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फेसबुक पर 'बलात्कार' की धमकी, मुकदमा दर्ज

Thu, 31 Jul 2014 01:10 PM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 01:10 PM IST
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The Facebook 'rape' threat

क्या समाज में वैज्ञानिक चेतना के विकास की बात करने वाली महिला का इलाज़ 'बलात्कार' हो सकता है?

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लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पहचान के साथ अख़बारों में कॉलम लिखने वाले एक व्यक्ति ने कुछ इसी तरह के सुझाव दिए हैं। कर्नाटक के कुछ ज़िलों के पुलिस थानों में वीआर भट के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। अपनी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल में भट ने ख़ुद को गीतकार, वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ, कॉरपोरेट मामलों के प्रशिक्षक और सलाहकार बताया है।

समाज के वंचित तबके के लिए काम करने वाले और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के सदस्य प्रभा एन. वेलाबांग्ला कहती हैं, ''अपने विचार व्यक्त करने वालों को धमकाने का यह उनका तरीका है।संविधान ने हमें बोलने का अधिकार दिया है, इसलिए हमें दूसरों के विचारों का सम्मान करने की ज़रूरत है। लेकिन वो अब एक समानांतर व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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'अपनी मानवता को आग लगा दीजिए'

The Facebook 'rape' threat

प्रभा ने अपने फ़ेसबुक पेज पर हर चीज के बारे में लिखा है, वैज्ञानिक शोधों से लेकर मंत्रियों के कुर्सियों पर काबिज़ होने तक और पुजारियों की मज़बूत पकड़ को लेकर भी, जो कहते हैं कि हर चीज के लिए अग्नि की पूजा ज़रूरी है। वो लिखती हैं, ''जब मैं इन चीजों को देखती हूँ तो उदास हो जाती हूँ. वैज्ञानिक चेतना को मान्यता कब मिलेगी।''

उनके इस स्टेटस पर भट की टिप्पणी थी, ''आदरणीय कार्यकर्ता जी, आप अपनी मानवता को आग लगा दीजिए। आप सनातन धर्म (हिंदू) के बारे में क्या जानती हैं। आपने या आप जैसी मानसिकता वाले कितने लोगों ने 'येदगी बिद्दा अक्षरा' पढ़ा है।

आप जैसे लोग सच नहीं जानते हैं। आपको क्या लगता है कि आप जो कह रही हैं, वह सही है। आप जैसी महिलाओं के सिर के बाल पकड़कर बलात्कारियों को आपका बलात्कार करना चाहिए। यही एक समाधान है।''

संघ का इनकार

The Facebook 'rape' threat

'येदगी बिद्दा अक्षरा' नाम की जिस किताब का संदर्भ भट ने अपनी टिप्पणी में दिया है, वह देवानूर महादेवा के लिखे निबंधों का संग्रह है। महादेवा एक प्रशंसित और सम्मानित दलित लेखक हैं। उनकी यह किताब पिछले साल प्रकाशित हुई थी। देश में जातीय भेदभाव को लेकर दिखाई गई संवेदना और मानवतावादी दृष्टिकोण को लेकर किताब की काफी तारीफ हुई थी।

कन्नड साप्ताहिक 'लंकेश पत्रिका' की संपादक गौरी लंकेश कहती हैं, ''भट महिलाओं और दलितों का संदर्भ नीचा दिखाने के लिए दे रहे हैं। इस किताब की मूल भावना यह है कि एक बार अगर किसी व्यक्ति के हृदय में ज्ञान का बीज डाल दिया गया तो एक दिन उस पर फल ज़रूर आएंगे। भट जैसे लोग महिलाओं और दलितों के विचार को स्वीकार करने लायक नहीं हो सकते हैं।''

अपनी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए भट उपलब्ध नहीं हुए। लेकिन एक बयान में आरएसएस ने भट से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया।

आरएसएस ने कहा है, '' इस व्यक्ति की आरएसएस में कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। उनके बयान का आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं है। आरएसएस इस तरह के ग़ैरजिम्मेदार और सामाजिक रूप से अमान्य टिप्पणियों का समर्थन नहीं करता है। इस विवाद से आरएसएस का कोई लेना-देना नहीं है।''

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