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अफसरों से जुड़ी यौन उत्पीड़न की जानकारियां नहीं देगा केंद्र
दिल्ली
Updated Wed, 09 Oct 2013 08:32 AM IST
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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर आरटीआई के तहत यौन उत्पीड़न से जुड़ी जानकारियां देने से इनकार किया है। कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि अफसरों के खिलाफ दर्ज इन मामलों से जुड़ी जानकारियां खुलासे के दायरे में नहीं आतीं।
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दर्असल कार्मिक मंत्रालय से पिछले दस साल के दौरान अखिल भारतीय सेवा (आईएएस, आईपीएस और इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) के अफसरों के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामलों की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन कार्मिक मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के किसी एक्ट के प्रावधान के बजाय सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर इससे इनकार कर दिया।
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कार्मिक मंत्रालय ने इस सिलसिले में गिरीश देशपांडे बनाम केंद्रीय सूचना आयोग और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि जो जानकारी मांगी गई है वह खुलासे के दायरे से बाहर है।
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पिछले साल 3 अक्टूबर को देशपांडे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी कर्मचारियों को जारी मेमो की प्रतियों, कारण बताओ नोटिस और सजा के आदेश निजी जानकारियां हैं। यहां तक कि आयकर रिटर्न में जिक्र जानकारियां भी निजी मानी गई हैं।
इस तरह की जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस तरह की जानकारियां खुलासे के दायरे से बाहर हैं। हालांकि केंद्रीय सतर्कता आयोग कई मौकों पर कह चुका है कि यौन उत्पीड़न से जुड़ी जानकारियों को पारदर्शिता कानून के तहत सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
यौन उत्पीड़न के मामले मानवाधिकार उल्लंघन के दायरे में आते हैं। इस समय पूरे देश में 4,737 आईएएस, 3,637 आईपीएस और 2,700 आईएफओएस अधिकारी काम कर रहे हैं।