आखिर कौन था उन 5 वेश्याओं का हत्यारा?
वो महिलाओं को निशाना बनाता था। खासकर नशे में धुत वेश्याओं को। वह कहां से आता था और कहां गायब हो जाता था ये कोई नहीं जान सका। इस खूंखार अपराधी के कारनामों ने पूरी दुनिया को दहला दिया।
वर्ष 1988 में सबसे ज्यादा आतंक मचाने वाले इस ने एक के बाद एक पांच वेश्याओं का कत्ल किया और उनकी लाशों से हैवानियत की। उसने जिसे भी मारा उसके शरीर का कोई एक अंग गायब मिला।
मामलों की छानबीन कर रही पुलिस सिर्फ आशंकाएं ही जताती रही और अनुमान लगाया कि ये कातिल इंसानों की शारीरिक बनावट और अंदरूनी अंगों की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है।
हथियार से चीर दिया वेश्या का प्राइवेट पार्ट
दुनिया भर में चर्चित इस कुख्यात अपराधी का आतंक इंग्लैंड के व्हाइटचैपल शहर में बहुत ज्यादा रहा। पूर्वी इंग्लैंड में लगातार हुई हत्याओं में एक ही शख्स का हाथ होने की आशंका जताई जाती रही है। 3 अप्रैल 1888 से 13 फरवरी 1891 के बीच हुई 11 हत्याओं की जांच लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने शुरू की थी।
इन 11 हत्याओं में से 5 को पुख्ता माना गया कि यह किसी एक ही व्यक्ति का काम है। पुलिस ने इन सभी मामलों को मिलाने की कोशिश भी की लेकिन पांच मामलों के अलावा बाकियों में हत्या का तरीका अलग था।
व्हाइटचैपल में सामने आए पहले दो मामलों, जिनमें इम्मा एलिजाबेथ स्मिथ और मार्था तबराम की हत्या हुई था, को उन पांच मामलों से अलग रखा गया। 3 अप्रैल 1888 को लूट और यौन उत्पीड़न के बाद स्मिथ की हत्या की गई थी। मारने वाले ने उसके प्राइवेट पार्ट में कोई औजार डालकर उसे काटा था। उसकी मौत अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। मरने से पहले उसने बयान दिया था कि उस पर दो या तीन लोगों ने हमला किया था।
इसके बाद 7 अगस्त को तबराम की लाश मिली थी। उस पर चाकू से करीब 39 वार किए गए थे। उसकी हत्या भी 'जैक द रिपर' की शिकार पांच महिलाओं से अलग थी। तबराम को बुरी तरह चाकुओं से गोदा गया था जबकि रिपर ने हर बार अपने शिकार के गले और पेट को चीर कर हत्या की थी।
ये पांच वेश्याएं थीं उसका शिकार
जिन पांच महिलाओं की हत्या में 'जैक द रिपर' का हाथ होने का शक जाहिर किया गया था उनकी पहचान मैरी एन निकोलस, एनी चैपमैन, एलिजाबेथ स्ट्राइड, कैथरीन एडोवेस और मैरी जेन केली के रूप में हुई। इन पांचों की हत्या में एक ही जैसा तरीका अपनाया गया था।
निकोलस की लाश 31 अगस्त 1888 को सुबह 3.40 बजे के करीब मिली थी। उसके गले में काटने के दो निशान थो और उसके शरीर के निचले हिस्से को चाकू से बुरी तरह काटा गया था।
इसके बाद 8 सितंबर को हैनबरी स्ट्रीट स्पिटफील्ड में चैपमैन की लाश मिली। निकोलस का तरह चैपमैन के गले में भी दो वार किए गए थे। शरीर का निचला हिस्सा काटकर उसका गर्भाशय निकाला गया था। स्ट्राइड और एडोवेस को 30 सितंबर को मारा गया था।
स्ट्राइड की लाश हेनरिक्स स्ट्रीट में मिली थी और उसे भी बुरी तरह काटा गया था। हालांकि इस बात की आशंका जताई गई कि हत्या के दौरान किसी तरह का व्यवधान आया जिसके कारण आरोपी भाग निकला पेट का हिस्सा नहीं चीर पाया। इस घटना के कुछ ही घंटे बाद एडोवेस की लाश मिली थी। उसकी हत्या में भी पहले जैसा तरीका ही अपनाया गया था और उसकी किडनी और गर्भाशय निकाला गया था।
इनके अलावा केली की लाश डॉर्सेट स्ट्रीट में मिली थी। उसके शरीर के टुकड़े किए गए थे और आंतें गायब थीं। 9 नवंबर को उसकी लाश घर में ही बिस्तर पर मिली थी। उसका दिल भी गायब था।
ऐसा था हत्यारे का 'सुपर प्लान'
इन पांचों हत्याओं की जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि सभी घटनाओं को रात में अंजाम दिया गया था। इसके लिए अपराधी ने महीने के आखिर या फिर एक हफ्ते बाद का समय चुना था और सिर्फ वीकेंड पर ही वारदातों को अंजाम दिया।
निकोलस के अलावा सभी पीड़ितों के शरीर का कोई न कोई अंग गायब था और सभी की हत्या में एक ही जैसा तरीका अपनाया गया था।
इन सभी तथ्यों के आधार पर यह माना गया कि इन सभी हत्याओं के लिए कोई एक व्यक्ति ही जिम्मेदार है। कुच वारदातों के बाद एक-दो लोगों ने कातिल को देखने का दावा जरूर किया था। जिसके आधार पर उसकी पहचान की कोशिश की गई लेकिन वह हाथ नहीं आया। लंदन में सीआईडी हेड और अन्य डिटेक्टिव, अपराधी का खुलासा नहीं पर पाए और रिपर मिथ बरकरार रहा।
केली की हत्या के बाद भी शहर में कई हत्याएं हुईं लेकिन किसी को भी इन पांच से नहीं जोड़ा जा सका क्योंकि इनमें वारदात का तरीका बिल्कुल अलग था।
हत्या, तहकीकात और पुलिस की नाकामी
लगातार हो रही वारदातों के बाद पुलिस मे जांच शुरू की। अपराधी को खोजने के पुलिस ने शहर के घर का तलाशी ली और बारीकी से पड़ताल की। फोरेंसिक जांच कराई गई और सभी सबूतों को परखा गया।
इस दौरान पुलिस ने करीब 2000 लोगों से बात की और 300 से ज्यादा लोगों के बारे में गहराई से छानबीन की। इसके अलावा 80 लोगों को हिरासत में भी लिया गया। पहले इन मामलों की जांच मेट्रोपॉलिटन पुलिस और सीआईडी ने शुरू की लेकिन बाद में इससे और भी बड़े डिटेक्टिव जुड़े।
पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा न करने वाले कुछ युवा संगठनों ने खुद ही सड़क पर निकल कर आरोपी की तलाश करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। हत्या के तरीके और समय के आधार पर यह शक जाहिर किया गया कि अपराधी या तो डॉक्टर है या फिर कोई एक्सपर्ट।
जब हत्यारे ने पुलिस को भेजी चिट्ठियां
लगातार हो रही घटनाओं से परेशान पुलिस की मुश्किल तब और बढ़ गई जब आरोपी की और से पुलिस को चिट्ठियां मिलने लगीं। मीडिया कवरेज की वजह से पूरी दुनिया में चर्चित हो चुके 'जैक द रिपर' ने पुलिस को कई पत्र लिखे और चैलेंज किया।
तथाकथित कातिल की ओर से भेजे जा रहे सैकड़ों पत्रों ने पुलिस को और मुसीबत में डाल दिया। पुलिस कभी भी उसका पता नहीं लगा पाई। उसका पहला पत्र प्रकाशित हुआ तो वह और चर्चा में आ गया।
इसके बाद मिले कई पत्रों में ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इसके पीछे भी बिजनेस चलाने की साजिश रची गई थी। मीडिया रिपोर्ट में कातिल को 'जैक द रिपर' नाम दिया गया जिसके बाद पुलिस रिकॉर्ड में भी वह इसी नाम से दर्ज हो गया।
125 साल बाद हुआ रिपर की पहचान का दावा
पुलिस जांच के दौरान कई संदिग्धों से पूछताछ की गई थी। इनमें सबसे ज्यादा शक द ड्यूक ऑफ क्लैरेंसे, सर विलियम गुल, वाल्टर सिकर्ट, जॉन पिजर, जॉर्ज चेपमैन और आरोन कॉस्मिंस्की पर था।
वर्ष 2014 में रसेल एडवर्ड नाम के एक लेखक और खोजी ने 'जैक द रिपर' की मिस्ट्री को सुलझाने का दावा किया था। एडवर्ड ने रिपर का शिकार बनी एडोवेस के शॉल में मिले अहम सबूतों के जरिए रिपर और एडोवेस का डीएनए टेस्ट किया।
एडवर्ड का दावा है कि डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोन कॉस्मिंस्की ही असली अपराधी है। बता दें कि आरोन, पॉलिश का रहने वाला था और इन मामलों में संदिग्ध भी था।