शकील क्यों बन गया छोटा राजन की जान का दुश्मन, पढ़ें पूरी कहानी
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छोटा शकील की अपने पुराने दुश्मन छोटा राजन को मरवाने की साजिश फिर से नाकाम हो गई। शकील ने इस साल के शुरूआत में राजन के करीबी से मिलकर ऑस्ट्रेलिया में उसे मरवाने का प्लान बनाया था लेकिन आखिर में राजन को इसका पता चल गया और वह फिर बच गया।
उसके 'फाइनल प्लान' पर भी राजन ने पानी फेर दिया। छोटा शकील और राजन की दुश्मनी सालों पुरानी है। शकील ने दाउद के कहने पर राजन को मरवाने की पहले भी कोशिश की है लेकिन वह भी नाकामयाब रही। आगे की स्लाइड्स में जानिए दाउद, राजन और शकील के रिश्तों की पूरी सच्चाई।
कभी थे दोस्त, अब हैं जानी दुश्मन
दाउद इब्राहिम, छोटा राजन और छोटा शकील अंडरवर्ल्ड के ऐसे नाम हैं जिनके इशारों पर पूरा काला धंधा चलता था। दाउद ने जहां अपनी पहचान सबसे खतरनाक डॉन के रूप में बनाई तो वहीं छोटा राजन उसका दायां हाथ बन कर सामने आया।
दाउद और राजन के रिश्ते इतने पक्के थे कि दुनिया उनकी ताकत से थरथर कांपती थी। लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी हुईं कि इन दोनों के बीच गहरी खाई ने जन्म ले लिया। ऐसी खाई जो आज तक नहीं पट पाई है और इसी कारण शकील और राजन भी एक दूसरे के जानी दुश्मन बन बैठे।
ऐसे हुई दाउद और छोटा राजन की दोस्ती
मुंबई का छोटा राजन यानी राजेंद्र सदाशिव निखलजे बचपन में ही दादागिरी में शामिल हो चुका था। छोटा राजन वास्तव में बड़ा राजन यानी राजन नायर के लिए टिकटें ब्लैक करने का काम किया करता था। राजेंद्र की दिलेरी राजन को ऐसी भाई कि उसने उसे अपना करीबी बना लिया और सोने की तस्करी के धंधे से जोड़ लिया। इसी के साथ राजेंद्र को 'छोटा राजन' कहा जाने लगा।
80 के दशक तक छोटा राजन सुपारी लेकर खून करने के धंधे में माहिर हो चुका था। बड़ा रजन ने भी जब दाउद के साथ मिल कर पठानों के खिलाफ जिहाद छेड़ा तो उसका भी खत्मा हो गया। ऐसे में छोटे राजन को जरूरत पड़ी एक ताकतवर सहारे की और तब दाउद ने उसे अपना कंधा दिया।
यही नहीं, दाउद ने बहुत पहले ही छोटा राजन की प्रेमिका सुजाता को अपनी मुंह बोली बहन बना लिया था। इस कारण उन दोनों के बीच भावात्मक रिश्ते भी बन गए।
दाउद ने आपस में भिड़वा दिए अपने आदमी
1988 में दाउद को पुलिस के दबाव के कारण मुंबई छोड़ दुबई भागना पड़ा और वहीं उसने ठिकाना बनाया। मुंबई की सारी कमान वह छोटा राजन के हाथ में सौंप कर चला गया। इस दौरान अरुण गवली और उसका गिरोह भी मुंबई में पैर पसार रहा था और दाउद के साथ राजन की जान का भी दुश्मन बन गया था।
1992 तक आते आते दाउद और छोटा राजन के रिश्तों में भी दरार आने लगी। ऐसा तब हुआ जब दाउद को यह डर सताने लगा कि कहीं उसके गुर्गे उससे ज्यादा ताकतवर न हो जाएं, इसलिए उसने उनको आपस में ही भिड़वा दिया।
उसने मुंबई में शिवसेना पार्षद खीम बहादुर थापा की हत्या करवा दी जबकि थापा राजन का करीबी था। ऐसे ही एक बार और दाउद के कहने पर शूटरों ने राजन के करीबी तैय्यब भाई को भी मरवा दिया। इन सब से परेशान छोटा राजन खुद दाउद से मिलने दुबई पहुंच गया।
दाउद ने पहुंचाया छोटा राजन के करीबियों को नुकसान
कारण पूछने पर दाउद ने जवाब दिया कि तैय्यब की लापरवाही के कारण सोने से लदे दो जहाज पकड़े गए। दाउद ने राजन को दुबई में ही रह कर उसके साथ कारोबार संभालने का ऑफर दिया लेकिन राजन उसे ठुकरा कर मुंबई वापस आ गया।
भारत में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद दाउद पाकिस्तान की आईएसआई का करीबी बन गया और मुंबई में बम धमाकों की तैयारी करने लगा। ऐसे में उसके लिए जरूरी था कि मुंबई का कमांडर उसी के समुदाए का हो न कि राजन जैसा दूसरे समुदाए का डॉन।
धीरे धीरे दाउद ने राजन को किनारे कर अबू सलेम और मेमन बंधुओं को आगे कर दिया। राजन को समझ आने लगा कि कोई बड़ी साजिश चल रही है जिसके कारण उसे अलग किया जा रहा है। अपने साथियों की हत्याओं से बौखलाए राजन ने मौका मिलते ही दाउद के पांच आदमियों की हत्या करवा दी।
दाउद ने मुंबई में करवाए धमाके
1993 में दाउद ने आईएसआई के इशारों पर अबू सलेम, मेमन बंधुओं की मदद से मुंबई में कई धमाके करवाए जिसमें हजारों लोगों की जान गई। राजन इससे काफी गुस्सा गया। इस बीच पूरा अंडरवर्ल्ड सांप्रदायिक आधार पर बंट गया था।
छोटा राजन ने दाउद संग उसके साथियों को बर्बाद करने की कसम खा ली। माना जाता है कि छोटा राजन ने भापतीय खुफिया एजेंसी रॉ और आई बी को दाउद के बारे में जरूरी जानकारियां दे कर उसकी मदद भी की।
दो साल के अंदर राजन ने दाउद के 17 आदमियों को मरवा दिया। इन सभी के मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने की खबर थी। मुंबई धमाकों के बाद दाउद ने फिर से वहां अपना साम्राज्य बिठआने के लिए दूसरा कमांडर चुना जो कि था 'छोटा शकील'।
...और शकील-राजन बन गए दुश्मन
छोटा शकील दाउद का दायां हाथ था। लेकिन राजन और उसका गिरोह उस पर भी भारी पड़ रहा था। धीरे-धीरे राजन के आदमियों के हाथों अपने साथियों की हत्याओं से शकील भी तंग आ गया था।
उसने राजन का काम तमाम करने की ठान ली। लंबे समय तक राजन और दाउद के गिरोह के बीच मुंबई में तस्करी, जमीन और वेश्यावृत्ति के धंधे में अपनी ताकत दिखाने की जंग चलती रही।
एक बार और हो चुकी है राजन को मरवाने की कोशिश
थाई पुलिस ने तीन दिन के अंदर चार हमलावरों को पकड़ भी लिया। पूछताछ में सामने आया कि वे राजन को मारने के इरादे से गए थे। तब से लेकर आज तक छोटा राजन और दाउद के बीच एक दूसरे को खत्म करने की रंजिश चल ही रही है। इसी में छोटा शकील भी शामिल हो गया है जो अपने दुश्मन राजन को अपने रास्ते से हटाना चाहता है।
इसी के चलते शकील ने ऑस्ट्रेलिया में अपने 'फाइनल प्लान' के तहत फिर से राजन को मरवाने की कोशिश की। लेकिन राजन एक बार फिर बच निकला है।