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वो महिला, जिसे केरोसिन डालकर जिंदा जलाया गया
Updated Wed, 18 Sep 2013 11:29 AM IST
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कुछ पल किस तरह जीवन में उलटफेर कर डालते हैं, ये बात शायद चिली की कार्मेन क्विंटाना बहुत बेहतर ढंग से जानती हैं।
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चिली में करीब 40 साल पहले जनरल अगस्टो पिनोशे ने सत्ता संभाली। उनके 17 साल के शासन में हज़ारों लोगों को इस दौरान हजारों लोगों को यातनाएं दी गई या मार डाला गया।
एक महिला जिसे केरोसिन डालकर जलाने की कोशिश की गई, बच गई और उसने सुनाई अपनी कहानी।
कार्मेन क्विंटाना के ज़हन में 27 साल पहले के उस दिन की एक तस्वीर आज भी ताज़ा है।
जब सैनिकों ने एक सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान चिली के अन्य दूसरे छात्रों के साथ उन पर हमला बोल कर आग लगा दी थी।
कार्मेन उस हादसे को याद करते हुए बताती हैं, "मैंने नीचे देखा तो पाया की मेरे हाथों में कालिख लगी थी और कपड़े जल रहे थे। अचानक मैंने अपने आपको आग में लिपटा पाया।"
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ये चिली में अगस्टो पिनोशे के शासन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पहला दिन था।
तब 18 साल की कार्मेन घने काले बालों वाली गंभीर युवती हुआ करती थीं, वो पिनोशे सरकार का विरोध करने वाले वामपंथी परिवार की सदस्य थीं।
वो बहुत कम उम्र से ही अपने माता-पिता के साथ सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने लगी थी। जहां उन्होंने देखा कि पिनोशे सरकार की अत्याचारी पुलिस किस तरह दमन करती है।
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परिवार का समर्थन
एक ओर जहां आयोजकों ने इसे बड़े विरोध प्रदर्शन की शक्ल देने की ठान रखी थी, कार्मेन ने अपने विश्वविद्यालय में रैली के लिए समर्थन जुटाने में मदद की।
जुलाई की उस सुबह कार्मेन अपने साथियों के साथ राजधानी सैंटियागो के केंद्र में भीड़ के साथ जुड़ने पहुंच रही थी, किसी को अंदाज़ा नहीं था कि उस दिन के प्रदर्शन कुछ अलग होने वाले हैं।
कनाडा के मॉन्ट्रियल स्थित अपने घर से बीबीसी संवाददाता से काफी धीमे, संभलते और उस हादसे का हर पल याद करते हुए कार्मेन ने कहा कि इस घटना ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से झकझोर कर रख दिया। कार्मेन ने पिछले तीन दशक पहले यहां शरण ली थी।
45 वर्षीय कार्मेन इस समय विवाहित हैं और तीन बेटियों की मां हैं। लेकिन आज भी वह उस हादसे को याद करती हैं, तो सिहर उठती हैं।
हादसे का एक बार फिर से जिक्र करते हुए कार्मेन ने बताया कि इसके बाद वह और स्टूडेंट्स का एक समूह संतयागो से होकर गुजरने वाले एक मुख्य रास्ते एविंडा जनरल वेलास्कीव्ज जा पहुंचा।
जहां अन्य प्रदर्शनकारी पुराने टायरों से पुलिस बैरीकेट हटाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ लोगों ने हमें भी इसमें मदद करने के लिए कहा।
तभी सैनिकों से भरी सेना की एक जीप वहां पहुंची। सैनिकों के चेहरे पुते हुए थे और उन्होंने रक्षक कवच पहन रखे थे।
पुलिस का अत्याचार
उन्हें देखते ही प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में तितर-बितर हो गए। सैनिक जीप से उतरे और उन्हें खदेड़ने लगे।
सारे प्रदर्शनकारी भाग निकले, पर कार्मेन और उसका एक 19 वर्षीय साथी रोड्रिगो डेनेग्री सैनिको की गिरफ्त में आ गए।
कार्मेन ने कहा कि सैनिकों ने पहले उसके साथी को पकड़ा और सड़क पर फेंक कर ठोकरे मारने लगे। वह मुझे दीवार से सटा कर तलाशी लेने लगे।
उस समय मैं अपने साथी को देख पा रही थी, उसके खून निकल रहा था। सैनिकों ने मुझसे पूछा की हम लोग वहां क्या कर रहे थे और कहां जा रहे थे।
"मैंने जवाब दिया कि हम यूनिवर्सिटी पढ़ने जा रहे हैं। सैनिकों ने मेरे साथ गाली गलौज की और मुझे मशीनगन की बट से मारा। मुझे रोना छूट गया"।
इसके बाद सैनिकों का एक और समूह आया, जिसके पास कुछ टायर और कैरोसिन की बोतलें हैं। एक सैनिक ने कहा कि तुम लोग यही सब कर रहे थे न ?
इसके बाद एक सैनिक ने कैरोसिन की बोतल ली और कार्मेन पर डाल दी। कार्मेन सिर से लेकर पैर तक कैरोसिन से भीग गई थी। इसके बाद उसके साथी को भी कैरोसिन से भीगो डाला।
कार्मेन ने कहा कि इस समय ऐसा लगा मानो किसी पौधे को पानी डाला जा रहा हो।
कार्मेन ने एकाएक रूआंसी और दबे स्वर में कहा कि उसे लगा कि वह सैनिक केवल उनका मजाक उड़ा रहा है और जल्द ही उन्हें छोड़ देगा।
कार्मेन अपने आपसे से कहने लगी कि वह घर जाएगी और आगे कभी भी ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेगी। पर अचानक एक सैनिक ने कुछ ज्वलनशील पदार्थ हमारी ओर फेंका। उसमें विस्फोट हुआ।
वह और रोड्रिगो अचानक मानव टॉर्च में तब्दील हो गए। अचानक कार्मेन के बालों और कपड़ों को आग मे घेर लिया। जिसके बाद वह जमीन पर लेट गई और आग बुझाने की कोशिश में जुट गई।
उसने देखा की रोड्रिगो भी अपने आपको को बचाने की कोशिश कर रहा था। कार्मेन ने बताया की वह बेहोश होती उससे पहले किसी ने उसके ऊपर कम्बल फेंका और ट्रक में डाल दिया।
इसके करीब एक घंटे के बाद उसे जब होश आया तो उसने साथी के साथ अपने आपको हाईवे पर एक गढ्ढे में पाया। ऐसा लगा मानो हमें मरा जान कर छोड़ दिया गया हो। दोनों एक दूसरे से बात करने की स्थिति में भी नहीं थे, जबकि कुछ देर बाद ही पुलिस गश्ती दल वहां आ पहुंचा।
कार्मेन ने कहा कि रोड्रिगो ने मुझे चेताते हुए पुलिस को कुछ न बताने के लिए कहा। कार्मेन ने कहा "मुझे इतना गुस्सा और दर्द हो रहा था कि मैंने पुलिस वाले को कहा कि वह उसे गोली मार दे"।
इसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, उसके शरीर का दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह जल चुका था। वह कई हफ्तों तक कोमा में रही, जबकि रोड्रिगो की अस्पताल पहुंचने के चार दिन बाद मौत हो गई। इस पर फिर राजनीति हुई और देश कई भारी प्रदर्शन हुए।
चिली से कनाडा आने के बाद कार्मेन के करीब चालीस ऑपरेशन हुए। पिनोशे की सरकार का विरोध जताते हुए कार्मेन ने यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई दौरे किए।