आसाराम केसः गवाह कृपाल की हत्या में साजिशकर्ता ने कबूला जुर्म
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शाहजहांपुर में आसाराम दुष्कर्म प्रकरण के गवाह कृपाल सिंह की हत्या के मामले में पूछताछ को जोधपुर से बुलाए गए नारायण पांडेय ही साजिशकर्ता निकला। ना-ना करते हुए शुक्रवार को पूरी तरह टूट गया।
नारायण ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने किसी और से कृपाल सिंह पर अपने सामने गोली चलवाई थी। इसके बाद पुलिस ने नारायण को हिरासत में दिखाते हुए उसके बयान दर्ज करना शुरू कर दिए।
शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा, तभी पुलिस पूरे मामले का खुलासा करने की बात कह रही है। नारायण का नाम पहले तब सामने आया था, जब बिटिया के घर रेकी करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया था। यह तथ्य जानने के बाद ही पुलिस ने उस पर हाथ डाला था।
जोधपुर पुलिस की मदद से पकड़ा गया आरोपी
शहर के रहने वाले कृपाल सिंह पर दस जुलाई को हमला किया गया था। इस घटना का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। जिन तीन लोगों के नाम शक के आधार पर कृपाल सिंह ने मृत्यु पूर्व बयान में लिये थे, उन तीनों की जहां पुलिस तलाश करती रही, वहीं अन्य संदिग्धों पर निगाह लगाए रखी।
खासतौर से निगाह में चढ़े नारायण को पुलिस ने पांच दिन पहले जोधपुर पुलिस की मदद से शाहजहांपुर बुलवाया। रणनीतिक तरीके से पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल के आधार पर घटना से पहले और बाद में उसकी हर लोकेशन और बातचीत का ब्योरा नारायण के सामने रखा गया। यह ब्योरा घटना में उसके शामिल होने की पोल खोलने वाला था।
सब कुछ साफ होता देखकर नारायण टूट गया। फिर उसने स्वीकारा किया कि घटना से पहले वह सात बार शाहजहांपुर आया था और कृपाल को दबाव में लेने की कोशिश की थी। कृपाल सिंह नहीं माना तो उसे मिटाने की योजना बनी। नारायण ने बताया है कि गोली किसी और ने मारी लेकिन मरवाने वाला वही था।
बिटिया के साथ रेकी करने आया था नारायण
सूत्रों के मुताबिक साफ हुआ है कि पहले भी दिसंबर में नारायण ही बिटिया के घर रेकी करने साथी संग आया था, तब उसे गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वह बाद में जमानत पर छूट गया था। अब तक की जांच में नारायण पांडेय के बारे में पुलिस को पता चला है कि कृपाल सिंह पर हमले वाले दिन 10 जुलाई की सुबह वह जोधपुर में था।
वहां से दिल्ली आया और फिर शाहजहांपुर। यहां वह गर्रा नदी किनारे स्थित आसाराम के रुद्रपुर आश्रम गया और वहां से निकलकर इसने सायं पांच बजे के करीब अपनी निगरानी में कृपाल को गोली मरवाई। उसके बाद नारायण ने करीब तीन घंटे अपना मोबाइल फोन बंद रखा। गोली मारे जाने के पहले नारायण तीन बार संजय नाम के उस शख्स से बातचीत हुई जो आसाराम के लिए ऐसी करतूतों को अंजाम देने का कमान संभाले हुए है।
पुलिस सूत्रों से मिले ब्योरे के अनुसार, कृपाल को गोली मारने के बाद नारायण कानपुर में सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा। वहीं नारायण ने मोबाइल फोन दोबारा चालू किया। कानपुर से वह जोधपुर चला गया था।
कृपाल के कत्ल की गुत्थी सुलझाने के क्रम में पुलिस घटना के तुरंत बाद ही इसके काफी करीब पहुंच गई थी लेकिन पर्याप्त पुख्ता साक्ष्य न होने पर इस पर हाथ नहीं डाल रही थी। सूत्रों ने बताया कि साक्ष्यों का प्रमाणिकता सत्यापित होने के बाद जोधपुर पुलिस की मदद ली गई और गत पांच दिनों से इसे यहां बातचीत कर हर बिंदु का मिलान किया जा रहा था।