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हिरासत से भागा कैदी, दरोगा जी को 20 साल बाद हुई जेल

Wed, 03 Feb 2016 03:31 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा Updated Wed, 03 Feb 2016 03:31 PM IST
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retired police officer is jailed after 20 years on convict escape case

लड़की को अगवा करने वाले एक आरोपी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना था। तब यूपी के फतेहपुर के खागा में तैनात दरोगा जगदीश भदौरिया को ये काम सौंपा गया।

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लेकिन दरोगा जी जिम्मेदारी से ये काम नहीं कर पाए और आरोपी उनकी पकड़ से फरार हो गया। उस आरोपी को बहुत खोजा गया लेकिन आज तक नहीं मिला।

नतीजतन आरोपी की पत्नी ने दरोगा जी के खिलाफ ही अपहरण का मामला दर्ज करा दिया। और 20 साल चले मुकदमे में रिटायर हो चुके दरोगा जी को 10 साल के लिए जेल जाना पड़ गया। अजीब मामला यूपी के मथुरा का है।
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20 साल पुराने इस मामले की रिपोर्ट भी खागा थाने में ही दर्ज थी। आरोपी को कोसीकलां से पकड़कर ले जाने के दौरान वह लापता हो गया।

दरोगा जी को मिली कैदी के भागने की सजा

retired police officer is jailed after 20 years on convict escape case

वादी पक्ष के अधिवक्ता अनिल आजाद सक्सेना के अनुसार 1995 में फतेहपुर के थाना खागा में लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज की गई।

मामले में कोसीकलां के इंदिरानगर निवासी सियाराम को नामजद किया गया था। उसे पकड़ने के लिए तीन जून 1995 को थाना खागा के दरोगा जगदीश भदौरिया कोसीकलां थाने पहुंचे।

उन्होंने यहां तैनात दरोगा एसके सिंह को मामले की जानकारी दी और थाने की जीडी में एंट्री कराने के बाद एसके सिंह और जगदीश भदौरिया ने दिन में 11 बजे दबिश देकर सियाराम को पकड़ लिया।

कोसीकलां थाने में लाने के बाद एसके सिंह ने सियाराम को जगदीश भदौरिया के सुपुर्द कर दिया। सुपुर्दगी जीडी में दर्ज कराई गई। इसके बाद जगदीश भदौरिया सियाराम को लेकर थाना खागा चले गए। बताया जाता है कि जगदीश भदौरिया अकेले ही थाना खागा पहुंचे। सियाराम उनके साथ नहीं था।

इस पर सियाराम की पत्नी कल्लो ने दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। यह रिपोर्ट लखनऊ से आईजी के निर्देश पर छह फरवरी 1996 को कोसीकलां थाने में दरोगा एसके सिंह और जगदीश भदौरिया के खिलाफ दर्ज की गई। इसमें सियाराम का अपहरण कर गायब करने का आरोप दोनों पुलिसकर्मियों पर लगा।

और भी पुलिस अधिकारी जवाबदेह होने चाहिए थे-दरोगा जी

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विभागीय जांच में एसके सिंह और जगदीश भदौरिया को निलंबित कर दिया गया। बाद में एसके सिंह बहाल हो गए और कोसीकलां पुलिस ने उन्हें क्लीनचिट दी। जगदीश भदौरिया के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई। मामले में 20 साल तक चली सुनवाई के बाद एडीजे द्वितीय राजेन्द्र कुमार ने शनिवार को दरोगा जगदीश भदौरिया को जेल भेज दिया था।

मंगलवार को उसे 10 साल कारावास और 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। सुनवाई के वक्त सियाराम की पत्नी कल्लो और अन्य गवाह मौजूद रहे। मामले में लापता सियाराम का आजतक कुछ पता नहीं चल सका है।

पूरे घटनाक्रम पर 10 साल की सजा पाने के बाद दरोगा जगदीश भदौरिया बोले मुझे थाने से अकेले ही सियाराम को पकड़ने को भेजा गया था। 500 किमी से अधिक दूरी तक अपराधी को पकड़ने अकेले भेजने के मामले में पुलिस अधिकारी भी जवाबदेह होने चाहिए थे।

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