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भूख लगी तो मार खाई, प्यास लगी तो आंसू पिए

Fri, 18 Jul 2014 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 18 Jul 2014 11:08 AM IST
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The sad story of three children

यूपी के कानपुर की ये दो सच्ची कहानियां मासूम बच्चों की हैं जो किसी वजह से अपने घर से दूर हो गए और ऐसे इंसानों के हाथ लग गए जो इंसान नहीं हैवान थे। दो बच्चे एक डोसे वाले के हाथ लग गए।

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डोसे वाला मारपीट कर दुकान में उनसे काम करवाता और रात में दोनों को दुकान में ही बंद कर जाता था। बेचारे बच्चे अकेले दुकान के भीतर डर के मारे रोते रहते, मां-बाप को याद करते और रोते-रोते सो जाते।
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वहीं, दूसरी जगह बिन बाप की सात साल की बच्ची से घर में सारा काम कराया जाता। जरा सी गलती पर पीटा भी जाता था। उसका सूजा चेहरा, जगह-जगह कटे-फटे के निशान उसके साथ की गई हैवानियत की गवाही दे रहे हैं।

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काम कराने के बाद दुकान में बंद कर देते थे

The sad story of three children

एक डोसा की दुकान में दो चचेरे भाइयों से सारा दिन काम कराया जाता। बाद में उन्हें खाना खिलाने के बाद दुकान में ही बंद कर दिया जाता। किसी तरह दुकान से भागे दोनों भाई हरवंश मोहाल थाना क्षेत्र में टहल रहे थे।

सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्प लाइन ने पुलिस को पूरी बात बताई। शाम को पिता ने आकर फीलखाना थाने में दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।

डीढ़पुरवा बधौली हरदोई निवासी नेत्रपाल सिंह का 14 साल का बेटा संदीप और 13 साल का भतीजा सुशील घर से भाग आए थे। यहां पर कोई उन्हें बहला-फुसलाकर माल रोड स्थित अन्ना मद्रासी डोसा रेस्टोरेंट में छोड़ गया। यहां इनसे काम कराया जाता था। बुधवार को यहां से दोनों भाग खड़े हुए।

रात में दुकान में बंद कर बत्ती बंद कर दी

The sad story of three children

हरवंश मोहाल क्षेत्र में बैठे रो रहे थे। तभी अभिषेक नाम के युवक ने चाइल्ड हेल्प लाइन को फोन कर दिया। इस पर चाइल्ड टीम सदस्य धर्मेंद्र कुमार ओझा मौके पर पहुंचे और पूछताछ के बाद हरवंश मोहाल थाने ले गए।

बच्चों ने बताया कि उनसे डोसा की दुकान पर सुबह से रात तक काम कराया जाता था। रात में उन्हें दुकान में बंद कर बत्ती बंद कर दी जाती थी। बच्चे के बताए पते पर जानकारी दी गई तो गुरुवार को संदीप का पिता नेत्रपाल यहां आए।

उन्होंने फीलखाना थाने में 25/4 माल रोड स्थित अन्ना मद्रासी डोसा के अफजल और सुधीर भाटिया के खिलाफ एक जुलाई से 16 जुलाई तक बच्चों को बंधक बनाकर श्रम कराने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई है। अभी दोनों बच्चों चाइल्ड हेल्प लाइन की सुपुर्दगी में हैं।

बच्ची से कराते थे घर का काम, गलती पर पिटाई

The sad story of three children

सात साल की मासूम बच्ची महिला सिपाही रंजना तिवारी को रोते हुए कमला नगर में मिली। उसके चेहरे पर काफी घाव और सूजन थी। पूछने पर उसने बताया कि एक घर में उससे काम कराया जाता था। जरा सी गलती पर उसे पीटा जाता था। इसलिए वह घर छोड़कर भाग आई है।

महिला सिपाही उसे नजीराबाद थाने ले गई। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को लेकर काफी देर बताया गया घर ढूंढा, लेकिन नहीं मिला। फिलहाल बच्ची को चाइल्ड हेल्प लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।

बच्ची ने पुलिस को अपना नाम फरहीन बताया है। उसने बताया कि उसके पिता का नाम नफीस था। उनकी मौत होचुकी है। उसका एक भाई रिंकू है। वह चकरपुर मंडी में रहती थी। कोई आशीष द्विवेदी चकरपुर मंडी में आम की दुकान के पास से उसे कमला नगर ले आए थे।

वहां उससे घर का काम कराते थे। बच्ची ने पुलिस को बताया कि राधिका की मम्मी काम ठीक न होने पर उसे पीटती थी। गुरुवार सुबह उसे खूब मारा। इसलिए वह भाग आई।

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