गजब खेल: जिसकी बाइक उसी को बना दिया चोर
लोगों को गलत मुकदमों में फंसाने के लिए पुलिस भी अजब-गजब के खेल करती है। इलाहाबाद के धूमनगंज में पुलिस ने एक ऐसे युवक को बाइक चोर बना दिया, जिसने बाइक चोरी की ही नहीं थी।
चार्जशीट में भी पुलिस ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे सकी जिससे पता चले कि बाइक कहां से चोरी की गई और किसकी थी। या अभियुक्त ने किसी के साथ धोखाधड़ी की है। एसीजेएम सुभाष चंद्रा ने पुलिस का आरोपपत्र रद करते अभियुक्त को रिहा करने का निर्देश दिया है। इस आदेश की प्रति एसएसपी और जेल अधीक्षक को भी देने का निर्देश दिया है।
पुलिस ने 12 अप्रैल 2015 को मनोज पासी तथा भोदूं पासी को वाहनों की चेकिंग के दौरान पकड़ा था। वह जिस हीरो होंडा स्प्लेंडर पर थे, उसका नंबर स्पष्ट नहीं होने पर पुलिस ने बाइक चोरी का संदेह जताते हुए दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
कब्जे से हथियार बरामद होना भी दिखाया
उनके कब्जे से तमंचा और कारतूस भी बरामद बताया गया। मामले की जांच पहले एसआई सुनील सिंह और फिर एसआई आंनद कुमार पांडेय ने की। आनंद पांडेय ने कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया।
एसीजेएम ने जब इसका संज्ञान लिया तो पता चला कि बाइक का जो नंबर और चेचिस नंबर चार्जशीट में बताया गया है वह कौशांबी के एक व्यक्ति का है और उसका कहना है कि उसकी बाइक चोरी नहीं हुई है, वह इस्तेमाल कर रहा है।
जांच में यह भी पाया गया कि बाइक की नंबर प्लेट बदली नहीं गई है। नंबर प्लेट बदलने का अभियुक्त का उद्देश्य भी जांच अधिकारी नहीं बता पाए और न ही यह बता पाए कि अभियुक्त ने किसके साथ और क्यों धोखाधड़ी की है। जांच अधिकारी ने ही अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया कि बाइक चोरी की नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि विवेचक ने धोखाधड़ी की धारा 420 की वृद्धि इस डर से कर दी कि कहीं अभियुक्त छूट न जाए। इन आधारों पर चार्जशीट रद करते हुए अभियुक्तों को रिहा करने का आदेश दिया है।