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अमेरिका भी नहीं समझ पा रहा कि IS अपनाता है कैसे हथकंडे

Fri, 19 Jun 2015 11:59 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 19 Jun 2015 11:59 AM IST
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The military strategy behind IS conquests

आईएस के सरगना अबु अल बगदादी के इस्लामिक राज्य की स्थापना के ऐलान के एक साल बाद तक अमेरिका की ओर से इसे नेस्तनाबूद करने के लिए हजारों रॉकेट दागे गए, लेकिन आईएस की फौज अभी भी युद्ध के मैदान में एक ताकतवर फोर्स के रूप में लोहा ले रही है। आईएस के लड़ाकों की ताकत से तमाम रक्षा विशेषज्ञ उनकी युद्ध रणनीति से अचंभित हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आईएस के खात्मे को लेकर कहा था कि वह इसके लिए हवाई हमले करने का अभियान चलाएंगे और चलाया भी। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आईएस हवाई हमलों के बाद से और खतननाक तरीकों से अपने विरोधियों से लोहा ले रहा है।
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लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आईएस की रक्षा रणनीति क्या है? आइए जानते हैं बीबीसी के विश्लेषक बिल लॉ के विश्लेषण में कि क्यों अभी तक आईएस युद्ध के मैदान में टिका हुआ है।

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ये इन तीन जगहें हैं आईएस का गढ़

The military strategy behind IS conquests

इस्लामिक स्टेट की इस्‍थापना के ऐलान के पहले आईएस के सरगना ने अपनी विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने के लिए एक नवंबर 2014 में दबिक़ नाम की पत्रिका शुरू की थी। इस पत्रिका में छपने वाले प्रोपेगंडा और विचारों के साथ आईएस ने शहर रक्का को अपने गढ़ के रूप में तैयार किया।

रक्का के विचारों को व्यवहारिक बनाने के बाद आईएस ने इराक की राजधानी मोसुल में भी अपना गढ़ तैयार किया। इसके बाद अपनी इसी रणनीति को सीरिया के एक और शहर पल्माइरा में लागू कर वहां पर अपने समर्थक और लड़ाके तैयार किए।

वाशिंगटन स्थित अमेरिकी ‌थिंक टैंक की संस्‍था इंस्टीट्यूट फॉर द वार स्टडी ने आईएसआईएस की युद्ध रणनीति का अध्ययन किया है। इस अध्ययन के जरिए बताया गया है कि आईएस किस प्रकार से तीन केन्द्रों के जरिए सीरिया और इराक में फैला है और वहां के लोगों में अपनी पकड़ बनाए हुए है।

इन तीनों केन्द्रों में है तीन स्‍तरीय रणनीति

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अमेरिकी संस्‍था के अध्ययन में बताया गया है कि जो शहर आईएस के प्रमुख गढ़ हैं वो इराक और सीरिया के आंतरिग भूभाग में के उसे इलाके में हैं जिनसे मध्य पूर्व एशिया और उत्‍तरी अफ्रीका तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां की इन स्‍थानों से यूरोप और अमेरिका में दाखिल होने में भी आसानी है।

बीबीसी के अनुसार, आईएसआई का प्रत्येक केन्द्र तीन स्‍तरीय रणनीति से घिरा हुआ है। आईएस की रणनीति का पहला स्तर पारंपरिक युद्ध या विनाशक हथियारों से लड़े जाने वाले युद्ध का है। दूसरा स्तर गुरिल्ला युद्ध या छद्म युद्ध का है। इस युद्ध दुश्मन पर छुपकर वार किया जाता है। आईएस रणनीति का तीसरा स्तर है आतंकी हमलों का। इस स्तर में आईएस के लड़ाके बिना किसी सूचना और संभावना के अचानक अपने ना चाहने वालों पर हमला कर देते हैं।

बताया जा रहा है कि सीरिया और ईरान के आंतरिक हिस्सों में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए आईएस तीनों स्तर के युद्ध का इस्तेमाल कर रहा है। शोध में यह भी कहा गया है जिन आतंकियों का कोई संगठन नहीं या अकेले पड़ चुके हैं वही छुपकर ऑस्ट्रलिया और कनाडा में जैसे देशों में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

चौथी है 'बेल्ट रणनीति'

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इस रणनीति के तहत आईएस ऐसे वाहन और हथियार तैयार करता है जिन्हें कहीं ले जाकर विस्फोट से उड़ाया जा सके। जिहादियों द्वारा पहने जाने वाला सुसाइड बेल्ट इसी रणनीति का हिस्सा है।

बेल्ट रणनीति में छोटे वाहनों हल्के हथ‌ियारों और लड़कों के जूते में भी विस्फोटक लगाया जाता है। खास बात यह भी है कि बड़े शहररों और सुन्नी बहुल इलाकों में यह रणनीति काफी ज्यादा अपनाई जाती है।


इस रणनीति का इस्तेमाल उन इलाकों में ज्यादा किया जाता हैं जहां रोड और ट्रासपोर्ट कनेक्टिविटी ज्यादा होती है। खासकर, छोटे कस्‍ओं शहरों आदि में। आईएस ने इसी रणनीति को अपनाकर कई इलाकों में अपना खौफ या कहें तो पैठ बना रखी है।
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