बच्ची की रेप के बाद हत्या, दोषी को दो फांसी, दो उम्रकैद की सजा
बॉबे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने दो साल की बच्ची से रेप और उसकी हत्या
यवतमाल की निचली अदालत ने रेप और हत्या के दोषी 21 वर्षीय शत्रुघ्न मसराम को दोहरी फांसी और दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसकी पुष्टि नागपुर हाईकोर्ट ने सोमवार को की। दिल्ली निर्भयाकांड के बाद बलात्कार की धारा में हुए संशोधन के बाद किसी अदालत की ओर से पहली बार इस तरह की सजा सुनाई गई है।
नागपुर हाईकोर्ट के जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस प्रसन्न वाड़ले ने अपने फैसले में इस सजा की पुष्टि की। गौरतलब है कि रेप के आरोपी ने 11 फरवरी 2013 को दो साल की बच्ची का रेप कर उसकी हत्या कर दी थी।
इन धाराओं के तहत दी गई दोहरी सजा
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, बलात्कार की धारा में हुए संशोधन के बाद निचली अदालत ने दोषी शत्रुघ्न को 376ए तहत फांसी दी, अदालत ने हत्या के लिए 302 के तहत मौत की एक और सजा सुनाई थी।
इतना ही नहीं फांसी की दो सजाएं मिलने के बाद बच्ची से रेप और हत्या के दोषी शत्रुघ्न को धारा 376 भाग दो के तहत एक आजीवन कारावास की सजा दी गई जबकि आजीवन कारावा की दूसरी सजा पॉस्को एक्ट 2012 के तहत दी गई।
निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते वक्त हाईकोर्ट ने यह भी माना कि जुर्म करने वाली की उम्र काफी कम है लेकिन इसके बावजूद उसके अपराधों के लिए सजा में किसी प्रकार की रियायत नहीं की। अदालत ने इस अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते दोषी की दोहरी सजा बरकार रखी।
गरीब परिवार से थी बच्ची
यह घटना महाराष्ट्र के यावतमहल शहर की है। बताते हैं बच्ची के माता पिता बेहद गरीब हैं और वह मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। पीड़ित मजदूर परिवार आंध्रप्रदेश का रहने वाला है जो यावतमल के घटन्जी में घटना से चार महीने पहले मजदूरी करने लिए आया था।
एक दिन बच्ची के माता पिता मंदिर जाने के लिए बच्ची को अपने एक रिश्तेदार घर छोड़ गए। मंदिर लौटकर आए तो उन्होंने देखा कि बच्ची घर में नहीं है इसके बाद वह बच्ची की तलाश करने लगे तभी देखा कि एक कंस्ट्रक्शन साइट में आरोपी मसराम बच्ची के साथ छुपने का प्रयास कर रहा था।
बताते हैं कि मसराम ने बच्ची का रेप किया तो मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। लेकिन बच्ची को उसके माता-पिता अस्पताल ले गए जहां पर डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। आरोपी मसराम ने बच्ची से दरिंदगी करते हुए दांतों से काटकर बच्ची का मांस निकाल लिया था। बच्ची के पूरे शरीर में दातों के निशान थे।