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संत कबीर दास की छह सौ साल पुरानी माला चोरी
अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 02 Dec 2013 11:11 AM IST
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कबीर दास को उनके गुरु रामानंद से भेंट में मिली लाल चंदन के 1051 मनकों की माला कबीरचौरा मूलगादी मठ के बीजक मंदिर से चोरी हो गई।
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चोरी का पता रविवार को सुबह तब चला जब पुजारी आरती करने के लिए मंदिर में गए। चोरों ने भरमाने के लिए काठ की हांडी के पास पुरानी माला के स्थान पर रुद्राक्ष की माला रख दी थी।
शनिवार को मंदिर में दर्शन-ध्यान करने आए थाईलैंड के तीन नागरिकों पर करीब छह सौ साल पुरानी माला उड़ाने का संदेह है। पुलिस ने एयरपोर्ट के अफसरों को अलर्ट कर दिया है।
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कबीरचौरा मूलगादी मठ में बीजक मंदिर में संत कबीर की खड़ाऊं, बीजक की प्रति, काठ की हांडी, चरखा, करघे के पुरजे, गोरखपंथी संत से मिला त्रिशूल आदि के साथ गुरु रामानंद से प्राप्त हजारा माला भी दर्शन के लिए रखी हुई है।
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आमतौर पर इस मंदिर में श्रद्धालु दूर से ही दर्शन करते हैं। शनिवार दोपहर थाईलैंड के तीन नागरिक मठ आए। उनमें से एक ने आगंतुक रजिस्टर में अपना नाम थेले और मोबाइल नंबर लिखा।
थेले के अनुरोध पर पुजारी बनारसी दास ने बीजक मंदिर का ताला खोल दिया। थेले ध्यान लगाने चला गया जबकि उसके दो साथी बाहर ही रहे। उन्होंने साधुओं में एक-एक हजार रुपए के नोट बांटे।
ध्यान के बाद थेले बाहर निकला और ताला बंद करके पुजारी को चाबी सौंप दी। रविवार को सुबह पुजारी को घटना का पता चला तो उन्होंने इसकी सूचना मूलगादी पीठाधीश्वर संत विवेकदास आचार्य को दी। एसपी के मुताबिक विदेशियों के नाम और मोबाइल नंबर भरोसेमंद नहीं लग रहे हैं। फोन स्विच ऑफ है।
लामा के वेष में थे थाई
तीनों थाई नागरिक लामा के वेष में थे। चोरी की सूचना पर संत विवेकदास आचार्य भी रायपुर से रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी तीनों थाईलैंड के श्रद्धालुओं के समूह में आए थे। उन्होंने कबीरदास से जुड़ी कोई वस्तु देने को कहा था। गायब हुई माला की तो मुंहमांगी कीमत देने को तैयार थे, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया था।