गुरुद्वारा में ऐसे लोगों ने हमला किया है जिसका उद्-घाटन यहां के प्रिंस चार्ल्स ने किया था। उन्होंने कहा कि अब गुरद्वारा में निजी सुरक्षा लगाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक सिख महिला जो अपने गोरे प्रेमी के साथ गुरुद्वारा में शादी करना चाहती थी उसे गुरुद्वारा पहुंचे लोगों ने शादी न करने की धमकी दी है।
वहीं गुरुद्वारा समिति की ओर से शादी करने की इच्छुक महिला से संपर्क कर उनके परिवार वालों से शादी करने लिए कहा गया है लेकिन उसने अब गुरुद्वारा में शादी करने से मना किया है क्योंकि उनके शादी के दिन लोगों ने हगामा किया है।
सूरमा ने कहा है कि वह 1994 से इस गुरंद्वारा से जुड़े हैं लेकिन आजतक ऐसा मामला नहीं देखा जहां किसी की शादी का विरोध किया हो। उन्होंने कहा वह खुद कई अन्तर धार्मिक शादियों में हिस्सा ले चुके हैं लेकिन आजतक कभी किसी ने ऐसी शादियों का विरोध नहीं किया।
'ऐसी कट्टरता से नष्ट हो जाएगा धर्म'
गुरुद्वारे में शादी के लिए आए कपल पर हुए हमले और उनकी शादी रुकवाने के बारे में खेद प्रकट करते हुए कहा कि लोगों में इस प्रकार गैंग बनाकर सामने आने और गुंदागर्दी करने से एक दिन सिख धर्म तालिबान बन जाएगा और पूरा समुदाय नष्ट हो जाएगा। इसलिए लोगों को चाहिए कि ऐसे लोगों को बर्दास्त न किया जाए।
गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में यूरोप की सिख परिषद ने अन्तरधार्मिक शादी सुनिश्चित करने के लिए कुछ नियम कानून बनाए थे। इन नियमों के अनुसार, गुरुद्वारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह शादी करने से पहले सुनिश्चित करें कि यहां शादी करने वाले लोग पूरी स्वेच्छा से इस धर्म में आस्था रखते हैं।