इस शख्स ने खुद तय की मौत की तारीख, आखिरी दिन 19 अक्टूबर
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बीते 9 महीनों में जिंदगी ने इस शख्स को इतने सितम दिए कि इसने मायूस होकर खुद अपनी मौत की तारीख तय कर ली। तारीख 19 अक्टूबर 2015। इस तारीख का सूरज लंदन के इस 57 वर्षीय कारोबारी साइमन बिनर की जिंदगी में आखिरी दफा दस्तक देगा।
जीते-जी मौत के उस भयानक मंजर की कल्पना करते हुए कुछ और वक्त इस शख्स की जिंदगी में कैसे गुजरेगा, ये सोचकर कर ही दिल सहम जाता है और रौंगटे खड़े हो जाते है। लेकिन साइमन के घरवालों से पूछिए कि उन पर क्या बीत रही होगी। खैर, अब जो हो साइमन ने आखिरी फैसला कर लिया है।
डेलीमेल की खबर के मुताबिक साइमन को बीती जनवरी में जानलेवा मोटर न्यूरॉन बीमारी ने घेर लिया था। इस जानलेवा बीमारी को शॉर्ट में एमएनडी कहते हैं। इस बीमारी ने साइमन को इतना बेहाल कर दिया कि उसने तिल-तिल कर मरने से एक बार में ही मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
खुद तैयार किया मौत का चार्ट
गम और अफसोस के इस मंजर से पहले साइमन बेहद खुशगवार जिंदगी बिता रहा था। साइमन की पत्नी, जो कि स्काई न्यूज की एंकर रह चुकी हैं, बताती हैं कि साइमन को एडवेंचरस गेम पसंद थे, जवानी के दिनों नें साइमन ने स्कीइंग और माउंटेन बाइकिंग में खूब हाथ आजमाए। लेकिन बदकिस्मति की इंतेहा देखिए कि अब साइमन बात करने और खुद के नाखून तक काटने को मजबूर है।
मायूसियों के मजमे से आजिज आकर आखिरकार एक दिन अपने दोस्त से साइमन ने असिस्टिड सुसाइड के लिए सलाह-मश्विरा किया और अपनी मौत का चार्ट तैयार कर लिया।
असिस्टिड सुसाइड एक प्रकार से मददगार के द्वारा दी गई इच्छा मृत्यु को कहते हैं। अपनी असिस्टिड सुसाइड की जानकारी साइमन मे सोशल साइट लिंक्डइन पर साझा की है।
साइमन ने फेसबुक पर कुछ तस्वीरों और वीडियो में अपनी खुशगवार जिंदगी के उन पलों को संजोने की कोशिश की है। जिसे उसने अपने परिवार के साथ बिताया है।
साइमन ने मौत के लिए स्विटरजरलैंड का एटरनल स्प्रिट अस्पताल चुना है। इसके बाद आगामी 13 नंवबर, दिन शुक्रवार को उसे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
'काश इस क्रिसमस तक जिंदा रह पाता'
साइमन आने वाले क्रिसमस को परिवार के साथ नहीं मना पाने का मलाल है। साइमन की मानें तो इस क्रिसमस तक वो जिंदा नहीं रह पाएगा तो इसकी वजह ब्रिटेन का बेहूदा कानून है जो असिस्टिड सुसाइड की इजाजत नहीं देता, जिसकी वजह से उसे स्विटजरलैंड जाकर मरना तय करना पड़ा। नहीं तो, कम से कम इस क्रिसमस को वो आखिरी बार अपने परिवार के होता।
साइमन ने लंबे अर्से तक लंदन में असिस्टिड सुसाइड को जायज ठहराने को लेकर कानून बनाने की मुहिम चलाई है।
वहीं इस मामले में लंदन की पुलिस का कहना है कि अगर कोई बिना किसी दबाव के बाहर जाकर मरना पसंद करता है तो उसे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
साइमन ने कैब्रिज से स्नातक करके साल 2012 तक आईटी इंडस्ट्री में जॉब की। साइमन केयरमार्क सटन में बतौर डायरेक्टर रहे। इस कंपनी में साइमन अपनी बेटी और पत्नी के साथ काम करते रहे हैं। साइमन ने लिंक्डइन पर साझा की गई जानकारी में कहा है कि उन्होंने अपनी बेटी हनाह को अपने काम की जिम्मेदारी सौपी है, जिसे वो फिलहाल एक नॉन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर संभालेगी।
इससे पहले भी साइमन के परिवार को सदमे से तब गुजरना पड़ा था जब साइमन की 18 वर्षीय सौतेली बेटी की कैंसर से मौत हो गई थी। लेकिन बार साइमन की 85 वर्षीय मां पर क्या बीतेगी जब अपने लाड़ले को आंखों से सामने मरता देखेंगी।