महिलाओं के जाल में कैसे फंसते हैं जवान?
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फिर एक नया जासूसी कांड सुर्खियों में है। इस बार इसका शिकार है आंध्र प्रदेश के सब एरिया स्थित ईएमई यूनिट में काम कर रहा नायब सूबेदार पतन कुमार पोद्दार।
आंध्र प्रदेश में पाकिस्तानी महिला जासूस के जाल में फंसे एक नायब सूबेदार की गिरफ्तारी बताती है कि अब भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। तकरीबन एक साल पहले पोद्दार की दोस्ती फेसबुक पर एक महिला से हुई थी, जिसने अपना नाम अनुष्का अग्रवाल बताया था।
उसने उस महिला से कुछ संवेदनशील जानकारियां साझा कीं। पता चला कि वह महिला पाकिस्तानी थी। सेना की 151 एमसी/एमएफ डिटैचमेंट में सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर तैनात 40 साल के नायब सुबेदार पाटन कुमार पोद्दार फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है।
उसकी सुंदरता पर कुर्बान हो गया अफसर
एक और दृश्य प्रस्तुत है : स्कॉच अद्भुत थी, संगीत सुमधुर और लेफ्टिनेंट कर्नल की बांहों में नृत्य कर रही महिला काफी आकर्षक। इससे ज्यादा किसी को और क्या चाहिए? और फिर जब उसने पार्टी के खत्म होने पर उसके साथ एक जाम पीने की हामी भर दी, तो फौजी अफसर की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
और फिर जब जाम एक से चार हो गए, फिर भी उसने घर लौटने की जल्दी नहीं की, तो अफसर का खुद को सातवें आसमान पर महसूस करना लाजिमी था। फिर ऐसा बार-बार और कई बार कई-कई दिनों तक होता रहा। आखिरकार अफसर उसकी सुंदरता पर कुर्बान हो गया।
यह सब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हो रहा था। भारतीय सेना की एक इन्फैंट्री यूनिट का यह अफसर गर्मियों में मिलिटरी एकेडेमी का एक कोर्स करने के लिए ढाका गया था। एक दिन एक अजनबी उससे मिलने आया और उसने उसे एक वीडियो दिखाया।
आईएसआई ने उसे फंसा लिया अपने जाल में
अफसर आंखें फाड़-फाड़कर खुद को उस महिला के साथ विभिन्न आयामों में देखता रहा। तब जाकर उसे महसूस हुआ कि पाकिस्तान की दुर्दांत खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसे अपने जाल में फंसा लिया है। तुरंत ही वे उस पर उनका एजेंट बनने के लिए दबाव डालने लगे।
जब दबाव उसके बर्दाश्त की हद से बाहर हो गया, तो उसने यह बात बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायुक्त को बता दी। उच्चायुक्त ने उसे तुरंत वहां से रवाना कर दिया। सेना के आला अधिकारियों ने उससे गहरी पूछताछ की, फिर उसके खिलाफ जांच बिठा दी।
यह पहली बार नहीं हुआ है, जब कोई भारतीय अधिकारी दुश्मन के खेमे की किसी सुंदरी के रूप जाल में फंसा हो। नौसेना के कमोडोर सुखजिंदर सिंह 2009 में इस तरह से फंसाए जाने के एक और उदाहरण हैं।
महिला के साथ अंतरंग स्थिति में थे वह
भारत ने रूस से 2004 में एडमिरल गोर्शकोव एयरक्राफ्ट कॅरियर खरीदा था और सुखजिंदर सिंह 2005 से 2008 तक उसकी मरम्मत और दोबारा फिटिंग के लिए पॉइंट्समैन की हैसियत से मॉस्को भेजे गए थे। वहां एक रूसी महिला से उनकी दोस्ती हो गई।
एक दिन उन्हें एक फोटो मिला, जिसमें वह उस महिला के साथ अंतरंग स्थिति में थे। इस बीच रूसियों ने एयरक्राफ्ट कॅरियर की कीमत 2007 में 97.40 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 2009 में 240 करोड़ डॉलर कर दी। जब उक्त फोटो का पता चला, तब भारतीय पॉइंट्समैन की संलिप्तता उजागर हुई।
अंतत: भारत सरकार को फरवरी, 2010 में 240 करोड़ डॉलर का भुगतान करने हेतु सहमत होना पड़ा। बाद में नेवी के कोर्ट मार्शल में सुखजिंदर को दोषी पाया गया। उन्हें इस कारण नौकरी से बिना पेंशन का लाभ दिए निकाल दिया गया।
सेक्स को बतौर चारा इस्तेमाल किया जाता है
रूपजाल में शिकार को फांस कर ब्लैकमेलिंग के जरिये अपने लिए काम करने हेतु मजबूर करने की इस प्रक्रिया को हनीट्रैप कहा जाता है। मजेदार बात यह है कि इस तरह की घटनाएं लिंगभेद तक सीमित नहीं हैं।
माताहारी से लेकर माधुरी गुप्ता तक इतिहास महिलाओं द्वारा सेक्स को बतौर चारा इस्तेमाल करने का गवाह है। लेकिन कुछ उदाहरणों से पता चलता है कि महिलाएं भी हनीट्रैप में फंसती हैं। इस सिलसिले में इस्लामाबाद में पदस्थ रहीं भारतीय राजनयिक माधुरी गुप्ता का मामला अनूठा है।
इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में बहैसियत प्रेस और सूचना प्रकोष्ठ में सेकंड सेक्रेटरी इस 53 वर्षीय अविवाहिता को रॉ ने भारत वापस बुलाकर देश के खिलाफ जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
लटके-झटके दिखाकर फांसती हैं अपने शिकार को
उनकी गिरफ्तारी ने महिला जासूसों से जुड़ी इस धारणा को ही खंडित कर दिया कि वे नायिकाओं की तरह लटके-झटके दिखाकर अपने शिकार को फांसती हैं। खोजबीन से पता चला था कि माधुरी का अपने पाकिस्तानी हैंडलर मुदस्सर राणा के साथ अफेयर चल रहा था, जिससे वह जानकारियां बांटती थीं।
भारत में रूपजाल में फांसने का सबसे पुराना मामला भी काफी दिलचस्प है। जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे, तब एक भारतीय राजनयिक मॉस्को में एक रूसी महिला पर रीझ गया था। जब रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी ने उक्त राजनयिक के महिला के साथ फोटो जारी किए, तो नेहरू ने उन्हें हंसी में उड़ा दिया और उस युवा राजनयिक को भविष्य में सावधान रहने की ताकीद की।
पर बाद में हालात बदल गए। मई, 2008 में बीजिंग में पदस्थ रॉ के एक वरिष्ठ अधिकारी मनमोहन शर्मा को वापस दिल्ली इसलिए बुला लिया गया, क्योंकि वह एक चीनी महिला के रूपजाल में फंस गए थे।
अमेरिकी एयर होस्टेस के साथ अंतरंग होने का आरोप
अक्तूबर, 2007 में रॉ के एक अन्य अधिकारी रवि नायर को हांगकांग से वापस बुला लिया गया था, क्योंकि चीनी जासूसी एजेंसी में साथ काम कर रही एक लड़की से उनकी दोस्ती काफी गहरी हो गई थी।
उससे कुछ वर्ष पहले रॉ के ही एक अन्य अधिकारी केवी उन्नीकृष्णन पर एक अमेरिकी एयर होस्टेस के साथ अंतरंग होने के आरोप में मुकदमा चला और इसी के चलते उन्हें सजा भी हुई थी। वह एयर होस्टेस सीआईए की एजेंट थी।
उन्नीकृष्णन तब चेन्नई में पदस्थ थे और लिट्टे पर नजर रखे हुए थे। 1987 में उन्हें संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जाहिर है, यह सिलसिला काफी पुराना है।