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जुर्म की दुनिया की कहानी, अंडरवर्ल्ड डॉन की जुबानी
संजय श्रीवास्तव/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 15 Dec 2013 12:40 PM IST
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बरेली सेंट्रल जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव का कहना है कि पुलिस रस्सी का सांप बना देती है। उसके साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
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लखनऊ में छात्र राजनीति में कदम रखते ही पुलिस ने स्कूटर चोरी के झूठे आरोप में जेल भेज कर जुर्म की दुनिया का रास्ता दिखा दिया।
गाजीपुर की आम घाट कॉलोनी के विश्वनाथ प्रताप जीटीआई में प्रिंसिपल थे। उनके बड़े बेटे विकास श्रीवास्तव आर्मी में कर्नल हैं। छोटा बेटा ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू बरेली सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
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अपराध की दुनिया में कदम
कलेक्ट्रेट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए लाए जाने के दौरान अमर उजाला से बातचीत में बबलू ने बताया कि उसका काला अध्याय 1982 से शुरू हुआ। वह लखनऊ विश्वविद्यालय में बीए का छात्र था। सहपाठी नीरज जैन विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री पद का उम्मीदवार था।
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विरोधी गुट के छात्रों से हुए झगड़े में एक लड़के को किसी ने छुरी मार दी। घायल छात्र लखनऊ के माफिया अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना के गुट से जुड़ा था। अन्ना ने इस मामले में बबलू को जेल भिजवा दिया। अगले दिन वह जमानत पर छूट गया। मगर करीब बीस दिन बाद ही अन्ना के इशारे पर लखनऊ पुलिस ने स्कूटर चोरी के झूठे मामले में बबलू को दोबारा जेल भेज दिया।
नाराज परिजनों ने जमानत नहीं कराई और बबलू को 15 दिन जेल में रहा पड़ा। फिर तो शहर में कहीं गाड़ी चोरी हुई नहीं कि बबलू के नाम अपराध चढ़ गया। परेशान होकर बबलू घर छोड़कर हॉस्टल में रहने लगा और अन्ना के विरोधी रामगोपाल मिश्र गुट से जुड़ गया। फिर तो दुनिया ही बदल गई। बबलू सचमुच अपराधी बन गया।
'किसी लड़की से प्यार नहीं'
एलएलबी पास 51 साल पार कर चुके बबलू को किसी लड़की से प्यार नहीं हुआ। उसे शादी के बारे में सोचने का मौका भी नहीं मिला। बबलू के खिलाफ दर्ज करीब 60 केसों में केवल चार बचे हैं। बाकी खत्म हो गए। पुणे के एडिशनल कमिश्नर एलडी अरोड़ा मर्डर केस में बबलू, उसके साथी मंगे और सैनी को उम्रकैद की सजा हुई है।
दाउद से पहले दोस्ती, फिर दुश्मनी
बबलू कहता है कि वर्ष 1989 में वह पुलिस से बचने के लिए दिल्ली में चंद्रास्वामी के पास गया। कुछ दिन बाद उनसे बिगड़ गई। फिर वह नेपाल गया और 1992 में दुबई पहुंच गया। दुबई में मिर्जा दिलशाद बेग ने उसकी मुलाकात दाउद इब्राहीम से कराई। मुंबई बम ब्लास्ट के बाद बबलू समेत एक समुदाय के कई लोग डी कंपनी से अलग हो गए और दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।
जेल में महफूज है बबलू
बबलू खुद को जेल में महफूज मानता है। उसे पेरोल पर रिहाई मिल सकती है लेकिन इसके लिए उसने पैरवी नहीं की। उसका कहना है कि उसको असल खतरा आतंकी संगठनों से है।
अधूरा रहा ख्वाब
उसने आर्मी अफसर बनकर या सिविल सर्विसेज में जाकर देश सेवा करने की सोची थी लेकिन ये ख्वाब अधूरे रह गए। उसका दावा है कि अपराध जगत में सक्रियता के दौरान वह भारत में आतंकवाद से जुड़ी सूचनाएं इंटलीजेंस ब्यूरो (आईबी) को देता रहा ।
राजनीति में बबलू की ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। जेल से छूटने पर उसका इरादा फिल्में बनाने का है। उसकी पुस्तक ‘अधूरा ख्वाब’ पर एक फिल्म भी बन रही है।