फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Crime Archives ›   samajwadi party leader's comunition coding with police officer

‘शर्ट’, ‘मिठाई’ और ‘मुर्गा’ का इस्तेमाल करता था जालसाज सपा नेता

Thu, 11 Jun 2015 03:10 PM IST
चन्द्र मोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा
चन्द्र मोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 11 Jun 2015 03:10 PM IST
विज्ञापन
samajwadi party leader's comunition coding with police officer

सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी की कारस्तानियां कुछ जासूसी उपन्यास की पटकथा सरीखी हैं। लोगों पर धनवर्षा का लालच देकर शातिर ने कुछ ऐसा मायाजाल बुना कि उसे समझ पाना पुलिस के लिए भी मुश्किल हो गया है। कर्नल रंजीत के जासूसी उपन्यास की घटनाओं की तरह जालसाज से एसएमएस पुलिस के लिए पहेली बने हैं।

विज्ञापन


आलू के कारोबारी शैलेंद्र अग्रवाल ने एसएमएस में अपने ट्रेड के कोड का कहीं भी इस्तेमाल नहीं किया। एसएमएस में ‘शर्ट’, ‘मिठाई’ और ‘मुर्गा’ जैसे कोडवर्ड का प्रयोग किया गया है।
विज्ञापन


पुलिस इस कोड के रहस्य से परदा उठाने में जुटी है। पर उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा। आप ही बताइए कि कोई व्यक्ति किसी अफसर को एक बार में कितनी शर्ट दे सकता है, जबकि वह आईएएस हो और उसके घर में गारमेंट का कारोबार भी न होता हो। एक एसमएमस की बानगी कुछ यूं समझिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

आईपीएस ने खुल्लम खुल्ला लिखा SMS में

samajwadi party leader's comunition coding with police officer

शैलेंद्र ने एसएमएस में एक दो तीन नहीं, 50 शर्ट लाने की बात कही है। भला कोई एक साथ इतनी शर्ट का क्या करेगा? पुलिस को संदेह है कि शर्ट लेनदेन का कोड है। संभवत: एक शर्ट एक लाख की ओर इशारा करती है। मतलब 50 लाख।

इसी तरह भला कोई मिठाई का डब्बा लाने की बात एसएमएस पर क्यों बताएगा? वो भी उस अधिकारी को जो मीठा बहुत कम खाता हो? यह एक करोड़ रुपये का कोड वर्ड हो सकता है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह अधिकारी हार्डकोर नानवेज, लेकिन एसएमएस में मुर्गा आने का जिक्र मुर्गे के लिए नहीं, बल्कि जालसाजी के लिए लग रहा है।

शैलेंद्र को रिमांड पर लेकर इन एसएमएस के बारे में भी सवाल किए जाएंगे। तभी पता चलेगा कि राज क्या है? खास बात यह भी रही कि आईएएस अधिकारी ने कोड वर्ड इस्तेमाल किए, जबकि आईपीएस ने खुल्लम खुल्ला लिखा।

जरा भी नहीं डरे पूर्व डीजीपी जालसाजी में

samajwadi party leader's comunition coding with police officer

एक पूर्व डीजीपी तो शैलेंद्र से इतने खुल गए थे कि दिन में कई बार एसएमएस करते थे। पैसे के लेन देन की बातचीत एसएमएस पर होती थी।

उन्हें इस बात का डर नहीं रहा कि अगर कभी यह राज खुला तो उनका क्या होगा? पूर्व डीजीपी को शैलेंद्र ने अपने बैंक से भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र के एकाउंट से लेनदेन के मामले में सबसे ज्यादा एक आईएएस अधिकारी के साथ टकैं, जो आगरा में डीएम रहा। जांच में आया है कि उसने जमीन में भी खूब पैसा लगाया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed