{"_id":"f34b7016c972f07f6a889821d1cf5fde","slug":"supreme-court-stop-hanging-of-shabnam","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेमी संग परिवार को काटने वाली शबनम की फांसी पर रोक","category":{"title":"Crime Archives","title_hn":"क्राइम आर्काइव","slug":"crime-archives"}}
प्रेमी संग परिवार को काटने वाली शबनम की फांसी पर रोक
मुरादाबाद/ब्यूरो
Updated Thu, 29 Aug 2013 03:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
14/15 अप्रैल 2008 की स्याह रात को घर में ही अपने पूरे परिवार को प्रेमी की मदद से मौत की नींद सुलाने वाली शबनम सुप्रीम कोर्ट द्वारा फांसी पर स्टे लगाए जाने से खुश है।
विज्ञापन
शबनम ने बुधवार को जेल में अपने बेटे ताज मोहम्मद और साथी महिला बंदियों के साथ इस खुशी को बांटा।
सुप्रीम कोर्ट से फांसी पर स्टे के बाद शबनम ने एक बार फिर खुद को बेकसूर बताते हुए उम्मीद जताई है कि उसे बरी कर दिया जाएगा।
हसनपुर से सटे बावनखेड़ी गांव में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने मां, पिता, दो भाइयों, भाभी, आठ माह के भतीजे और ममेरी बहन की कुल्हाड़ी से गला काटकर हत्या कर दी थी।
विज्ञापन
उसका मकसद पूरे परिवार को खत्म कर प्रेमी के साथ निकाह करने और पिता की संपत्ति को हड़पने का था। इस मामले में सेशन कोर्ट से शबनम और सलीम को फांसी की सजा का आदेश हुआ था।
विज्ञापन
खूनी प्रेमी युगल ने फांसी के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा था। तेईस अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने शबनम और सलीम की याचिका पर सुनवाई शुरू करते हुए उनकी फांसी पर सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी है।
बुधवार को यह खबर शबनम को जेल अधिकारियों ने दी तो वह खुशी से झूम उठी। हालांकि अचानक ही उसका चेहरा फिर सुर्ख हो गया। क्योंकि गांव के स्कूल में शिक्षामित्र रही शबनम को इस बात का अहसास है कि ताजा स्टे एक रूटीन कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
उसकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रहने तक उसे फांसी नहीं दी जा सकती है। बहरहाल उसे उम्मीद है कि बेटा ताज उसे फांसी से बचा लेगा। वो उसे जेल से रिहाई के बाद पढ़ा लिखाकर बड़ा अफसर बनते देखना चाहती है।